चेयरमैन को लगा उसने गरीब लड़की से शादी की, पर वो निकली…😱💔 Hindi Story

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चेयरमैन को लगा उसने गरीब लड़की से शादी की, पर वो निकली…

भाग 1: पहली मुलाकात

मुंबई शहर की सबसे ऊंची और आलीशान इमारत, द्रोय टावर, की सबसे ऊपरी मंजिल पर एक नई कहानी शुरू हो रही थी। यह सुहागरात की रात थी, लेकिन कमरे में गुलाबों की खुशबू से ज्यादा अहंकार की गंध फैली हुई थी। अनन्या, जो लाल जोड़े में लिपटी हुई थी, कमरे के बीचोंबीच फूलों से सजी सेज पर बैठी थी। वह किसी मूर्ति की तरह शांत थी, उसकी सादगी ऐसी थी कि कोई भी उसे देखकर कह सकता था कि वह इस राजमहल जैसे घर के लिए नहीं बनी है। वह एक साधारण से अनाथालय में पली-बढ़ी थी, जहां दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ता था।

उसके पति, सिद्धार्थ रॉय, देश के सबसे युवा और सफल बिजनेसमैन थे। उनके पास दौलत और ताकत थी, लेकिन उनके दिल में घमंड और अहंकार भी था। दरवाजा जोर से खुला और सिद्धार्थ अंदर आया। उसने अपना महंगा कोट उतारकर सोफे पर फेंका और अपनी टाई ढीली करते हुए अनन्या की ओर एक तिरस्कार भरी नजर डाली।

भाग 2: सिद्धार्थ का घमंड

सिद्धार्थ ने कड़वाहट भरी आवाज में कहा, “और यह भी मत सोचना कि तुम अब मिसेज रॉय बन गई हो। मेरी नजर में तुम कल भी एक मामूली वेटर थी और आज भी वही हो।” अनन्या ने धीरे से अपना सिर उठाया। उसकी आंखों में ना तो डर था और ना ही आंसू। बस एक गहरी खामोशी थी। उसने सिद्धार्थ की आंखों में देखा और बहुत ही धीमी आवाज में कहा, “मैं जानती हूं सिद्धार्थ जी, हमारे बीच का यह रिश्ता सिर्फ एक समझौते पर टिका है।”

सिद्धार्थ हंसा, एक ऐसी हंसी जो कानों में चुभती थी। “समझौता नहीं, अनन्या। इसे खैरात कहते हैं। मेरी दादी की जिद थी कि मैं शादी करूं और मुझे अपनी कंपनी के शेयर्स बचाने के लिए एक पत्नी की जरूरत थी। मुझे एक ऐसी लड़की चाहिए थी जो गूंगी गुड़िया की तरह रहे, जिसका कोई अपना वजूद ना हो।”

भाग 3: अनन्या की पहचान

सिद्धार्थ ने अनन्या के करीब आकर अपनी जेब से चेकबुक निकालकर एक चेक फाड़ा। “यह लो ₹1 लाख। तुम्हारे उस अनाथालय के लिए जहां से तुम आई हो। इसे अपनी कीमत समझो या मेरी दरियादिली। लेकिन याद रखना, इस कमरे की चार दीवारों के बाहर तुम मेरी पत्नी होने का नाटक करोगी। मगर इस कमरे के अंदर तुम मेरे लिए अदृश्य हो।”

अनन्या ने उस चेक को देखा। वह कागज का टुकड़ा उसके लिए कोई मायने नहीं रखता था। अगर सिद्धार्थ को सच पता होता तो शायद उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती। जिसे वह 1 लाख की भीख दे रहा था, वह असल में ग्लोबल वर्मा ग्रुप की इकलौती वारिस थी, जिसका सालाना टर्नओवर सिद्धार्थ की कंपनी से 10 गुना ज्यादा था।

भाग 4: सिद्धार्थ का अपमान

अनन्या ने अपनी पहचान सिर्फ इसलिए छिपाई थी क्योंकि वह देखना चाहती थी कि क्या कोई उसे उसके पैसे के बिना भी प्यार कर सकता है। लेकिन आज उसकी उम्मीदों का महल चकनाचूर हो गया था। उसने चेक को हाथ भी नहीं लगाया। “पैसे से आप बिस्तर खरीद सकते हैं, नींद नहीं। आप इंसान खरीद सकते हैं, वफादारी नहीं। रख लीजिए इसे। मुझे इसकी जरूरत नहीं है।”

