धर्मेंद्र की छुपी हुई डायरी ने खोला सारा राज || Sunny Deol aur Hema Malini Ne salon bad Kiya faisla

धर्मेंद्र देओल की डायरी का राज: एक परिवार की अनकही कहानी

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र देओल के निधन के बाद देओल परिवार की जिंदगी में एक नया मोड़ आया। एक पुरानी भूरे रंग की डायरी ने वह राज खोल दिया, जिसे धर्मेंद्र जी ने अपनी पूरी जिंदगी छुपाए रखा। यह डायरी न केवल उनके जीवन के अनकहे पहलुओं को उजागर करती है, बल्कि उनके परिवार के टूटे हुए रिश्तों को जोड़ने की कोशिश भी करती है।

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डायरी में छुपा था 50 साल पुराना राज

सनी देओल को अपने पिता की यह डायरी एक पुराने लकड़ी के ट्रंक में मिली। जब उन्होंने इसे खोला, तो उसमें लिखी पहली पंक्तियां पढ़कर उनकी आंखें भर आईं। धर्मेंद्र ने लिखा था:
“मैंने अपनी जिंदगी में बहुत प्यार दिया, बहुत प्यार पाया, लेकिन कुछ प्यार ऐसे थे जिन्हें दुनिया समझ नहीं पाई।”

डायरी में धर्मेंद्र ने अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर के प्रति अपने प्यार और कृतज्ञता को व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि प्रकाश ने उन्हें संभाला, उनके सपनों को अपना बनाया, और उनके बच्चों को अपना सब कुछ दिया।

हेमा मालिनी के साथ रिश्ते का दर्द

डायरी में धर्मेंद्र ने हेमा मालिनी के साथ अपने रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने हेमा से शादी करने का फैसला खुद लिया, लेकिन वह जानते थे कि इस फैसले ने उनके दोनों परिवारों को दर्द दिया। उन्होंने लिखा:
“हेमा बुरी नहीं थी। वह किसी का घर तोड़ना नहीं चाहती थी। मैंने ही उसे मजबूर किया। लेकिन बदले में मैंने उसे अकेलापन दिया।”

आखिरी ख्वाहिश: परिवार का मेल

डायरी के आखिरी पन्नों में धर्मेंद्र ने अपनी सबसे बड़ी ख्वाहिश लिखी थी। उन्होंने लिखा कि उनके जाने के बाद दोनों परिवार एक हो जाएं। सनी, बॉबी, ईशा और अहाना को एक-दूसरे को अपनाना चाहिए। यह उनकी आत्मा की शांति के लिए सबसे जरूरी था।

सनी देओल ने उठाया पहला कदम

डायरी पढ़ने के बाद सनी देओल ने अपनी सारी गलतफहमियों और नफरत को पीछे छोड़ते हुए हेमा मालिनी को फोन किया। उन्होंने कहा:
“पापा की डायरी मिली है। मैंने पढ़ी है और पहली बार समझ आया कि उन्होंने कितना दर्द छुपाया। क्या आप घर आ सकती हैं?”

अगले दिन हेमा मालिनी, ईशा और अहाना देओल देओल परिवार के घर पहुंचीं। यह पल पूरे परिवार के लिए भावुक था। सनी ने हेमा मालिनी से कहा:
“पापा कहते थे कि उनकी गलती थी, हमारी नहीं। आज मैं चाहता हूं कि उनके जाने के बाद हम सब एक हो जाएं।”

धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा पूरी हुई

उस दिन देओल परिवार ने एक नई शुरुआत की। धर्मेंद्र की मुस्कुराती तस्वीर जैसे कह रही थी कि अब उनकी आत्मा सच में शांत हो गई।

क्या यह कहानी सच्ची हो सकती है?

धर्मेंद्र देओल का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा था। उन्होंने अपने परिवार को जोड़ने की कोशिश की, लेकिन हालात ने उन्हें हमेशा बांटकर रखा। उनकी डायरी की यह कहानी भले ही काल्पनिक लगे, लेकिन यह हमें सिखाती है कि सच्चाई, प्यार और परिवार के महत्व को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आपकी राय?

क्या आपको लगता है कि धर्मेंद्र देओल की आखिरी ख्वाहिश सचमुच पूरी हो सकती है? क्या परिवार के बीच के रिश्ते वाकई सुधर सकते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

नोट: इस कहानी को सोशल मीडिया पर प्राप्त जानकारी के आधार पर लिखा गया है। इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकती।