इश्क, इंतकाम और सात लाशें: रोहतक का वो ‘खूनी’ ऑनर किलिंग जिसने दहला दिया था पूरा देश

रोहतक, हरियाणा | विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

हरियाणा की धरती अपनी परंपराओं, खाप पंचायतों और कड़े सामाजिक अनुशासन के लिए जानी जाती है। लेकिन सितंबर 2009 की एक मनहूस सुबह रोहतक के एक शांत गांव में कुछ ऐसा हुआ, जिसने इन परंपराओं के नाम पर रची गई एक खौफनाक साजिश को बेनकाब कर दिया। एक सम्मानित शिक्षक का घर, जो कल तक खुशियों और बच्चों की किलकारियों से गूँज रहा था, रातों-रात एक श्मशान में तब्दील हो गया। सात जिंदगियां एक साथ खत्म कर दी गईं, और कातिल कोई बाहरी लुटेरा नहीं, बल्कि घर की ही अपनी ‘लाडली’ निकली।

एक सम्मानित शिक्षक का बिखरता आशियाना

इस रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान की शुरुआत होती है रोहतक के काबुलपुर गांव से। गांव के एक बेहद सम्मानित व्यक्ति थे तकदीर सिंह। वे एक रिटायर्ड स्कूल टीचर थे, जिन्होंने गांव की कई पीढ़ियों को शिक्षा दी थी। उनके परिवार में खुशहाली थी। उनका बेटा फॉरेस्ट विभाग में गार्ड था, बहू घर संभालती थी और पोते-पोतियां अपनी पढ़ाई में मशगूल थे।

14 सितंबर 2009 की रात तकदीर सिंह के घर में सब कुछ सामान्य लग रहा था। परिवार ने साथ बैठकर खाना खाया। तकदीर सिंह की तबीयत कुछ ढीली थी, इसलिए वे मुख्य घर के बजाय बाहर बने ‘आउट-हाउस’ में सोने चले गए। सोते समय परंपरा के अनुसार सबको दूध दिया गया। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि उस दूध में मौत का ‘नींद’ घुला हुआ है।

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15 सितंबर की वो खौफनाक सुबह

अगली सुबह जब तकदीर सिंह जागे, तो उन्हें घर के भीतर से कोई हलचल सुनाई नहीं दी। आमतौर पर सुबह-सुबह रसोई के बर्तनों की आवाज और बच्चों का शोर सुनाई देता था, लेकिन आज वहां सन्नाटा पसरा था। जैसे ही वे घर के भीतर दाखिल हुए, उनके होश उड़ गए।

घर का सामान अस्त-व्यस्त था और फर्श से लेकर बिस्तर तक सात लाशें पड़ी थीं। तकदीर सिंह की पत्नी, उनका बेटा, बहू और चार पोते-पोतियां—सब मारे जा चुके थे। उनके शरीर नीले पड़ चुके थे और गलों पर गला घोंटने के गहरे निशान थे। पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शुरुआती जांच में इसे लूटपाट का मामला माना गया।

सोनम: एकमात्र जीवित गवाह या मास्टरमाइंड?

पुलिस को जांच के दौरान परिवार की 18 वर्षीय पोती सोनम घर के भीतर बेहोश हालत में मिली। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। शुरुआत में सबको लगा कि सोनम भाग्यशाली थी जो बच गई, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने कड़ियाँ जोड़ीं, शक की सुई सोनम की ओर घूमने लगी।

पुलिस को लूटपाट की थ्योरी पर यकीन नहीं हो रहा था क्योंकि घर का कीमती सामान तो बिखरा था, लेकिन जबरन प्रवेश का कोई निशान नहीं था। तभी तकदीर सिंह ने पुलिस को एक इशारा दिया— “सबकी जांच करो, लेकिन सोनम पर नजर रखो।”