सिद्धार्थ का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। आज तक किसी ने, खासकर किसी गरीब इंसान ने, उसके पैसे को ठुकराने की हिम्मत नहीं की थी। उसने अनन्या की कलाई मरोड़ दी। “भूल गई अपनी औकात? दो दिन पहले तक तुम होटलों में झूठे बर्तन साफ करती थी। मैंने तुम्हें इस महल में पनाह दी है। अगर मैं चाहूं तो अभी तुम्हें धक्के मारकर बाहर निकाल सकता हूं।”

अनन्या को दर्द हो रहा था, लेकिन उसने उफ तक नहीं की। उसने बस सिद्धार्थ की आंखों में देखा और सोचा, “जिस दिन तुम्हें मेरी असली औकात पता चलेगी, उस दिन तुम्हें अपने आज के हर एक शब्द पर पछतावा होगा।”

भाग 5: मीडिया का ध्यान

तभी कमरे का इंटरकॉम बजा। सिद्धार्थ ने झटके से अनन्या का हाथ छोड़ा और फोन उठाया। दूसरी तरफ उसकी मां, निर्मला देवी, थीं। “बेटा, नीचे मीडिया वाले आए हैं। वो नई बहू को देखना चाहते हैं। जल्दी नीचे आओ।”

सिद्धार्थ ने फोन रखा और अनन्या की तरफ उंगली दिखाई। “आंसू पोंछो और चेहरे पर एक झूठी मुस्कान चिपका लो। नीचे दुनिया खड़ी है और उन्हें यह लगना चाहिए कि हम दुनिया के सबसे खुशहाल लोग हैं।” सिद्धार्थ ने अनन्या का हाथ इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उसकी उंगलियों के निशान अनन्या की कलाई पर छप रहे थे।

भाग 6: रिसेप्शन का नाटक

जैसे ही वे दोनों सीढ़ियों से नीचे उतरे, कैमरों की फ्लैशाइट्स ने उनकी आंखों को चौंका दिया। पूरा हॉल शहर के नामचीन हस्तियों, बिजनेस टाइकून और मीडिया वालों से भरा हुआ था। हर किसी की नजर उस जोड़े पर थी। रॉय एंपायर का राजकुमार और उसकी सिंड्रेला।

निर्मला देवी ने माइक हाथ में लिया और मीठी मगर चुभती हुई आवाज में कहा, “देवियों और सज्जनों, मिलिए मेरे बेटे सिद्धार्थ और मेरी बहू अनन्या से। अनन्या एक बहुत ही साधारण और गरीब परिवार से है। लेकिन हमने सोचा कि इंसान की पहचान उसके बैंक बैलेंस से नहीं, उसके संस्कारों से होनी चाहिए। हमने इसे एक नई जिंदगी दी है।”

भाग 7: अनन्या का जवाब

भीड़ ने तालियां बजाई, लेकिन उन तालियों में सम्मान से ज्यादा दया का भाव था। अनन्या को ऐसा लगा जैसे उसे भरे बाजार में नंगा किया जा रहा हो। तभी एक मशहूर और थोड़े बदतमीज किस्म के पत्रकार ने भीड़ से आवाज लगाई। “मिसेज रॉय, पत्रकार ने व्यंग से पूछा, आप एक अनाथालय से आई हैं, जहां खाने के लाले पड़े रहते थे। अचानक इतने बड़े साम्राज्य की मालकिन बनकर आपको कल्चर शॉक तो लगा होगा? क्या आपको डर नहीं लगता कि आप इस हाई सोसाइटी में कहीं खो जाएंगी?”

पूरा हॉल शांत हो गया। सिद्धार्थ को लगा कि अब उसकी नाक कटने वाली है। वह आगे बढ़ा और माइक छीनने ही वाला था, लेकिन उससे पहले ही अनन्या ने सिद्धार्थ के हाथ से माइक को बहुत ही नजाकत से अपनी ओर कर लिया।

भाग 8: अनन्या की ताकत

“डर उन्हें लगता है जिन्हें अपनी पहचान खोने का खौफ हो। और रही बात हाई सोसाइटी की, तो अमीरी कपड़ों के ब्रांड या बैंक बैलेंस में नहीं होती। अमीरी सोच में होती है। मैंने गरीबी देखी है। इसीलिए मैं जमीन की कीमत जानती हूं। और जो जमीन से जुड़ा बेरी होता है, उसे ऊंचाइयों से गिरने का डर नहीं होता।”

अनन्या का जवाब इतना सधा हुआ और प्रभावशाली था कि कुछ पलों के लिए हॉल में सन्नाटा छा गया। सिद्धार्थ सन्न रह गया। उसने अनन्या की तरफ ऐसे देखा जैसे वह कोई अजनबी हो। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस लड़की को वह अनपढ़ और गमवार समझ रहा था, उसने पूरे मीडिया को चुप करा दिया।

भाग 9: रणजीत खुराना का आगमन

तभी हॉल के मुख्य द्वार पर हलचल हुई। “अरे देखो कौन आया है, रणजीत खुराना!” किसी ने चिल्लाकर कहा। रणजीत खुराना, देश के सबसे बड़े निवेशक और एशिया के सबसे अमीर आदमियों में से एक, सिद्धार्थ का आदर्श था। सिद्धार्थ की खुशी का ठिकाना नहीं था। “मां, खुराना सर आए हैं। अगर उन्होंने आज हमारी कंपनी में दिलचस्पी दिखा दी, तो हम नंबर वन बन जाएंगे।”

रणजीत खुराना अपनी रॉबीली चाल चलते हुए अंदर आए। उनके पीछे बॉडीगार्ड्स की फौज थी। सिद्धार्थ ने हाथ बढ़ाते हुए कहा, “मिस्टर खुराना, यह मेरा सौभाग्य है कि आप मेरी शादी के रिसेप्शन में आए।” लेकिन रणजीत खुराना ने सिद्धार्थ को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। उनकी नजरें सिद्धार्थ के पीछे खड़ी अनन्या पर टिकी हुई थीं।

भाग 10: अनन्या की पहचान का खुलासा

रणजीत खुराना, जो मंत्रियों के सामने भी सर नहीं झुकाते थे, वह अनन्या के सामने विनीत भाव से खड़े थे। “मैम, आप यहां…” खुराना ने दबी आवाज में कहा। अनन्या ने उन्हें अपनी आंखों से एक तीखा इशारा किया, चुप रहने का इशारा। खुराना तुरंत समझ गए। उन्होंने ग्लोबल वर्मा ग्रुप की इकलौती वारिस को कैसे नहीं पहचाना?

लेकिन मालकिन का आदेश था, इसीलिए उन्होंने अपनी बात बदल दी। “माफ कीजिएगा,” खुराना ने बात संभालते हुए कहा। “मुझे लगा मैंने कहीं देखा है इन्हें। खैर, मिस्टर रॉय, शादी की बधाई।” सिद्धार्थ को कुछ अजीब लगा। खुराना ने उसे छोड़कर पहले उसकी मामूली बीवी से बात करने की कोशिश क्यों की?

भाग 11: सिद्धार्थ की गलती

“धन्यवाद सर,” सिद्धार्थ ने अपनी खीसे निपोड़ते हुए कहा। “आइए, प्लीज डिनर लीजिए।” पार्टी देर रात तक चली। जब मेहमान जा चुके थे और घर की बत्तियां बुझाई जा रही थीं, तब असली तमाशा शुरू होने वाला था। निर्मला देवी ने अनन्या को रोका। “रुको,” निर्मला ने कटई से कहा। “मेहमानों के सामने तुमने जो अंग्रेजी झाकर होशियारी दिखाई है, उससे यह मत सोचना कि मैं इंप्रेस हो गई हूं। अब जाओ और जाकर किचन साफ करो। आज से सारे नौकरों की छुट्टी। इस घर का सारा काम तुम करोगी। यही तुम्हारी औकात है।”

भाग 12: अनन्या की प्रतिरोध

अनन्या ने एक बार फिर अपनी मुट्ठियां भींची। उसका सब्र अब जवाब दे रहा था। वह चुपचाप किचन की ओर बढ़ी। लेकिन मन ही मन उसने फैसला कर लिया था। यह रात आखिरी रात होगी जब वह यह अपमान सहन करेगी। उसे अभी अपने पिता के वकीलों से संपर्क करना था। खेल अब शुरू होने वाला था।

भाग 13: काव्या की मदद

जैसे ही वह किचन में घुसी, उसने देखा कि वहां पहले से कोई खड़ा था। अंधेरे में एक परछाई। “कौन है वहां?” अनन्या ने पूछा। परछाई उजाले में आई। वह सिद्धार्थ की छोटी बहन काव्या थी। काव्या की आंखों में डर था। “भाभी, प्लीज मेरी मदद कीजिए,” वह रो पड़ी। “भाई और मां मुझे एक ऐसे इंसान से शादी करने के लिए मजबूर कर रहे हैं जो मेरी उम्र से दो गुना बड़ा है। सिर्फ बिजनेस डील के लिए।”

अनन्या ठिठक गई। उसे लगा था कि इस घर में सब एक जैसे हैं, जालिम और मतलबी। लेकिन यहां एक और शिकार मौजूद था। काव्या के आंसुओं ने अनन्या के दिल में दबी नफरत की आग को और भड़काया। लेकिन साथ ही एक नई जिम्मेदारी का एहसास भी कराया।

