वाराणसी की ऐतिहासिक दाल मंडी में चौड़ीकरण अभियान: टूटते घर, बिखरती रोज़ी-रोटी और उठते सवाल

वाराणसी। शहर की ऐतिहासिक दाल मंडी इन दिनों भारी हलचल और तनाव का केंद्र बनी हुई है। सड़क चौड़ीकरण और सुंदरीकरण परियोजना के तहत यहां बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि संकरी गलियों को चौड़ा कर यातायात सुगम बनाना और क्षेत्र का विकास करना जरूरी है। लेकिन दूसरी ओर स्थानीय दुकानदारों और मकान मालिकों का आरोप है कि यह विकास उनकी कीमत पर हो रहा है—बिना पर्याप्त मुआवज़े और उचित सुनवाई के।

ढहा दी बनारस की दालमंडी...हमें रोकने के लिए उतर गया प्रशासन..चारों तरफ चीख  पुकार..Ground Report

क्या है पूरा मामला?

दाल मंडी, जो वर्षों से अनाज और किराना व्यापार का प्रमुख केंद्र रही है, अपनी संकरी गलियों और घनी आबादी के लिए जानी जाती है। प्रशासन की योजना के अनुसार 10–12 फीट चौड़ी गलियों को 50–60 फीट तक चौड़ा किया जाना है। इसके लिए कथित तौर पर करीब 187 दुकानों और मकानों को चिह्नित किया गया है, जिनमें से कई पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई निर्माण मजबूत और पक्के हैं, फिर भी उन्हें “जर्जर” बताकर तोड़ा जा रहा है। कई जगहों पर मकानों पर क्रॉस के निशान लगा दिए गए हैं, जिन्हें लोग अपनी बारी आने का संकेत मान रहे हैं।

मुआवज़े पर विवाद

सबसे बड़ा विवाद मुआवज़े को लेकर है। प्रभावित परिवारों का दावा है कि या तो मुआवज़ा मिला ही नहीं, या फिर बाजार मूल्य से बहुत कम राशि प्रस्तावित की गई। कुछ लोगों ने कहा कि करोड़ों की संपत्ति के बदले लाखों का प्रस्ताव दिया जा रहा है, जिसे वे स्वीकार नहीं कर पा रहे।

कई निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि अदालत से राहत (स्टे) मिलने के बावजूद तोड़फोड़ जारी रही। हालांकि इन दावों पर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अलग-अलग मामलों में भिन्न बताई जा रही है।

डर और असुरक्षा का माहौल

मौके पर मौजूद लोगों में भय और असुरक्षा साफ दिखाई दी। कुछ दुकानदारों ने कहा कि ग्राहक आना बंद हो गए हैं, जिससे पहले ही कारोबार ठप हो चुका है। कई परिवारों ने बताया कि उन्हें बहुत कम समय का नोटिस देकर जगह खाली करने को कहा गया।

कुछ लोगों का आरोप है कि विरोध करने पर दबाव बनाया जाता है या पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। हालांकि पुलिस का कहना है कि उनकी प्राथमिकता सुरक्षा बनाए रखना और ध्वस्तीकरण के दौरान किसी को नुकसान से बचाना है।

प्रशासन का पक्ष

प्रशासन का तर्क है कि चौड़ीकरण जनहित में है और भविष्य के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करेगा। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है और सुरक्षा कारणों से मीडिया व आम लोगों की आवाजाही कुछ इलाकों में सीमित की गई है, ताकि मलबा गिरने जैसी घटनाओं से बचा जा सके।

विकास बनाम विस्थापन

दाल मंडी की तस्वीरें एक बड़े सवाल को जन्म देती हैं—क्या विकास और मानवीय संवेदनाएं साथ-साथ चल पा रही हैं? जहां एक ओर बेहतर सड़कें और ढांचा शहर के लिए जरूरी हैं, वहीं दूसरी ओर दशकों से बसे लोगों का पुनर्वास, मुआवज़ा और सम्मानजनक संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

दाल मंडी के कई परिवार आज अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित हैं। टूटती दीवारों के बीच उनकी सबसे बड़ी मांग है—न्यायपूर्ण मुआवज़ा, पारदर्शिता और सुने जाने का अधिकार।