घर की छत पर कोन ? मासूम ने उस शाम छत पर क्या देख लिया था? | Gwalior Case | Investigation

घर की छत पर कौन? मासूम ने उस शाम क्या देख लिया था कि सगी माँ बन गई उसकी जान की दुश्मन?
ग्वालियर, मध्य प्रदेश। 28 अप्रैल 2023 की वह शाम ग्वालियर के थाटीपुर इलाके के लिए किसी सामान्य शाम जैसी ही थी, लेकिन तारामाई कॉलोनी के एक घर में जो कुछ घटित होने वाला था, उसने ममता के वजूद पर ही सवाल खड़े कर दिए। एक मां, जिसे ईश्वर का दूसरा रूप माना जाता है, उसी के हाथों उसके 3 साल के मासूम बेटे जतिन (सन्नी) की जीवनलीला समाप्त हो गई।
यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं है, बल्कि उस गहरे राज और ‘गिल्ट सिंड्रोम’ की है जिसने एक मुजरिम माँ को 4 महीने तक चैन से सोने नहीं दिया।
एक हंसता-खेलता परिवार और खुशियों को लगी नजर
ध्यान सिंह राठौर, जो मध्य प्रदेश पुलिस में बतौर कांस्टेबल तैनात थे, अपनी पत्नी ज्योति और 3 साल के बेटे जतिन के साथ ग्वालियर में रहते थे। साल 2017 में शादी हुई और 2020 में जतिन का जन्म हुआ। ध्यान सिंह अपनी ड्यूटी में व्यस्त रहते थे, इसलिए पत्नी का मन बहलाने और आर्थिक मदद के लिए उन्होंने घर के नीचे ही एक प्लास्टिक के सामान की दुकान खुलवा दी।
यहीं से कहानी में एंट्री हुई उदय इंडोलिया की। उदय, पड़ोस में रहने वाले हेमंत राठौर का दामाद था। दुकान पर आने-जाने के दौरान ज्योति और उदय के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। धीरे-धीरे यह रिश्ता मर्यादाओं की सीमा लांघ गया।
28 अप्रैल की वह काली शाम: छत का खामोश राज
उस दिन घर में एक पारिवारिक आयोजन था। मेहमानों की भीड़ और संगीत के शोर के बीच ज्योति और उदय नजरें बचाकर छत पर चले गए। वे अपने ही ख्यालों में डूबे थे कि तभी 3 साल का जतिन अपनी माँ को ढूंढते हुए छत पर पहुँच गया।
मासूम जतिन ने अपनी आँखों से वह देख लिया जो उसके माता-पिता के बीच के विश्वास को खत्म कर सकता था। बदनामी के डर और राज खुल जाने के खौफ ने ज्योति की ममता को पत्थर बना दिया। उसने आव देखा ना ताव, जतिन को छत से नीचे फेंक दिया।
नीचे गिरते ही चीख-पुकार मच गई। जतिन को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ 24 घंटे मौत से लड़ने के बाद उस नन्ही जान ने दम तोड़ दिया। उस वक्त सबको यही लगा कि यह एक दुखद हादसा था।
जब मासूम की यादें बनीं ‘साया’ और शुरू हुआ पछतावा
जतिन की मौत के बाद 4 महीने बीत गए। कानून की नजरों में यह केस बंद था, लेकिन ज्योति के मन में एक जंग चल रही थी। उसे हर रात सपनों में जतिन दिखाई देने लगा। वह पसीने से तर-बतर होकर उठ जाती। उसे महसूस होता कि जतिन उससे पूछ रहा है— “माँ, मेरी क्या गलती थी?”
मानसिक दबाव इतना बढ़ा कि ज्योति अवसाद में चली गई। ध्यान सिंह उसे डॉक्टरों और तांत्रिकों के पास भी ले गए, लेकिन रूह के जख्म का इलाज कहीं नहीं था।
कांस्टेबल पति की सूझबूझ और इंसाफ की जीत
एक रात बेचैनी की इंतिहा हो गई और ज्योति ने अपने पति के सामने सब उगल दिया। उसने कहा— “जतिन खुद नहीं गिरा था, वह मेरी वजह से हुआ।” ध्यान सिंह एक अनुभवी पुलिसकर्मी थे। उन्होंने तुरंत आपा नहीं खोया बल्कि सबूत जुटाने की ठानी। उन्होंने ज्योति की बातें रिकॉर्ड कीं और उसके मोबाइल से कॉल डिटेल्स निकालीं, जहाँ उदय इंडोलिया के साथ उसके रिश्तों के पुख्ता प्रमाण मिल गए।
अंजाम: सलाखों के पीछे ममता की हत्यारी
ध्यान सिंह ने खुद अपनी पत्नी के खिलाफ थाटीपुर थाने में सबूत पेश किए। पुलिस ने ज्योति और उदय दोनों को गिरफ्तार कर लिया। कड़ाई से पूछताछ में ज्योति ने कबूल किया कि बदनामी के डर से उसने अपने ही बेटे की जान ली थी।
सितंबर 2023 में पुलिस ने इस जघन्य मामले का खुलासा किया। आज ज्योति और उदय दोनों जेल की सलाखों के पीछे अपने किए की सजा भुगत रहे हैं।
निष्कर्ष
यह मामला हमें सिखाता है कि क्षणिक सुख और गलत रास्ते का अंजाम कितना भयानक हो सकता है। जहाँ एक तरफ एक माँ ने अपनी ममता का गला घोंटा, वहीं एक पिता ने अपने ‘फर्ज’ और ‘न्याय’ को परिवार से ऊपर रखकर समाज में एक मिसाल पेश की।
क्या आपको लगता है कि ध्यान सिंह ने अपनी पत्नी को जेल भेजकर सही किया? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।
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