भाग 14: नई जिम्मेदारी

अनन्या ने काव्या के आंसू पोंछे और उसे गले लगा लिया। “रो मत काव्या,” अनन्या ने दृढ़ता से कहा। “जब तक मैं यहां हूं, तुम्हारा सौदा कोई नहीं कर सकता। यह मेरा वादा है तुमसे।” अगली सुबह रॉय मेंशन में घमाघमी थी। आज वही दिन था जब काव्या का रिश्ता पक्का होने वाला था। लड़का सेठ जगमोहन उम्र में 50 बार था।

भाग 15: अनन्या का प्रतिरोध

अनन्या सुबह 4:00 बजे से जागी हुई थी। उसने पूरे घर का काम किया, फर्श साफ किया और अब डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा रही थी। निर्मला देवी सोफे पर बैठकर हुकुम चला रही थी। “अरे ओ महारानी, जल्दी चल। सेठ जी आने वाले हैं। अगर नाश्ते में कोई कमी रही तो तेरी खैर नहीं।”

सिद्धार्थ सीढ़ियों से उतरते हुए आया। उसने आते ही कॉफी का घूंट भरा और कप जोर से टेबल पर पटक दिया। “यह क्या है? मैंने कहा था ना चीनी कम होनी चाहिए।” अनन्या ने चुपचाप कप उठाया और दूसरा कप लाने के लिए मुड़ गई।

भाग 16: जगमोहन का आगमन

तभी बाहर एक महंगी गाड़ी रुकी। सेठ जगमोहन अपने मोटे पेट और गले में सोने की जंजीरें लटकाए अंदर आया। उसकी नजरें घर की सजावट से ज्यादा काव्या पर टिकी थीं। उसकी हवस भरी निगाहें देखकर किसी को भी घिन आ जाए। “आइए आइए जगमोहन जी,” निर्मला देवी ने अपनी बत्तीसी दिखाते हुए स्वागत किया। “हमारी काव्या तो आप ही का इंतजार कर रही थी।”

भाग 17: अनन्या का साहस

जगमोहन सोफे पर पसर गया और काव्या को ऊपर से नीचे तक घूरते हुए बोला, “वाह, फोटो से भी ज्यादा हसीन है।” सिद्धार्थ ने इसे नजरअंदाज कर दिया लेकिन अनन्या की आंखों में अंगारे दहक उठे। फिर भी उसने संयम रखा। सिद्धार्थ ने फाइल खोली। “जगमोहन सर, यह 50 करोड़ की इन्वेस्टमेंट के पेपर्स हैं। जैसा आपने कहा था, हम अपनी कंपनी के 20% शेयर्स आपके नाम कर रहे हैं।”

जगमोहन पेन निकालकर साइन करने ही वाला था कि कमरे में एक शांत मगर स्पष्ट आवाज गूंजी। “अगर मैं आपकी जगह होती तो इन पेपर्स पर साइन नहीं करती सिद्धार्थ जी।” सब चौंक गए। यह आवाज अनन्या की थी।

भाग 18: अनन्या की हिम्मत

“क्योंकि जिस जे डॉट एम बिल्डर्स के नाम पर यह डील हो रही है, वह कंपनी पिछले हफ्ते ही दिवालिया घोषित होने की कगार पर है।” सिद्धार्थ हक्का-बक्का रह गया। “क्या यह सच है?” जगमोहन हदबद्धा गया। “यह सब झूठ है। तुम एक नौकरानी की बात मानोगे?”

भाग 19: सिद्धार्थ का अहंकार

सिद्धार्थ ने इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की लेकिन अनन्या ने सिद्धार्थ के हाथ से माइक को बहुत ही नजाकत से अपनी ओर कर लिया। “डर उन्हें लगता है जिन्हें अपनी पहचान खोने का खौफ हो। और रही बात हाई सोसाइटी की, तो अमीरी कपड़ों के ब्रांड या बैंक बैलेंस में नहीं होती। अमीरी सोच में होती है। मैंने गरीबी देखी है। इसीलिए मैं जमीन की कीमत जानती हूं।”

भाग 20: अनन्या का साहस

अनन्या का जवाब इतना सधा हुआ और प्रभावशाली था कि कुछ पलों के लिए हॉल में सन्नाटा छा गया। सिद्धार्थ सन्न रह गया। उसने अनन्या की तरफ ऐसे देखा जैसे वह कोई अजनबी हो। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस लड़की को वह अनपढ़ और गमवार समझ रहा था, उसने पूरे मीडिया को चुप करा दिया।

भाग 21: रणजीत खुराना का आगमन

तभी हॉल के मुख्य द्वार पर हलचल हुई। “अरे देखो कौन आया है, रणजीत खुराना!” किसी ने चिल्लाकर कहा। रणजीत खुराना, देश के सबसे बड़े निवेशक और एशिया के सबसे अमीर आदमियों में से एक, सिद्धार्थ का आदर्श था। सिद्धार्थ की खुशी का ठिकाना नहीं था। “मां, खुराना सर आए हैं। अगर उन्होंने आज हमारी कंपनी में दिलचस्पी दिखा दी, तो हम नंबर वन बन जाएंगे।”

