आखिर क्यों बड़े बड़े पुलिस अफसर झुक गए एक सेब बेचने वाली गरीब लड़की के सामने…

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सेब वाली अनीता

1. सुबह की उम्मीद

सर्दी की सुबह थी। बाजार में हल्की धूप बिखरी थी। सड़क के किनारे एक छोटी सी टोकरी में सेब लेकर अनीता बैठी थी। उसके कपड़े पुराने थे, सलवार-सूट में पैबंद लगे थे। चेहरा मासूम, लेकिन आँखों में संघर्ष की चमक थी।

छह साल पहले आई बाढ़ ने उसका परिवार छीन लिया था। वह अकेली रह गई थी। तब से रोज़ सुबह बाजार आकर सेब बेचती थी, ताकि दो वक्त की रोटी जुटा सके। किसी का सहारा नहीं, बस खुद का हौसला।

2. पहली चुनौती

अनीता चुपचाप बैठी थी कि अचानक धूल उड़ाते हुए एक मोटरसाइकिल उसके सामने रुकी। इंस्पेक्टर वरुण सिंह उतरते ही गरज पड़े, “ए लड़की, तुझे इतनी हिम्मत कैसे हुई सड़क किनारे बैठकर सेब बेचने की? कहीं और जगह नहीं मिली क्या?”

अनीता डर गई। हाथ जोड़कर बोली, “साहब, मैं यहीं सेब बेचती हूं। इसी से पेट पालती हूं। अगर आप भगा देंगे तो मैं क्या करूंगी?”

इंस्पेक्टर ने धमकाया, “जल्दी निकल जा, वरना लाठी पड़ेगी।” अनीता की आँखें भर आईं, “प्लीज साहब, यहीं बैठने दीजिए।”

इंस्पेक्टर बोले, “ठीक है, मुझे एक किलो सेब दे। फ्री में। रोज़ ऐसे ही देना पड़ेगा, तभी बैठ पाएगी।” अनीता घबरा गई, “साहब, सेब फ्री में दूंगी तो मेरा नुकसान होगा।”

वरुण सिंह ने गुस्से में कहा, “बहुत बहस करती है। मैं रोज़ आऊंगा, पैसे मांगे तो जेल में डाल दूंगा।” इतना कहकर मोटरसाइकिल पर बैठकर चले गए।

3. अनीता की चिंता

अनीता वहीं बैठी सोचती रही, “अगर इंस्पेक्टर रोज़ फ्री में सेब ले जाएंगे तो मैं भूखी रह जाऊंगी। दिनभर में मुश्किल से दो किलो सेब बिकते हैं।”

उसने ऊपर देखा, “भगवान, कब मेरी किस्मत बदलेगी?”

4. दूसरी सुबह

अगले दिन फिर वही जगह, वही टोकरी, वही अनीता। कुछ देर बाद इंस्पेक्टर फिर आए। “सेब निकाल, जल्दी दे।”

अनीता ने हाथ जोड़कर कहा, “साहब, आज कम से कम आधे पैसे दे दीजिए। कल मेरा नुकसान हो गया था।”

इंस्पेक्टर ने गुस्से में थप्पड़ मार दिया, “बहुत जुबान चलती है। ज्यादा बोलेगी तो जेल में डाल दूंगा।”

अनीता की आँखों से आँसू बह निकले। “साहब, मैं बहुत गरीब हूं। सेब बेचकर ही पेट पालती हूं। प्लीज, मेरी मजबूरी समझिए।”

5. एक नई नजर

सड़क के दूसरी तरफ जिले की आईपीएस अफसर नंदिनी सिंह खड़ी थीं। उन्होंने सारी घटना देखी। इंस्पेक्टर का रवैया देखकर उन्हें गुस्सा आया। लेकिन वह चुप रहीं, सोचने लगीं—मामला क्या है?

इंस्पेक्टर के जाने के बाद नंदिनी धीरे-धीरे अनीता के पास आईं। प्यार से पूछा, “वह इंस्पेक्टर तुमसे क्या कह रहा था?”

अनीता डर गई, “कुछ नहीं मैडम, सेब खरीद कर ले गए।”

नंदिनी ने कहा, “मैंने देखा, उसने थप्पड़ मारा है। सच बताओ, क्या हुआ?”

अनीता ने रोते हुए सब बता दिया—कैसे इंस्पेक्टर रोज़ फ्री में सेब ले जाता है, पैसे मांगने पर मारता है, धमकाता है।

नंदिनी की आँखें भर आईं। “क्या तुम्हारा कोई नहीं है?”

“नहीं मैडम, बाढ़ में सब बिछड़ गए।” अनीता ने सिर झुका लिया।

6. बहनों की मुलाकात

नंदिनी को अनीता की बातें सुनकर झटका लगा। उसने पूछा, “तुम्हारा नाम क्या है?”

