घर के नौकर ने कर दिया कारनामा/मां और बेटी के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/

लालच और धोखे की पराकाष्ठा: दरोगा दुष्यंत और उसका बिखरता परिवार

अध्याय 1: दरोगा दुष्यंत और उसका लालच

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले का तुलसीपुर गांव। इस गांव में दुष्यंत सिंह नाम का एक व्यक्ति रहता था, जो नजदीकी पुलिस स्टेशन में हेड कांस्टेबल (दरोगा) के पद पर तैनात था। दुष्यंत एक अत्यंत लालची स्वभाव का व्यक्ति था। उसके लिए कानून के रक्षक होने का मतलब केवल अपनी जेबें भरना था। बिना रिश्वत लिए वह किसी की फरियाद तक नहीं सुनता था।

गलत तरीके से धन अर्जित कर उसने अच्छा-खासा बैंक बैलेंस बना लिया था और छह एकड़ जमीन भी खरीदी थी। लेकिन उसका यह लालच उसे अपने परिवार से दूर करता जा रहा था। उसे लगता था कि जीवन का एकमात्र लक्ष्य पैसा कमाना है, चाहे रास्ता कैसा भी हो।

अध्याय 2: माला और पिंकी – घर की उदासीनता

दुष्यंत के परिवार में उसकी पत्नी माला देवी और उसकी इकलौती बेटी पिंकी देवी थी। माला देवी एक सुंदर महिला थी, लेकिन अपने पति के लालची स्वभाव और उपेक्षा के कारण वह उससे भावनात्मक रूप से कट चुकी थी। वह बाहर के लोगों में अधिक दिलचस्पी लेने लगी थी।

पिंकी ने एक साल पहले 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी, लेकिन उसका मन आगे की पढ़ाई में नहीं लगा। वह घर पर अपनी मां के साथ कामकाज में हाथ बंटाती थी। दुष्यंत को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसके घर की शांति के पीछे कोई बड़ा तूफान आकार ले रहा है।

अध्याय 3: एक नई जरूरत और नौकर का आगमन

2 दिसंबर 2025 की सुबह, दुष्यंत ड्यूटी पर जाने की तैयारी कर रहा था। माला और पिंकी ने उसे घर की समस्याओं की एक लंबी सूची थमा दी—बिजली का बिल, खराब वाशिंग मशीन और टूटी हुई प्रेस। माला ने शाम को एक सोने की अंगूठी लाने की फरमाइश भी कर दी।

परेशान होकर दुष्यंत ने कहा, “तुम दोनों ने तो मुझे नौकर बनाकर रख दिया है। घर के कामों के लिए कोई नौकर रख लो ताकि मुझे चैन मिले।”

माला देवी इसी मौके के इंतजार में थी। उसने तुरंत सब्जी बेचने वाले मनोज का नाम सुझाया। दुष्यंत ने बिना सोचे-समझे सहमति दे दी। माला उसी दिन मनोज के घर गई। मनोज एक साधारण लड़का था, लेकिन माला ने उसे अपनी शर्तों पर काम करने के लिए मना लिया। उसने मनोज को ₹8000 की सरकारी तनख्वाह के अलावा ₹5000 अतिरिक्त देने का वादा किया, लेकिन एक गुप्त शर्त के साथ—उसे माला की हर जरूरत का ख्याल रखना होगा। मनोज ने लालच और आकर्षण में आकर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

अध्याय 4: मर्यादाओं का उल्लंघन

10 दिसंबर 2025 को जब पिंकी एक सहेली के जन्मदिन की पार्टी में गई और दुष्यंत ड्यूटी के कारण रात को घर नहीं आया, तब माला ने मनोज को घर बुलाया। उस रात घर की चारदीवारी के भीतर नैतिक मूल्यों की बलि चढ़ गई। माला और मनोज के बीच एक अनैतिक रिश्ता शुरू हो गया।

माला को लगा कि उसने अपनी खुशियों का रास्ता खोज लिया है। वह अक्सर दुष्यंत की अनुपस्थिति में मनोज को घर बुलाती और उसे पैसे देकर विदा करती।

