Rajpal Yadav Exclusive Interview: ‘तिहाड़’ के बाद राजपाल यादव का पहला इंटरव्यू, बताई हैसियत

राजपाल यादव का बेबाक इंटरव्यू: “मेरी हैसियत सेल्फी और दुआओं में है, कागजों में नहीं”

भारतीय सिनेमा के दिग्गज हास्य अभिनेता राजपाल यादव अपनी बेबाकी और सादगी के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने एक विशेष इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने न केवल अपने कठिन समय के बारे में बात की, बल्कि उन लोगों को भी करारा जवाब दिया जो उनकी संपत्ति और ‘हैसियत’ पर सवाल उठा रहे थे।

1. जड़ों से जुड़ाव: “मैंने अपना वोट और नोट नहीं बदला”

इंटरव्यू की शुरुआत में राजपाल ने अपनी मिट्टी के प्रति वफादारी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह आज भी उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के अपने छोटे से गांव कुंडरा से उसी तरह जुड़े हुए हैं जैसे संघर्ष के दिनों में थे। उन्होंने गर्व से कहा, “मैंने अपना पासपोर्ट नहीं बदला, मैंने अपना वोट नहीं बदला और न ही अपना नोट (जड़ें) बदला।”

2. असली ‘हैसियत’ क्या है?

जब पत्रकार ने उनकी संपत्ति और गांव की जमीन की कीमत (करीब 50 करोड़) पर सवाल उठाया, तो राजपाल ने अपनी ‘हैसियत’ की एक नई परिभाषा दी। उन्होंने इसे भौतिक संपदा के बजाय लोगों के प्यार से जोड़ा:

सेल्फी की ताकत: “हर एयरपोर्ट पर रोज 500 लोग मेरे साथ सेल्फी लेते हैं, यह मेरी हैसियत है।”
गाड़ियों का काफिला: “भारत के 700 जिलों में मेरे चाहने वाले हैं। अगर मैं किसी भी जिले में जाऊं, तो 10 गाड़ियां मुझे लेने आती हैं। वो मेरे नाम पर भले न हों, लेकिन वो मेरी ही गाड़ियां हैं।”
राजकीय मेहमान: “देश के 36 राज्यों में कहीं भी जाऊं, तो आईएएस-आईपीएस अधिकारी और स्टेट गेस्ट हाउस मेरे लिए खुले रहते हैं। मेरे पास कम से कम 108 ऐसे मकान हैं।”

3. तिहाड़ का अनुभव: “वहां राज्यपाल नहीं, कानून चलता है”

तिहाड़ जेल में बिताए समय के बारे में पूछे जाने पर राजपाल ने बहुत ही संजीदगी से जवाब दिया। उन्होंने तिहाड़ को ‘मदर जेल’ बताते हुए कहा कि वहां कोई सेलिब्रिटी स्टेटस काम नहीं आता।

कानून का सम्मान: “वहां राजपाल यादव नहीं चलता, वहां देश का कानून चलता है। मैंने उस सजा को ‘जय हिंद’ की तरह स्वीकार किया।”
चिंतन का समय: उन्होंने मजाकिया लहजे में खुद पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें ऑटोग्राफ देने की इतनी आदत थी कि उन्होंने बिना पढ़े कागजों पर साइन कर दिए, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। जेल उनके लिए एक ‘चिंतन’ की जगह थी।

4. “लोहे से भी मजबूत है राजपाल यादव”

अपनी मजबूती का दावा करते हुए राजपाल ने एक बहुत ही दार्शनिक बात कही। उन्होंने कहा, “राजपाल यादव मोम की तरह सरल है, लेकिन सच्चाई की बात आए तो लोहा पिघल सकता है, पर मैं नहीं। मैं लोहे से सौ गुना ज्यादा मजबूत हूं।”

5. विरोधियों के लिए भी दुआएं

इंटरव्यू के अंत में राजपाल ने अपनी दरियादिली दिखाते हुए कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि विचारों और कोर्ट की है। उन्होंने कहा, “जिन्होंने मुझे तकलीफ पहुंचाई, उनके बच्चे भी मेरे फैन हैं। मैं उनके बच्चों के लिए भी उतनी ही दुआ करता हूं जितनी अपने बच्चों के लिए।”

साक्षात्कार के मुख्य बिंदु

विषय
राजपाल यादव का विचार

जड़ें
गांव कुंडरा, शाहजहांपुर से अटूट रिश्ता

संपत्ति
लोगों का प्यार और सम्मान ही असली धन है

जेल
आत्म-चिंतन और कानून के सम्मान का केंद्र

व्यक्तित्व
मोम सा सरल, पर लोहे सा अटल

राजपाल यादव का यह इंटरव्यू साबित करता है कि एक कलाकार गिरकर फिर से उठना जानता है। उनकी यह बातें उनके प्रशंसकों को न केवल प्रेरित करती हैं, बल्कि जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण भी देती हैं।