बेटी की एक गलती की वजह से महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/गांव के लोग दंग रह गए/

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बदलते रिश्ते और एक माँ की जद्दोजहद

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में, जहाँ हर घर की अपनी कहानी होती है, वहीं एक घर था जिसमें रहने वाली थी शारदा देवी। शारदा देवी एक विधवा महिला थी, जिनके पति की मृत्यु पाँच साल पहले एक सड़क दुर्घटना में हो गई थी। पति के जाने के बाद शारदा पर पूरे घर की जिम्मेदारी आ गई थी। उनके परिवार में एक बेटी थी, जिसका नाम था पायल। पायल इस समय बारहवीं कक्षा में पढ़ रही थी और पढ़ाई में बहुत तेज थी।

शारदा देवी ने अपने पति के जाने के बाद कभी हार नहीं मानी। उन्होंने गाँव के स्कूल में सफाई का काम शुरू किया और साथ ही अपने घर के पास थोड़ी सी जमीन पर सब्जियाँ उगाने लगीं। इससे उन्हें थोड़ा-बहुत पैसा मिल जाता था और घर का खर्च किसी तरह चल जाता था। पायल भी अपनी माँ की मदद करती थी, लेकिन उसका मन पढ़ाई में ही ज्यादा लगता था। वह चाहती थी कि उसकी माँ को कभी किसी चीज़ की कमी न हो।

एक दिन गाँव में एक बड़ी घटना घट गई। गाँव के प्रधान ने घोषणा की कि अगले महीने गाँव में एक बड़ा मेला लगेगा, जिसमें हर परिवार को अपनी कला या उत्पाद दिखाने का मौका मिलेगा। शारदा देवी ने सोचा कि वह अपने खेत की ताज़ी सब्जियाँ बेचेंगी। पायल ने भी अपनी माँ का साथ देने का फैसला किया।

मेला शुरू हुआ तो शारदा देवी की सब्जियाँ बहुत पसंद की गईं। गाँव के लोग उनकी मेहनत की सराहना करने लगे। लेकिन इसी दौरान गाँव में कुछ लोग ऐसे भी थे, जो शारदा देवी की स्थिति का फायदा उठाने की सोच रहे थे। गाँव का एक दुकानदार, रमेश, जो पहले से ही शारदा से दूध खरीदता था, उसने शारदा को पैसे देने के बहाने उसके करीब आने की कोशिश की। शारदा ने उसकी बातों को नजरअंदाज किया, लेकिन रमेश बार-बार उसे परेशान करने लगा।

एक दिन जब पायल स्कूल गई थी, रमेश शारदा के घर आ गया। उसने शारदा को धमकी दी कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी तो वह गाँव में अफवाह फैला देगा कि शारदा गलत रास्ते पर चल रही है। शारदा डर गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने रमेश को साफ शब्दों में कह दिया कि अगर उसने ऐसी कोई हरकत की तो वह पुलिस में शिकायत करेगी।

 

रमेश ने तो कुछ नहीं किया, लेकिन गाँव में अफवाहें फैलनी शुरू हो गईं। लोग शारदा के बारे में उल्टा-सीधा बोलने लगे। पायल को भी स्कूल में उसकी सहेलियाँ चिढ़ाने लगीं। पायल को बहुत बुरा लगा, लेकिन उसने अपनी माँ से कुछ नहीं कहा। वह जानती थी कि उसकी माँ पहले ही बहुत परेशान है।

कुछ दिनों बाद गाँव में एक और घटना हुई। शारदा की वाशिंग मशीन खराब हो गई। पैसे की तंगी थी, लेकिन कपड़े धोना जरूरी था। शारदा ने पड़ोसी से एक मिस्त्री का नंबर लिया। मिस्त्री, जिसका नाम था सोहन, घर पर आया। उसने मशीन ठीक करने के लिए ज्यादा पैसे माँगे। शारदा ने कहा कि वह पैसे बाद में दे देगी, लेकिन सोहन ने भी पैसे की जगह कुछ और माँगने की कोशिश की। शारदा ने उसे डांटकर घर से निकाल दिया।

इन घटनाओं के बाद शारदा बहुत टूट गई थी। उसे लगने लगा था कि गरीब और अकेली महिलाओं के साथ समाज कितना गलत व्यवहार करता है। उसने पायल को सबकुछ बता दिया। पायल ने अपनी माँ को गले लगाया और कहा कि वह हमेशा उसके साथ है।

एक दिन गाँव में एक सामाजिक कार्यकर्ता आई, जिसका नाम था प्रीति। प्रीति गाँव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए ट्रेनिंग देती थी। उसने शारदा देवी से बात की और उनके अनुभव सुने। प्रीति ने शारदा को हौसला दिया और कहा कि वह महिलाओं के लिए एक समूह बनाए, जिसमें सब मिलकर छोटे-छोटे काम करें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएँ।

शारदा देवी ने गाँव की महिलाओं को इकट्ठा किया और एक समूह बनाया। अब वे सब मिलकर गाँव में अपनी सब्जियाँ, दूध, और हस्तशिल्प बेचने लगीं। धीरे-धीरे गाँव के लोग भी उनका सम्मान करने लगे। अफवाहें बंद हो गईं और रमेश जैसे लोगों की हिम्मत टूट गई।

पायल ने भी अपनी पढ़ाई पूरी की और शहर जाकर कॉलेज में दाखिला लिया। उसने अपनी माँ से वादा किया कि वह एक दिन बड़ा अफसर बनेगी और अपनी माँ का नाम रोशन करेगी। शारदा देवी ने अपनी बेटी को आशीर्वाद दिया और कहा कि वह हमेशा उसके साथ है।

समय बीतता गया। शारदा देवी का समूह अब गाँव के बाहर भी प्रसिद्ध हो गया था। वे अब दूसरे गाँवों में भी अपने उत्पाद बेचने लगीं। प्रीति ने उनकी मदद से एक छोटी सी फैक्ट्री भी लगवा दी। अब शारदा देवी सिर्फ एक माँ ही नहीं, बल्कि गाँव की प्रेरणा बन गई थी।

पायल की पढ़ाई पूरी हुई और वह एक सरकारी अफसर बन गई। उसने गाँव में एक स्कूल खुलवाया, जिसमें गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती थी। शारदा देवी को अब गाँव के लोग बहुत सम्मान देते थे। उनकी कहानी हर जगह मिसाल बन गई थी।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मुश्किलें चाहे जितनी भी हों, अगर हिम्मत और इरादा मजबूत हो तो कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है। समाज की सोच बदलना आसान नहीं होता, लेकिन अगर कोई एक कदम बढ़ाता है तो बाकी लोग भी उसका साथ देने लगते हैं।

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