Ye Dulhan Ne Konsa Gunnah kia tha ? Ispar Allah ka Dardnak Azab kyun aaya ? – Islamic story

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“करोड़पति पत्नी. 5 करोड़ फेंककर मांगा तलाक पति ने पलटकर जो किया उसे देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे”

भाग 1: एक नई शुरुआत

मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल का बैंकवेट हॉल रोशनी से नहाया हुआ था। झूमर की चमक, महंगे परफ्यूम की खुशबू और शैंपेन के गिलासों के टकराने की आवाजें गूंज रही थीं। आज की रात वेदांत ग्रुप ऑफ कंपनीज के लिए ऐतिहासिक थी। कंपनी की सीईओ, रोशनी मल्होत्रा, को ‘बिजनेस वुमन ऑफ द ईयर’ का अवार्ड मिला था।

स्टेज पर खड़ी रोशनी आत्मविश्वास से लबरेज थी। काले रंग की डिजाइनर साड़ी में लिपटी हुई, हाथ में ट्रॉफी थामे वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी टीम, निवेशकों और अपनी कड़ी मेहनत को दे रही थी। हॉल के सबसे पीछे खड़ा एक शख्स, आदित्य, जो साधारण नीली शर्ट और काली पट पहनकर आया था, शांति से खड़ा था। उसकी आंखों में गहरी चमक थी, लेकिन साथ ही एक कड़ा दर्द भी छुपा हुआ था।

आदित्य उन बातों को याद कर रहा था, जो उसने 8 साल पहले सुनें थे। जब रोशनी दिल्ली के मुनरका के एक छोटे से कमरे में, मोमबत्ती की रोशनी में सीए की किताबों में सिर खपाए रहती थी। उसकी आंखों में एक सपना था, जिसे पूरा करने के लिए उसने बहुत संघर्ष किया था, और आदित्य उसका साथी बनकर रोशनी के उस सपने को पूरा करने में मदद कर रहा था।

भाग 2: संघर्ष का रास्ता

आदित्य और रोशनी का सफर आसान नहीं था। 8 साल पहले जब रोशनी के पास मेट्रो के टोकन खरीदने के पैसे भी नहीं थे, तब आदित्य ने अपनी जमीन बेचकर रोशनी के सपने को पूरा करने का फैसला किया। वह सरकारी बैंक में पीओ की नौकरी करता था, लेकिन उसने अपनी नौकरी छोड़ दी ताकि वह रोशनी के स्टार्टअप का हिस्सा बन सके।

रोशनी का सपना था कि वह अपने ज्ञान और कड़ी मेहनत से एक बड़ी कंपनी खड़ी करेगी, और आदित्य ने उसे कभी नाकाम नहीं होने दिया। उसने हर मोड़ पर उसका साथ दिया, डिलीवरी बॉय का काम किया, वेंडर्स के चक्कर काटे, रात-रात भर जागकर रोशनी के प्रोजेक्ट्स की टाइपिंग की, और घर का खाना बनाकर दिया, ताकि रोशनी का समय बर्बाद न हो।

आदित्य ने अपनी पहचान को एक बॉक्स में बंद कर दिया था ताकि रोशनी का सपना उड़ान भर सके। रोशनी उड़ी और इतनी ऊंची उड़ी कि अब वह आदित्य को बहुत छोटा महसूस होने लगा था।

भाग 3: रिश्ते में दरार

गाड़ी के अंदर, रोशनी और आदित्य के बीच एक खामोशी छाई हुई थी। कार के अंदर का सन्नाटा बाहर के शोर से कहीं ज्यादा भारी था। आदित्य ने खिड़की से बाहर देखते हुए वह पुराने दिन याद किए, जब उनके पास कार तो दूर, मेट्रो का टोकन खरीदने के पैसे नहीं होते थे।

