नए साल पर लड़की ने प्रेमी के साथ कर दिया कारनामा/S.P बोला बेटी सही काम किया/

विश्वासघात का अंत: एक दर्दनाक दास्तां

अध्याय 1: बादली गांव की शांति

हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित ‘बादली’ एक शांत और खुशहाल गांव था। इसी गांव की एक छोटी सी गली में तमन्ना देवी अपनी दो बेटियों, साधना और डिंपल के साथ रहती थीं। तमन्ना देवी गांव में एक किराने की दुकान चलाती थीं। उनके पति की छह साल पहले एक लंबी बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी।

तमन्ना एक स्वाभिमानी महिला थीं। वे सुबह जल्दी उठकर घर का काम निपटातीं और फिर दुकान पर बैठ जातीं। उनकी दुकान पर गांव के लोग आना पसंद करते थे, क्योंकि वे कम मुनाफे में अच्छा सामान बेचती थीं। उनकी बड़ी बेटी साधना कॉलेज में पढ़ती थी, वह शांत और पढ़ाई में तेज थी। छोटी बेटी डिंपल ने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और घर के कामों में मां का हाथ बटाती थी।

अध्याय 2: गोविंद का प्रवेश

नवंबर 2025 की एक सुबह, सब कुछ सामान्य था। साधना कॉलेज के लिए निकली। कॉलेज में उसकी मुलाकात दूसरे गांव के एक लड़के गोविंद से हुई। गोविंद देखने में सभ्य और बातों में बहुत मीठा था। वह अक्सर भोली-भाली लड़कियों को अपनी बातों के जाल में फंसाने का आदी था।

साधना को गोविंद की नीयत का जरा भी अंदाजा नहीं था। धीरे-धीरे उनकी बातचीत बढ़ी और दोस्ती गहरी हो गई। गोविंद ने बड़ी चालाकी से साधना का विश्वास जीत लिया। कुछ ही दिनों में वे फोन पर घंटों बातें करने लगे। साधना को लगा कि उसे अपनी पसंद का जीवनसाथी मिल गया है।

एक दिन साधना ने गोविंद को अपने घर बुलाया। वहां उसकी मुलाकात तमन्ना देवी और डिंपल से हुई। तमन्ना को भी गोविंद अच्छा लगा और उन्होंने मन ही मन साधना का विवाह उससे करने का विचार कर लिया। लेकिन उसी दिन गोविंद की नजर डिंपल पर पड़ी। डिंपल, साधना से भी अधिक सुंदर थी। गोविंद की नीयत डोल गई। उसने मन ही मन एक खौफनाक योजना बनाई कि वह दोनों बहनों को अपने जाल में फंसाएगा।

अध्याय 3: जन्मदिन और विश्वासघात

16 नवंबर 2025 को गोविंद का जन्मदिन था। उसने साधना को एक होटल में पार्टी देने के बहाने बुलाया। वहां उसने साधना को अपनी बातों में फंसाकर नशीले पेय का सेवन करा दिया। नशे की हालत में, जब साधना अपने होश में नहीं थी, गोविंद ने उसके साथ मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं और गलत संबंध बनाए।

जब साधना को होश आया, तो वह टूट चुकी थी। गोविंद ने उसे शादी का झांसा देकर शांत करा दिया। शाम को जब वह साधना को घर छोड़ने आया, तो उसने तमन्ना देवी के सामने भी शराफत का ढोंग किया। तमन्ना को लगा कि लड़का कितना नेक है जो नशे की हालत में भी उसकी बेटी को सुरक्षित घर छोड़ गया। उन्हें नहीं पता था कि पर्दे के पीछे क्या खेल खेला जा चुका है।

अध्याय 4: डिंपल का शिकार

गोविंद का लालच यहीं नहीं रुका। 20 नवंबर को जब उसे पता चला कि तमन्ना देवी अपने मायके गई हैं और साधना कॉलेज में है, तो वह सीधे उनके घर पहुंच गया। उसने डिंपल को झूठ बोला कि साधना का एक्सीडेंट हो गया है और वह अस्पताल में भर्ती है।

घबराहट में डिंपल उसके साथ मोटरसाइकिल पर बैठ गई। गोविंद उसे एक सुनसान इलाके में ले गया और चाकू की नोक पर उसे डरा-धमकाकर खेत में ले गया। वहां उसने डिंपल के साथ दुर्व्यवहार किया और उसकी एक आपत्तिजनक वीडियो बना ली। उसने धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया, तो वह वीडियो इंटरनेट पर डाल देगा। डर और शर्म के कारण डिंपल चुप रह गई। यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

अगले कुछ हफ्तों तक गोविंद वीडियो के नाम पर डिंपल को ब्लैकमेल करता रहा और उसे बार-बार होटल ले जाकर उसका शोषण करता रहा।

अध्याय 5: सच का खुलासा

25 दिसंबर को डिंपल की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे उल्टियां होने लगीं। साधना उसे डॉक्टर के पास ले गई। वहां से लौटते समय डिंपल अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाई और फूट-फूट कर रोने लगी। उसने साधना को अपनी पूरी आपबीती सुना दी।

साधना के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे एहसास हुआ कि जिस लड़के को उसने प्यार किया, वह एक दरिंदा था जिसने न केवल उसे, बल्कि उसकी छोटी बहन को भी बर्बाद कर दिया था। दोनों बहनों ने मिलकर फैसला किया कि वे अब और नहीं सहेंगी और कानून को हाथ में लेने के बजाय खुद ही उस दरिंदे को सजा देंगी।

अध्याय 6: प्रतिशोध की खौफनाक रात

30 दिसंबर 2025 को जब उनकी मां घर पर नहीं थीं, साधना ने एक योजना बनाई। उसने डिंपल से गोविंद को उसी होटल में बुलाने के लिए कहा। गोविंद खुश था, उसे लगा कि लड़कियां अब पूरी तरह उसके वश में हैं।

रात करीब 9:30 बजे गोविंद नशे में धुत होकर होटल के कमरे में पहुंचा। जैसे ही उसने कमरे में प्रवेश किया, दोनों बहनें वहां तैयार थीं। साधना के हाथ में एक तेज चाकू था। जैसे ही गोविंद करीब आया, साधना ने उस पर वार कर दिया। गुस्से और नफरत में डूबी दोनों बहनों ने मिलकर गोविंद पर तब तक प्रहार किए जब तक उसकी जान नहीं निकल गई।

होटल के मालिक नितिन ने जब चीखें सुनीं, तो वह कमरे की ओर भागा। वहां का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। उसने तुरंत पुलिस को फोन किया।

उपसंहार

पुलिस ने साधना और डिंपल को मौके से गिरफ्तार कर लिया। थाने में पूछताछ के दौरान दोनों बहनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और गोविंद के द्वारा किए गए अत्याचारों की पूरी कहानी सुनाई। बादली गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई।

कानूनी तौर पर किसी की जान लेना अपराध है, लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए। क्या उन लड़कियों के पास कोई और रास्ता था? क्या हमारा समाज और कानून इतनी जल्दी न्याय दे पाता कि उन लड़कियों का सम्मान वापस लौट आता? आज भी साधना और डिंपल जेल में हैं और कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही हैं, लेकिन यह कहानी सदियों तक एक चेतावनी की तरह याद रखी जाएगी कि विश्वासघात और शोषण का अंत कितना भयानक हो सकता है।