भाग 22: अनन्या की पहचान का खुलासा

रणजीत खुराना अपनी रॉबीली चाल चलते हुए अंदर आए। उनके पीछे बॉडीगार्ड्स की फौज थी। सिद्धार्थ ने हाथ बढ़ाते हुए कहा, “मिस्टर खुराना, यह मेरा सौभाग्य है कि आप मेरी शादी के रिसेप्शन में आए।” लेकिन रणजीत खुराना ने सिद्धार्थ को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। उनकी नजरें सिद्धार्थ के पीछे खड़ी अनन्या पर टिकी हुई थीं।

भाग 23: अनन्या का साहस

रणजीत खुराना, जो मंत्रियों के सामने भी सर नहीं झुकाते थे, वह अनन्या के सामने विनीत भाव से खड़े थे। “मैम, आप यहां…” खुराना ने दबी आवाज में कहा। अनन्या ने उन्हें अपनी आंखों से एक तीखा इशारा किया, चुप रहने का इशारा। खुराना तुरंत समझ गए। उन्होंने ग्लोबल वर्मा ग्रुप की इकलौती वारिस को कैसे नहीं पहचाना?

भाग 24: सिद्धार्थ की गलती

लेकिन मालकिन का आदेश था, इसीलिए उन्होंने अपनी बात बदल दी। “माफ कीजिएगा,” खुराना ने बात संभालते हुए कहा। “मुझे लगा मैंने कहीं देखा है इन्हें। खैर, मिस्टर रॉय, शादी की बधाई।” सिद्धार्थ को कुछ अजीब लगा। खुराना ने उसे छोड़कर पहले उसकी मामूली बीवी से बात करने की कोशिश क्यों की?

भाग 25: सिद्धार्थ का अपमान

“धन्यवाद सर,” सिद्धार्थ ने अपनी खीसे निपोड़ते हुए कहा। “आइए, प्लीज डिनर लीजिए।” पार्टी देर रात तक चली। जब मेहमान जा चुके थे और घर की बत्तियां बुझाई जा रही थीं, तब असली तमाशा शुरू होने वाला था। निर्मला देवी ने अनन्या को रोका। “रुको,” निर्मला ने कटई से कहा। “मेहमानों के सामने तुमने जो अंग्रेजी झाकर होशियारी दिखाई है, उससे यह मत सोचना कि मैं इंप्रेस हो गई हूं। अब जाओ और जाकर किचन साफ करो। आज से सारे नौकरों की छुट्टी। इस घर का सारा काम तुम करोगी। यही तुम्हारी औकात है।”

भाग 26: अनन्या का प्रतिरोध

अनन्या ने एक बार फिर अपनी मुट्ठियां भींची। उसका सब्र अब जवाब दे रहा था। वह चुपचाप किचन की ओर बढ़ी। लेकिन मन ही मन उसने फैसला कर लिया था। यह रात आखिरी रात होगी जब वह यह अपमान सहन करेगी। उसे अभी अपने पिता के वकीलों से संपर्क करना था। खेल अब शुरू होने वाला था।

भाग 27: काव्या की मदद

जैसे ही वह किचन में घुसी, उसने देखा कि वहां पहले से कोई खड़ा था। अंधेरे में एक परछाई। “कौन है वहां?” अनन्या ने पूछा। परछाई उजाले में आई। वह सिद्धार्थ की छोटी बहन काव्या थी। काव्या की आंखों में डर था। “भाभी, प्लीज मेरी मदद कीजिए,” वह रो पड़ी। “भाई और मां मुझे एक ऐसे इंसान से शादी करने के लिए मजबूर कर रहे हैं जो मेरी उम्र से दो गुना बड़ा है। सिर्फ बिजनेस डील के लिए।”

भाग 28: नई जिम्मेदारी

अनन्या ने काव्या के आंसू पोंछे और उसे गले लगा लिया। “रो मत काव्या,” अनन्या ने दृढ़ता से कहा। “जब तक मैं यहां हूं, तुम्हारा सौदा कोई नहीं कर सकता। यह मेरा वादा है तुमसे।” अगली सुबह रॉय मेंशन में घमाघमी थी। आज वही दिन था जब काव्या का रिश्ता पक्का होने वाला था। लड़का सेठ जगमोहन उम्र में 50 बार था।