“मेरा नाम अनीता है।”

इतना सुनते ही नंदिनी की आँखों से आँसू बह निकले। “मैं ही हूं नंदिनी, तुम्हारी बड़ी बहन! हम बाढ़ में बिछड़ गए थे।”

दोनों बहनें गले लगकर फूट-फूट कर रोने लगीं।

7. नया हौसला

नंदिनी ने कहा, “अब तुम्हें सेब बेचने की जरूरत नहीं है। मैं आईपीएस अफसर हूं, तुम्हें अपने साथ घर ले जाऊंगी। अब कोई तुम्हें सताएगा नहीं। इंस्पेक्टर को सजा दिलाऊंगी।”

अनीता की आँखों में पहली बार राहत की चमक थी।

8. न्याय की तैयारी

नंदिनी ने तय किया कि इंस्पेक्टर को सबके सामने सस्पेंड किया जाए। अगले दिन अनीता को फिर से उसी जगह सेब बेचने भेजा। उसके बालों में छुपा कैमरा लगा दिया, ताकि सबूत मिल जाए।

कुछ देर बाद इंस्पेक्टर आया। “सेब निकाल, जल्दी दे।”

अनीता ने कहा, “साहब, पैसे देने होंगे। वरना मैं भूखी रह जाऊंगी।”

इंस्पेक्टर ने फिर थप्पड़ मारा। तभी नंदिनी बाहर आईं, “इंस्पेक्टर वरुण सिंह, मैं आपको अभी सस्पेंड करती हूं!”

वरुण सिंह दंग रह गया। “मैडम, माफ कर दीजिए।”

नंदिनी ने वीडियो दिखाया। “अब आगे की कार्यवाही कोर्ट में होगी।”

9. कोर्ट का फैसला

अगले दिन मामला कोर्ट पहुँचा। जज साहब ने पूछा, “अनीता, सच-सच बताओ, क्या हुआ?”

अनीता ने कांपती आवाज में सब बताया—”इंस्पेक्टर रोज़ आता था, धमकाता था, फ्री में सेब लेता था, पैसे मांगने पर मारता था।”

सरकारी वकील ने वीडियो सबूत पेश किया। कोर्ट में वीडियो चला—इंस्पेक्टर की बदतमीजी, धमकी, थप्पड़।

जज साहब ने कहा, “आईपीएस नंदिनी सिंह को बुलाया जाए।”

नंदिनी ने बयान दिया, “यह लड़की मेरी छोटी बहन है। इंस्पेक्टर ने कानून का दुरुपयोग किया है।”

इंस्पेक्टर के वकील ने बचाव किया, लेकिन सबूत के आगे उसकी एक न चली।

10. न्याय की जीत

जज साहब ने फैसला सुनाया, “इंस्पेक्टर वरुण सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग किया है। गरीब महिला से वसूली और हिंसा की है। आरोपी को तुरंत सस्पेंड किया जाता है और न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाता है।”

वरुण सिंह का चेहरा सफेद पड़ गया। पुलिस वाले उसे पकड़ कर ले गए।

अनीता की आँखों में आँसू थे, लेकिन आज ये आँसू दर्द के नहीं, इंसाफ के थे।

11. नई शुरुआत

नंदिनी ने अनीता को अपने घर ले जाकर पढ़ाई शुरू करवाई। अनीता ने मेहनत की, स्कूल में टॉप किया। नंदिनी ने उसे हर कदम पर सहारा दिया।

गाँव में लोग कहते, “देखो, गरीब की बेटी अब अफसर की बहन है।”

अनीता ने सेब बेचने वाली छोटी टोकरी को अपने कमरे में सजा लिया—संघर्ष की याद के तौर पर।

12. समाज में बदलाव

इस घटना के बाद जिले में गरीबों के साथ पुलिस का व्यवहार बदल गया। प्रशासन ने नियम बनाए—कोई पुलिस अफसर गरीबों को धमकाएगा तो सख्त सजा होगी।

अनीता की कहानी अखबारों में छपी। लोग उसकी हिम्मत की तारीफ करने लगे।

13. बहनों का संदेश

एक दिन अनीता ने स्कूल में भाषण दिया—

“गरीबी कोई अपराध नहीं। हर इंसान को सम्मान चाहिए। अगर कोई ताकतवर तुम्हारा हक छीने, तो डरना नहीं, आवाज़ उठाना। सच और सबूत के सामने सबसे बड़े अफसर भी झुक जाते हैं।”

नंदिनी ने तालियाँ बजाईं। गाँव के बच्चे अनीता को अपना आदर्श मानने लगे।

14. अंतिम मोड़

कुछ साल बाद अनीता ने कॉलेज में दाखिला लिया। नंदिनी ने उसकी फीस भरी। अनीता ने वादा किया, “दीदी, एक दिन मैं भी अफसर बनूंगी। गरीबों के हक के लिए लड़ूंगी।”

नंदिनी ने मुस्कराकर कहा, “तू मेरी बहन है, तुझमें हिम्मत है। तू जरूर सफल होगी।”

15. समापन

सेब वाली अनीता की कहानी अब हर गरीब के लिए उम्मीद बन गई थी। पुलिस अफसरों ने भी सीखा—कानून सबके लिए बराबर है। ताकत का गलत इस्तेमाल कभी बर्दाश्त नहीं होगा।

बाजार में जब भी कोई गरीब लड़की सेब बेचती दिखती, लोग उसकी मदद करते, उसका सम्मान करते।

अनीता ने अपनी टोकरी में एक छोटा सा कार्ड रख लिया—”हिम्मत से बड़ा कोई सेब नहीं।”

समाप्त