अध्याय 5: पिंकी और मनोज – एक नया मोड़

लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब पिंकी ने भी मनोज पर नजरें टिका दीं। 15 दिसंबर 2025 को जब मनोज काम पर नहीं आया, तो पिंकी खुद उसे लेने उसके घर पहुंच गई। पिंकी की सुंदरता देखकर मनोज की नियत डोल गई। पिंकी ने मनोज को सीधे शहर के एक होटल में चलने का प्रस्ताव दिया।

मनोज यह जानकर हैरान रह गया कि पिंकी अपनी मां से भी दो कदम आगे निकली। दोनों शहर के ‘नंदिनी होटल’ पहुंचे और वहां उन्होंने गलत रास्ते का चुनाव किया। अब मनोज एक ही घर की दो महिलाओं के साथ अनैतिक संबंधों में बंध चुका था।

अध्याय 6: रहस्य का खुलना और गांव की चर्चा

समय बीतता गया और मां-बेटी के इस रहस्यमयी जीवन की भनक मनोज की पड़ोसन राधा देवी को लग गई। राधा ने देखा कि कैसे माला और पिंकी अलग-अलग समय पर मनोज के घर आती-जाती हैं। धीरे-धीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई। गांव के लोग पीठ पीछे दरोगा के परिवार की बातें करने लगे, लेकिन दुष्यंत अब भी अपने रिश्वत के पैसों की गिनती में व्यस्त था।

अध्याय 7: स्वास्थ्य परीक्षण और कड़वा सच

24 जनवरी 2026 की सुबह पिंकी की तबीयत अचानक बिगड़ी। माला उसे लेकर अस्पताल पहुंची। वहां महिला डॉक्टर ने चेकअप के बाद जो बताया, उसने माला के होश उड़ा दिए—पिंकी गर्भवती थी।

डर और संदेह के मारे माला ने अपना भी परीक्षण करवाया, और परिणाम वही था—माला भी गर्भवती थी। घर लौटते ही मां और बेटी के बीच भयंकर झगड़ा हुआ। दोनों एक-दूसरे पर दोषारोपण करने लगीं, यह जानते हुए भी कि दोनों ने एक ही गलती की थी।

अध्याय 8: अंत की शुरुआत – त्रासदी

उसी शाम जब दुष्यंत घर लौटा, उसका पारा सातवें आसमान पर था। उसे पुलिस स्टेशन और गांव के लोगों से अपनी पत्नी और बेटी के अनैतिक कृत्यों की पूरी जानकारी मिल चुकी थी। जैसे ही उसने घर में कदम रखा, उसने माला की पिटाई शुरू कर दी।

गुस्से और घबराहट में माला ने सब कुछ सच-सच बता दिया। फिर पिंकी ने भी अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। अपनी नाक कटते देख और समाज में बेइज्जती के डर से दुष्यंत अपना मानसिक संतुलन खो बैठा। उसने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर निकाली और अपनी पत्नी माला व बेटी पिंकी पर गोलियां चला दीं।

अध्याय 9: कानून का शिकंजा

गोलियों की आवाज सुनकर पड़ोसी राज किशोर और अन्य लोग वहां पहुंचे। खून से सनी लाशों को देखकर पुलिस को सूचना दी गई। कुछ ही देर में पुलिस की टीम पहुंची और अपने ही साथी दुष्यंत को गिरफ्तार कर लिया। दुष्यंत ने अपना गुनाह कबूल कर लिया, लेकिन उसकी आंखों में पछतावे से ज्यादा नफरत थी।

अब मामला अदालत में है और दुष्यंत जेल की सलाखों के पीछे अपने अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा है।

निष्कर्ष और संदेश

यह घटना हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है। जिस घर की बुनियाद गलत तरीके से कमाए गए धन (रिश्वत) पर टिकी होती है, वहां नैतिकता और संस्कार कभी नहीं ठहरते। दुष्यंत का लालच और उसके परिवार की अनैतिकता ने अंततः सब कुछ राख कर दिया।

सवाल: क्या दुष्यंत का कानून को हाथ में लेना सही था? या उसके परिवार की गलती ने उसे इस कदर मजबूर कर दिया था? अपने विचार जरूर साझा करें।