भाग 29: अनन्या का प्रतिरोध

अनन्या सुबह 4:00 बजे से जागी हुई थी। उसने पूरे घर का काम किया, फर्श साफ किया और अब डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा रही थी। निर्मला देवी सोफे पर बैठकर हुकुम चला रही थी। “अरे ओ महारानी, जल्दी चल। सेठ जी आने वाले हैं। अगर नाश्ते में कोई कमी रही तो तेरी खैर नहीं।”

भाग 30: जगमोहन का आगमन

सिद्धार्थ सीढ़ियों से उतरते हुए आया। उसने आते ही कॉफी का घूंट भरा और कप जोर से टेबल पर पटक दिया। “यह क्या है? मैंने कहा था ना चीनी कम होनी चाहिए।” अनन्या ने चुपचाप कप उठाया और दूसरा कप लाने के लिए मुड़ गई।

भाग 31: जगमोहन का आगमन

तभी बाहर एक महंगी गाड़ी रुकी। सेठ जगमोहन अपने मोटे पेट और गले में सोने की जंजीरें लटकाए अंदर आया। उसकी नजरें घर की सजावट से ज्यादा काव्या पर टिकी थीं। उसकी हवस भरी निगाहें देखकर किसी को भी घिन आ जाए। “आइए आइए जगमोहन जी,” निर्मला देवी ने अपनी बत्तीसी दिखाते हुए स्वागत किया। “हमारी काव्या तो आप ही का इंतजार कर रही थी।”

भाग 32: अनन्या का साहस

जगमोहन सोफे पर पसर गया और काव्या को ऊपर से नीचे तक घूरते हुए बोला, “वाह, फोटो से भी ज्यादा हसीन है।” सिद्धार्थ ने इसे नजरअंदाज कर दिया लेकिन अनन्या की आंखों में अंगारे दहक उठे। फिर भी उसने संयम रखा। सिद्धार्थ ने फाइल खोली। “जगमोहन सर, यह 50 करोड़ की इन्वेस्टमेंट के पेपर्स हैं। जैसा आपने कहा था, हम अपनी कंपनी के 20% शेयर्स आपके नाम कर रहे हैं।”

भाग 33: अनन्या का साहस

जगमोहन पेन निकालकर साइन करने ही वाला था कि कमरे में एक शांत मगर स्पष्ट आवाज गूंजी। “अगर मैं आपकी जगह होती तो इन पेपर्स पर साइन नहीं करती सिद्धार्थ जी।” सब चौंक गए। यह आवाज अनन्या की थी।

भाग 34: अनन्या की हिम्मत

“क्योंकि जिस जे डॉट एम बिल्डर्स के नाम पर यह डील हो रही है, वह कंपनी पिछले हफ्ते ही दिवालिया घोषित होने की कगार पर है।” सिद्धार्थ हक्का-बक्का रह गया। “क्या यह सच है?” जगमोहन हदबद्धा गया। “यह सब झूठ है। तुम एक नौकरानी की बात मानोगे?”

भाग 35: सिद्धार्थ का अहंकार

सिद्धार्थ ने इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की लेकिन अनन्या ने सिद्धार्थ के हाथ से माइक को बहुत ही नजाकत से अपनी ओर कर लिया। “डर उन्हें लगता है जिन्हें अपनी पहचान खोने का खौफ हो। और रही बात हाई सोसाइटी की, तो अमीरी कपड़ों के ब्रांड या बैंक बैलेंस में नहीं होती। अमीरी सोच में होती है। मैंने गरीबी देखी है। इसीलिए मैं जमीन की कीमत जानती हूं।”

भाग 36: अनन्या का साहस

अनन्या का जवाब इतना सधा हुआ और प्रभावशाली था कि कुछ पलों के लिए हॉल में सन्नाटा छा गया। सिद्धार्थ सन्न रह गया। उसने अनन्या की तरफ ऐसे देखा जैसे वह कोई अजनबी हो। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस लड़की को वह अनपढ़ और गमवार समझ रहा था, उसने पूरे मीडिया को चुप करा दिया।

भाग 37: रणजीत खुराना का आगमन

तभी हॉल के मुख्य द्वार पर हलचल हुई। “अरे देखो कौन आया है, रणजीत खुराना!” किसी ने चिल्लाकर कहा। रणजीत खुराना, देश के सबसे बड़े निवेशक और एशिया के सबसे अमीर आदमियों में से एक, सिद्धार्थ का आदर्श था। सिद्धार्थ की खुशी का ठिकाना नहीं था। “मां, खुराना सर आए हैं। अगर उन्होंने आज हमारी कंपनी में दिलचस्पी दिखा दी, तो हम नंबर वन बन जाएंगे।”

