तलाक के 10 साल बाद सड़क किनारे पानी बेचती पत्नी को देख पति ने कुछ ऐसा किया कि सब रो पड़े
तलाक के 10 साल बाद सड़क किनारे पानी बेचती पत्नी को देख पति ने जो किया, उसने सबको रुला दिया
जब अरविंद की कार जयपुर के बाहर धूल भरी सड़क पर धीरे-धीरे रुकी, तो उसने कभी नहीं सोचा था कि एक नज़र उसका पूरा अतीत उसके सामने ला देगी। सड़क किनारे एक फटी-पुरानी साड़ी में, तपती धूप के नीचे बैठी, प्लास्टिक के गिलास में पानी डालती हुई और थकी-हारी निगाहों से मुस्कुराती औरत — वही सिया थी। उसकी पत्नी… या कहें, पूर्व पत्नी।
तलाक को पूरे दस साल बीत चुके थे। एक वक्त था जब अरविंद एक उभरता हुआ बिज़नेसमैन था — अभिमानी, जिद्दी और तेज़। सिया शांत थी, मासूम थी, और बहुत ज़्यादा देने वाली थी। लेकिन ज़िंदगी की दौड़ में प्यार कहीं पीछे छूट गया। बातों में कड़वाहट, दिलों में दूरी, और एक दिन सब खत्म हो गया। दोनों अलग हो गए — बिना किसी अलविदा के, बस कुछ टूटे हुए वादों के साथ।
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अब इतने सालों बाद, जब अरविंद ने उसे इस हाल में देखा — धूप से जली त्वचा, फटे हाथ, और एक छोटी-सी टेबल पर रखे पानी के बोतल — तो उसके भीतर कुछ टूट गया।
वह कार से उतरा और धीरे-धीरे उसके पास गया।
“पानी चाहिए, साब?” — सिया ने बिना ऊपर देखे कहा।
अरविंद का गला सूख गया। उसने कांपती आवाज़ में कहा, “सिया…”

सिया ने सिर उठाया। पल भर के लिए समय रुक गया। उनकी नज़रें मिलीं, और दस साल का सारा दर्द, सारा पछतावा, उन आँखों में एक साथ उमड़ आया।
“तुम?” — सिया की आवाज़ में हल्का सा कंप था।
“हाँ… मैं,” अरविंद ने कहा। “तुम यहाँ… ये सब क्यों?”
वह मुस्कुराई — वही मुस्कान जो कभी उसका सुकून हुआ करती थी। “ज़िंदगी चलानी है, अरविंद। सब कुछ छूट गया, लेकिन सांसें तो चल रही हैं।”
अरविंद की आँखों में आँसू भर आए। उसने अपनी जेब से नोट निकाला, पर सिया ने सिर हिला दिया।
“मैं भीख नहीं लेती,” उसने शांत स्वर में कहा। “मैं काम करती हूँ।”
उस पल अरविंद को एहसास हुआ कि सिया उससे कहीं बड़ी इंसान थी। उसने अपने अहम के लिए जिस औरत को खोया था, वो आज भी अपनी इज़्ज़त से जी रही थी।
वह बिना कुछ बोले चला गया — लेकिन उस रात उसने चैन से नींद नहीं ली। अगले दिन उसने वही जगह फिर से देखी, लेकिन इस बार उसके साथ एक नई पानी की दुकान, बड़ा छत, और एक नया बोर्ड था — ‘सिया वाटर पॉइंट – प्योर लाइफ’।
और उसके पीछे खड़ा था अरविंद — अब मालिक नहीं, बस एक मददगार।
सिया ने उसे देखा, मुस्कुराई, और कहा,
“अब लोग रुकेंगे, अरविंद। सिर्फ पानी पीने नहीं… इंसानियत देखने।”
उस दिन से दोनों फिर कभी पति-पत्नी नहीं बने,
लेकिन ज़िंदगी ने उन्हें फिर से इंसान बना दिया।
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