रोशनी ने आदित्य से अपनी भावनाओं को साझा किया। उसने कहा, “अब हम अलग-अलग रास्तों पर हैं। मेरी दुनिया बदल चुकी है, और मेरी जरूरतें, मेरा सर्कल सब बदल गया है। सच कहूं तो अब इस रिश्ते में घुटन महसूस करती हूं।” आदित्य ने बहुत शांत स्वभाव से जवाब दिया, “मैं वहीं नहीं रुका था, रोशनी। मैं तो सिर्फ तुम्हारे लिए खड़ा था, ताकि तुम मेरे कंधों पर पैर रखकर ऊपर चढ़ सको।”

रोशनी ने घमंड की दीवार तोड़ी, और उसे एहसास हुआ कि अब आदित्य के साथ उसका रिश्ता टूट चुका है। लेकिन उसके पास एक नई योजना थी। उसने आदित्य से कहा, “हम दोनों के बीच अब कुछ नहीं बचा। मैं अब तुम्हें 5 करोड़ दे रही हूं और तुम्हारी जिंदगी शुरू करने का मौका दे रही हूं।”

आदित्य ने जवाब दिया, “तुम मुझे 5 करोड़ क्यों दे रही हो, रोशनी? तुमने मुझे हमेशा सिर्फ एक प्रोजेक्ट की तरह समझा है। मेरा प्यार कभी तुम्हारे लिए था ही नहीं।”

भाग 4: आदित्य की चुप्पी

रोशनी ने एक दिन एक छोटी सी फाइल में आदित्य को एक बड़ा चेक भेजा और कहा, “ये तुम्हारे लिए है, आदित्य। 5 करोड़ रुपये। तुम अपना बिजनेस शुरू कर सकते हो, आराम से रह सकते हो, जो भी चाहो कर सकते हो।”

आदित्य ने उस चेक को पढ़ा, लेकिन वह चुप रहा। वह जानता था कि रोशनी का यह प्रस्ताव केवल उसकी गरिमा को खरीदने का तरीका था। उसने फाइल को हाथ में लिया और कहा, “मैंने तुम्हारे साथ जो किया, वह कोई सौदा नहीं था, रोशनी। और मैं इस पैसों को नहीं लूंगा।”

भाग 5: नई पहचान

आदित्य ने अपने पुराने जीवन को छोड़ने का फैसला किया। उसने अपना नाम बदलकर अमन रख लिया और ऋषिकेश में एक छोटे से आश्रम में बच्चों को गणित पढ़ाने लगा। वह अब उस दुनिया से बहुत दूर था, जहां रोशनी की चमक थी। वह गंगा के किनारे बैठकर शांति से अपना जीवन जीने लगा।

रोशनी ने उसे ढूंढने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह अदृश्य हो गया था। उसे यह महसूस हुआ कि आदित्य को छोड़कर उसने अपनी आत्मा को खो दिया था। जब वह वापस उसी आश्रम में गई और अमन से मिलने का प्रयास किया, तो उसने पाया कि अमन की आंखों में वह पुराना प्यार नहीं था, बल्कि एक अजीब सी ठंडक थी।

भाग 6: फैसला

आखिरकार रोशनी ने अमन से कहा, “मैं तुम्हें वापस पाने आई हूं, आदित्य। तुमसे बहुत प्यार करती हूं, और मैं जानती हूं कि मैंने बहुत गलत किया।” अमन ने उसे मुझसे दूर रहकर अपने रास्ते का चुनाव करने की सलाह दी। उसने कहा, “मैंने तुम्हारे साथ अपनी पहचान खो दी थी, लेकिन अब मैं उस पहचान को वापस पा चुका हूं।”

रोशनी ने महसूस किया कि कभी-कभी प्यार का मतलब साथ रहना नहीं होता। बल्कि, कभी-कभी प्यार का मतलब होता है दूर रहकर एक दूसरे को सही रास्ता दिखाना।

समाप्त

संदेश: कभी-कभी हमें अपने प्यार और रिश्ते को समझने के लिए दूर जाना पड़ता है। प्यार हमेशा साथ रहने का नहीं, बल्कि एक-दूसरे की स्वतंत्रता और सपनों की कद्र करने का नाम है।