भाग 38: अनन्या की पहचान का खुलासा

रणजीत खुराना अपनी रॉबीली चाल चलते हुए अंदर आए। उनके पीछे बॉडीगार्ड्स की फौज थी। सिद्धार्थ ने हाथ बढ़ाते हुए कहा, “मिस्टर खुराना, यह मेरा सौभाग्य है कि आप मेरी शादी के रिसेप्शन में आए।” लेकिन रणजीत खुराना ने सिद्धार्थ को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। उनकी नजरें सिद्धार्थ के पीछे खड़ी अनन्या पर टिकी हुई थीं।

भाग 39: अनन्या का साहस

रणजीत खुराना, जो मंत्रियों के सामने भी सर नहीं झुकाते थे, वह अनन्या के सामने विनीत भाव से खड़े थे। “मैम, आप यहां…” खुराना ने दबी आवाज में कहा। अनन्या ने उन्हें अपनी आंखों से एक तीखा इशारा किया, चुप रहने का इशारा। खुराना तुरंत समझ गए। उन्होंने ग्लोबल वर्मा ग्रुप की इकलौती वारिस को कैसे नहीं पहचाना?

भाग 40: सिद्धार्थ की गलती

लेकिन मालकिन का आदेश था, इसीलिए उन्होंने अपनी बात बदल दी। “माफ कीजिएगा,” खुराना ने बात संभालते हुए कहा। “मुझे लगा मैंने कहीं देखा है इन्हें। खैर, मिस्टर रॉय, शादी की बधाई।” सिद्धार्थ को कुछ अजीब लगा। खुराना ने उसे छोड़कर पहले उसकी मामूली बीवी से बात करने की कोशिश क्यों की?

भाग 41: सिद्धार्थ का अपमान

“धन्यवाद सर,” सिद्धार्थ ने अपनी खीसे निपोड़ते हुए कहा। “आइए, प्लीज डिनर लीजिए।” पार्टी देर रात तक चली। जब मेहमान जा चुके थे और घर की बत्तियां बुझाई जा रही थीं, तब असली तमाशा शुरू होने वाला था। निर्मला देवी ने अनन्या को रोका। “रुको,” निर्मला ने कटई से कहा। “मेहमानों के सामने तुमने जो अंग्रेजी झाकर होशियारी दिखाई है, उससे यह मत सोचना कि मैं इंप्रेस हो गई हूं। अब जाओ और जाकर किचन साफ करो। आज से सारे नौकरों की छुट्टी। इस घर का सारा काम तुम करोगी। यही तुम्हारी औकात है।”

भाग 42: अनन्या का प्रतिरोध

अनन्या ने एक बार फिर अपनी मुट्ठियां भींची। उसका सब्र अब जवाब दे रहा था। वह चुपचाप किचन की ओर बढ़ी। लेकिन मन ही मन उसने फैसला कर लिया था। यह रात आखिरी रात होगी जब वह यह अपमान सहन करेगी। उसे अभी अपने पिता के वकीलों से संपर्क करना था। खेल अब शुरू होने वाला था।

भाग 43: काव्या की मदद

जैसे ही वह किचन में घुसी, उसने देखा कि वहां पहले से कोई खड़ा था। अंधेरे में एक परछाई। “कौन है वहां?” अनन्या ने पूछा। परछाई उजाले में आई। वह सिद्धार्थ की छोटी बहन काव्या थी। काव्या की आंखों में डर था। “भाभी, प्लीज मेरी मदद कीजिए,” वह रो पड़ी। “भाई और मां मुझे एक ऐसे इंसान से शादी करने के लिए मजबूर कर रहे हैं जो मेरी उम्र से दो गुना बड़ा है। सिर्फ बिजनेस डील के लिए।”

भाग 44: नई जिम्मेदारी

अनन्या ने काव्या के आंसू पोंछे और उसे गले लगा लिया। “रो मत काव्या,” अनन्या ने दृढ़ता से कहा। “जब तक मैं यहां हूं, तुम्हारा सौदा कोई नहीं कर सकता। यह मेरा वादा है तुमसे।” अगली सुबह रॉय मेंशन में घमाघमी थी। आज वही दिन था जब काव्या का रिश्ता पक्का होने वाला था। लड़का सेठ जगमोहन उम्र में 50 बार था।

भाग 45: अनन्या का प्रतिरोध

अनन्या सुबह 4:00 बजे से जागी हुई थी। उसने पूरे घर का काम किया, फर्श साफ किया और अब डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा रही थी। निर्मला देवी सोफे पर बैठकर हुकुम चला रही थी। “अरे ओ महारानी, जल्दी चल। सेठ जी आने वाले हैं। अगर नाश्ते में कोई कमी रही तो तेरी खैर नहीं।”