सीक्रेट सिम कार्ड और ‘भाईचारा’ परंपरा का टकराव

पुलिस ने जब सोनम का कमरा खंगाला, तो उन्हें कपड़ों के बीच छिपा हुआ एक ‘सीक्रेट’ सिम कार्ड मिला। यह सिम कार्ड किसी ‘राकेश’ के नाम पर था, लेकिन इसे इस्तेमाल करने वाला कोई और नहीं, बल्कि पड़ोस का युवक नवीन था।

सोनम और नवीन के बीच प्रेम संबंध थे, लेकिन उनके प्यार के रास्ते में हरियाणा की सदियों पुरानी ‘गोत्र’ या ‘भाईचारा’ परंपरा खड़ी थी। हरियाणा में एक ही सरनेम या एक ही गांव के युवक-युवती को भाई-बहन माना जाता है। सोनम के परिवार को जब इस रिश्ते का पता चला, तो उन्होंने सोनम का कॉलेज जाना बंद करवा दिया और उसे घर में कैद कर दिया। उन्हें डर था कि परिवार की इज्जत (Honor) मिट्टी में मिल जाएगी।

साजिश: आटे में नींद और रस्सी का फंदा

सोनम और नवीन को लगा कि उनका परिवार उन्हें कभी एक नहीं होने देगा और शायद उन्हें ‘ऑनकिलिंग’ का शिकार बना दे। इसी डर और नफरत में सोनम ने अपने ही परिवार को खत्म करने का फैसला किया। उसने नवीन को राजी किया और दो हफ्ते तक कत्ल की प्लानिंग की।

14 सितंबर की रात: सोनम ने घर के आटे और दूध में भारी मात्रा में नींद की गोलियां मिला दीं।

बेहोशी का आलम: खाना खाते ही पूरा परिवार गहरी नींद में चला गया।

कत्ल का तांडव: सोनम ने नवीन को फोन किया। नवीन रस्सी लेकर पहुंचा। एक-एक करके सात लोगों का गला घोंटा गया। सोनम ने खुद अपने माता-पिता के कत्ल में नवीन का साथ दिया। यहाँ तक कि छोटे बच्चों को भी नहीं बख्शा गया।

फॉरेंसिक सबूत: मोटरसाइकिल पर अंगूठे का निशान

पुलिस ने जब वैज्ञानिक तरीके से जांच की, तो सोनम की कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

    ग्राइंडर के निशान: जिस ग्राइंडर में सोनम ने गोलियां पीसी थीं, उसमें दवा के अंश मिले।

    रस्सी की बरामदगी: नवीन ने गला घोंटने वाली रस्सियां छत पर छिपाई थीं, जिन्हें पुलिस ने ढूंढ निकाला।

    सबसे बड़ा सबूत: घर के बाहर खड़ी एक मोटरसाइकिल के शीशे पर नवीन के अंगूठे का निशान (Fingerprint) मिला, जिसने साबित कर दिया कि वह उस रात मौके पर मौजूद था।

अंतिम फैसला: फांसी की सजा

दबाव में आकर सोनम और नवीन ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया। साल 2014 में रोहतक की अदालत ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (विरलतम से विरल) मानते हुए सोनम और नवीन दोनों को मौत की सजा (Death Penalty) सुनाई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जिस बेटी को माता-पिता ने बड़े लाड़ से पाला, उसी ने अपने स्वार्थ के लिए सात मासूम जिंदगियों को बेरहमी से मिटा दिया।

निष्कर्ष: ऑनर किलिंग और सामाजिक मानसिकता

यह घटना आज भी हरियाणा के इतिहास में एक काले धब्बे की तरह है। यह सवाल उठाती है कि क्या ‘सम्मान’ के नाम पर बच्चों पर इतना दबाव डालना सही है कि वे अपराधी बन जाएं? और क्या प्यार इतना अंधा हो सकता है कि वह अपनों के ही खून से हाथ रंग ले? तकदीर सिंह आज भी उस घर में अकेले रहते हैं, जहाँ कभी उनका पूरा परिवार बसता था, और वे आज भी न्याय की उस घड़ी का इंतजार कर रहे हैं जब उनके बेटे और पोतों के कातिलों को फंदे पर लटकाया जाएगा।