राजेश पटना का एक साधारण लड़का था।
मध्यमवर्गीय परिवार, सीमित साधन, लेकिन बड़े संस्कार।

पिता स्कूल में शिक्षक थे, मां गृहिणी। घर में अमीरी नहीं थी, मगर ईमानदारी और मेहनत की सीख भरपूर थी। राजेश ने बचपन से यही समझा था कि मेहनत ही असली पूंजी है।

उसने ग्रेजुएशन किया, नौकरी ढूंढी, ठोकरें खाईं। सरकारी नौकरी का सपना था, पर किस्मत ने साथ नहीं दिया। वह छोटे-मोटे काम करके घर चलाने लगा।

इसी बीच उसकी शादी हुई — बिना दहेज, सादगी से।
लड़की का नाम था सीमा

सपनों का फर्क

सीमा पढ़ी-लिखी, स्मार्ट और महत्वाकांक्षी थी।
उसे बड़ी जिंदगी चाहिए थी — कार, शॉपिंग, अच्छा घर, आराम।

शुरू में उसे राजेश की सादगी और ईमानदारी अच्छी लगी। शादी के शुरुआती महीने प्यार में बीते। लेकिन धीरे-धीरे असल जिंदगी सामने आने लगी।

किराए का छोटा घर, सीमित खर्च, साधारण जीवन।

सीमा को यह सब बोझ लगने लगा।

वह अक्सर कहती,
“दूसरों को देखो राजेश… उनकी बीवियां कैसे रहती हैं। और एक मैं हूं — हर चीज गिनकर खर्च करनी पड़ती है।”

राजेश मुस्कुरा देता,
“बस थोड़ा सब्र करो सीमा… एक दिन सब बदल जाएगा।”

लेकिन सीमा को इंतज़ार नहीं चाहिए था — उसे नतीजे चाहिए थे।

टूटता रिश्ता

झगड़े बढ़ने लगे।
बातें कड़वी होने लगीं।

एक दिन सीमा ने साफ कह दिया,
“मैं यह जिंदगी नहीं जी सकती। तुमसे शादी करके गलती की।”

यह शब्द राजेश के दिल में तीर की तरह लगे।
वह उससे बहुत प्यार करता था, मगर मजबूर था।

आखिरकार तलाक हो गया।

अदालत की चार दीवारों में एक रिश्ता खत्म हो गया।

उस दिन राजेश रोया जरूर, लेकिन मन ही मन कसम खाई —
अब हालात बदलकर दिखाऊंगा।

नया सफर

तलाक ने उसे तोड़ा नहीं, जगा दिया।

उसने छोटे काम शुरू किए —
सप्लाई, ठेकेदारी, शेयर मार्केट, मजदूरों का इंतजाम।

कई बार धोखा मिला।
कई बार नुकसान हुआ।

लेकिन वह नहीं रुका।

रातों को बिजनेस की किताबें पढ़ता, इंटरनेट पर सीखता, सफल लोगों की कहानियां सुनता।

उसे समझ आ गया —
मेहनत के साथ सही दिशा जरूरी है।

पहला बड़ा कदम

कुछ साल बाद उसने फर्नीचर का छोटा काम शुरू किया।
एक पुरानी वर्कशॉप किराए पर ली।

शुरुआत मुश्किल थी, मगर उसकी ईमानदारी ने बाजार में जगह बना ली।

ग्राहक कहते —
“यह लड़का झूठ नहीं बोलता।”

धीरे-धीरे काम बढ़ा।
फर्नीचर से इंटीरियर डिजाइनिंग तक पहुंच गया।

बैंक से लोन लिया, मशीनें लगाईं, टीम बढ़ाई।

कुछ सालों में वही राजेश सफल उद्यमी बन गया।

कार, घर, पहचान — सब मिल गया।

लेकिन उसके अंदर का दर्द ही उसकी आग बना रहा।

दूसरी ओर सीमा

सीमा ने बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाया।
मेहनत से बैंक मैनेजर बनी।

पैसा, पद, सम्मान — सब था।

बस एक खालीपन था, जिसका एहसास उसे देर से हुआ।

कभी-कभी वह सोचती —
क्या मैंने जल्दबाजी की थी?

फिर खुद को समझा लेती।

किस्मत का खेल

एक दिन राजेश को बिजनेस विस्तार के लिए बैंक लोन चाहिए था।

संयोग देखिए —
वह बैंक वही था जहां मैनेजर थी सीमा।

राजेश को पता नहीं था।

आमना-सामना

राजेश फॉर्मल कपड़ों में बैंक पहुंचा।
सीधे मैनेजर के केबिन में गया।

“मे आई कम इन?”

सीमा ने बिना देखे कहा, “कम इन।”

जैसे ही दोनों की नजरें मिलीं —
दोनों कुछ पल के लिए चुप रह गए।

सीमा संभली और ठंडे स्वर में बोली,
“तुम यहां क्यों आए हो?”

“लोन के लिए,” राजेश ने शांत जवाब दिया।

सीमा हंसी,
“तुम और लोन? तुम अभी भी सपने देख रहे हो?”

फिर उसने अपमानजनक बातें कहीं, यहां तक कि गार्ड बुलाकर उसे बाहर निकलवा दिया।

राजेश चुप रहा।

उसकी टीम हैरान थी।
उन्होंने पूछा —
“सर, आपने बताया क्यों नहीं कि आप कौन हैं?”

राजेश बोला,
“वक्त को जवाब देने दो।”

असली खुलासा

उसी हफ्ते पटना में बड़ा बिजनेस सम्मेलन हुआ।

मुख्य अतिथि थे —
राजेश कुमार, सीईओ — कुमार ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज।

जब राजेश मंच पर पहुंचे, हॉल तालियों से गूंज उठा।

उन्होंने कहा,
“मैं कोई खास नहीं। मैं वही हूं जिसे कभी गरीब कहकर ठुकराया गया था।”

सीमा भी वहीं मौजूद थी।

जब उसे सच पता चला, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

उसे बैंक वाला दिन याद आ गया।

उसकी आंखों से आंसू बह निकले।

आखिरी मुलाकात

कुछ दिन बाद सीमा हिम्मत करके राजेश के ऑफिस पहुंची।

वह रो पड़ी।

राजेश शांत था।

उसने कहा,
“मैंने तुम्हें उसी दिन माफ कर दिया था जिस दिन तुमने छोड़ा था। अगर तुम नहीं जातीं तो शायद मैं इतना बड़ा बनने की ठानता ही नहीं।”

सीमा ने पूछा,
“क्या तुम्हारे दिल में अब भी मेरे लिए जगह है?”

राजेश ने धीरे से कहा,
“प्यार खत्म नहीं होता सीमा… बस उसके मायने बदल जाते हैं। तुम्हारे लिए अब मेरे दिल में दुआ है, मोहब्बत नहीं।”

यह सुनकर सीमा टूट गई।

वह चली गई — हल्की भी, भारी भी।

अंत

राजेश आगे बढ़ गया।
कंपनी बढ़ी, समाज सेवा बढ़ी, सम्मान बढ़ा।

सीमा के पास सब था —
बस सुकून नहीं।

दोनों ने अपनी राहें चुन लीं।

दिल में पहली मोहब्बत की हल्की सी लौ रह गई —
जो जलती नहीं, बुझती भी नहीं।

सीख

पैसा मोहब्बत का विकल्प नहीं।
साथ और भरोसा ही असली दौलत है।

कभी-कभी एक गलत फैसला
पूरी जिंदगी का पछतावा बन जाता है।

और कभी-कभी
ठुकराया गया इंसान ही
अपनी किस्मत लिख देता है।