भाग 46: जगमोहन का आगमन

सिद्धार्थ सीढ़ियों से उतरते हुए आया। उसने आते ही कॉफी का घूंट भरा और कप जोर से टेबल पर पटक दिया। “यह क्या है? मैंने कहा था ना चीनी कम होनी चाहिए।” अनन्या ने चुपचाप कप उठाया और दूसरा कप लाने के लिए मुड़ गई।

भाग 47: जगमोहन का आगमन

तभी बाहर एक महंगी गाड़ी रुकी। सेठ जगमोहन अपने मोटे पेट और गले में सोने की जंजीरें लटकाए अंदर आया। उसकी नजरें घर की सजावट से ज्यादा काव्या पर टिकी थीं। उसकी हवस भरी निगाहें देखकर किसी को भी घिन आ जाए। “आइए आइए जगमोहन जी,” निर्मला देवी ने अपनी बत्तीसी दिखाते हुए स्वागत किया। “हमारी काव्या तो आप ही का इंतजार कर रही थी।”

भाग 48: अनन्या का साहस

जगमोहन सोफे पर पसर गया और काव्या को ऊपर से नीचे तक घूरते हुए बोला, “वाह, फोटो से भी ज्यादा हसीन है।” सिद्धार्थ ने इसे नजरअंदाज कर दिया लेकिन अनन्या की आंखों में अंगारे दहक उठे। फिर भी उसने संयम रखा। सिद्धार्थ ने फाइल खोली। “जगमोहन सर, यह 50 करोड़ की इन्वेस्टमेंट के पेपर्स हैं। जैसा आपने कहा था, हम अपनी कंपनी के 20% शेयर्स आपके नाम कर रहे हैं।”

भाग 49: अनन्या का साहस

जगमोहन पेन निकालकर साइन करने ही वाला था कि कमरे में एक शांत मगर स्पष्ट आवाज गूंजी। “अगर मैं आपकी जगह होती तो इन पेपर्स पर साइन नहीं करती सिद्धार्थ जी।” सब चौंक गए। यह आवाज अनन्या की थी।

भाग 50: अनन्या की हिम्मत

“क्योंकि जिस जे डॉट एम बिल्डर्स के नाम पर यह डील हो रही है, वह कंपनी पिछले हफ्ते ही दिवालिया घोषित होने की कगार पर है।” सिद्धार्थ हक्का-बक्का रह गया। “क्या यह सच है?” जगमोहन हदबद्धा गया। “यह सब झूठ है। तुम एक नौकरानी की बात मानोगे?”

भाग 51: सिद्धार्थ का अहंकार

सिद्धार्थ ने इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की लेकिन अनन्या ने सिद्धार्थ के हाथ से माइक को बहुत ही नजाकत से अपनी ओर कर लिया। “डर उन्हें लगता है जिन्हें अपनी पहचान खोने का खौफ हो। और रही बात हाई सोसाइटी की, तो अमीरी कपड़ों के ब्रांड या बैंक बैलेंस में नहीं होती। अमीरी सोच में होती है। मैंने गरीबी देखी है। इसीलिए मैं जमीन की कीमत जानती हूं।”

भाग 52: अनन्या का साहस

अनन्या का जवाब इतना सधा हुआ और प्रभावशाली था कि कुछ पलों के लिए हॉल में सन्नाटा छा गया। सिद्धार्थ सन्न रह गया। उसने अनन्या की तरफ ऐसे देखा जैसे वह कोई अजनबी हो। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस लड़की को वह अनपढ़ और गमवार समझ रहा था, उसने पूरे मीडिया को चुप करा दिया।

भाग 53: रणजीत खुराना का आगमन

तभी हॉल के मुख्य द्वार पर हलचल हुई। “अरे देखो कौन आया है, रणजीत खुराना!” किसी ने चिल्लाकर कहा। रणजीत खुराना, देश के सबसे बड़े निवेशक और एशिया के सबसे अमीर आदमियों में से एक, सिद्धार्थ का आदर्श था। सिद्धार्थ की खुशी का ठिकाना नहीं था। “मां, खुराना सर आए हैं। अगर उन्होंने आज हमारी कंपनी में दिलचस्पी दिखा दी, तो हम नंबर वन बन जाएंगे।”

भाग 54: अनन्या की पहचान का खुलासा

रणजीत खुराना अपनी रॉबीली चाल चलते हुए अंदर आए। उनके पीछे बॉडीगार्ड्स की फौज थी। सिद्धार्थ ने हाथ बढ़ाते हुए कहा, “मिस्टर खुराना, यह मेरा सौभाग्य है कि आप मेरी शादी के रिसेप्शन में आए।” लेकिन रणजीत खुराना ने सिद्धार्थ को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। उनकी नजरें सिद्धार्थ के पीछे खड़ी अनन्या पर टिकी हुई थीं।