कब्रिस्तान में महिला के साथ हुआ गलत काम/S.P साहब के भी रोंगटे खड़े हो गए/

अंधविश्वास का काला साया और कब्रिस्तान का रहस्य

प्रस्तावना

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले का बरघट गाँव एक शांत और साधारण गाँव था, लेकिन यहाँ की मिट्टी में एक ऐसा रहस्य दफन होने वाला था जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। यह कहानी है अनवर की, जो पेशे से एक कुशल मिस्त्री था, लेकिन उसकी लत और उसके अंधविश्वास ने उसे एक ऐसे रास्ते पर धकेल दिया जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। एक तांत्रिक का दावा, एक पत्नी की जिद और एक कब्रिस्तान की चारदीवारी—इन सबके बीच बुनी गई यह घटना समाज के काले चेहरे को उजागर करती है।

अध्याय १: अनवर का विलासी जीवन और पारिवारिक कलह

जबलपुर के बरघट गाँव में अनवर नाम का एक मिस्त्री रहता था। अनवर अपने काम में बहुत माहिर था और गाँव के बड़े-बड़े मकान बनाने का ठेका लेता था। वह पैसे भी अच्छे कमाता था, लेकिन उसके हाथ में पैसा कभी टिकता नहीं था। अनवर को /शराब और शबाब/ का बेहद शौक था। अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा वह अनैतिक गतिविधियों और /गैर औरतों/ पर लुटा देता था।

घर में उसकी पत्नी सलमा रहती थी, जो स्वभाव से गंभीर और घर के कामों में व्यस्त रहने वाली महिला थी। सलमा अक्सर अनवर को समझाती थी, “अनवर, भविष्य के लिए कुछ बचत करो, बुढ़ापे में काम आएगी।” लेकिन अनवर उसकी बातों को हँसी में उड़ा देता।

दोनों की शादी को कई साल बीत चुके थे, लेकिन उनके घर में कोई /औलाद/ नहीं थी। यही उनके बीच झगड़े की मुख्य जड़ थी। सलमा बांझपन के ताने सहती और अनवर खुद को लाचार महसूस करता। उन्होंने कई डॉक्टरों से इलाज कराया, दवाइयां खाईं, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। थक-हारकर दोनों ने अंधविश्वास का सहारा लिया। जहाँ भी कोई तांत्रिक या ओझा मिलता, वे अपना हाथ दिखाने पहुँच जाते।

अध्याय २: १२ दिसंबर २०२५: तांत्रिक अब्दुल का आगमन

१२ दिसंबर २०२५ की सुबह अनवर और सलमा अपने घर में नाश्ता कर रहे थे। तभी उनके दरवाजे पर एक रहस्यमयी तांत्रिक आया, जिसका नाम अब्दुल था। तांत्रिक को देखते ही दोनों ने अपना खाना छोड़ दिया और उसके चरणों में बैठ गए।

अब्दुल तांत्रिक ने अनवर का हाथ देखा और फिर सलमा की ओर देखते हुए कहा, “तुम्हारी समस्या बहुत गहरी है, लेकिन इसका समाधान मेरे पास है।” सलमा ने हाथ जोड़कर कहा, “बाबा, हमें बस एक /औलाद/ चाहिए। आप जो कहेंगे, हम वो करेंगे।”

तांत्रिक ने एक भयानक शर्त रखी। उसने कहा, “तुम्हें १० महीने के भीतर एक पुत्र प्राप्त होगा, लेकिन इसके लिए अनवर को एक ‘साधना’ करनी होगी। अनवर को कब्रिस्तान जाना होगा और वहाँ दफन नई /लाशों/ के साथ /अनैतिक कृत्य/ करना होगा। कम से कम तीन महिलाओं के साथ रातें गुजारनी होंगी।”

यह बात सुनकर कोई भी सामान्य व्यक्ति डर जाता, लेकिन सलमा और अनवर के सिर पर अंधविश्वास का भूत सवार था। सलमा ने अनवर से कहा, “तुम्हें यह करना ही होगा, वरना मैं तुम्हें तलाक दे दूँगी।” अनवर पहले तो झिझका, लेकिन पत्नी के दबाव और तांत्रिक के वादे ने उसे अपराधी बनने पर मजबूर कर दिया।

अध्याय ३: कब्रिस्तान की चारदीवारी और आयशा से मुलाकात

संयोग से उसी समय गाँव के मुखिया राशिद अनवर के पास आए। उन्होंने कहा, “अनवर, कब्रिस्तान में आवारा कुत्तों ने गंदगी फैला दी है। मैंने सफाई करवा दी है, अब तुम्हें वहाँ एक पक्की चारदीवारी बनानी है।”

अनवर को लगा कि यह खुदा का इशारा है। कब्रिस्तान में काम करने के बहाने उसे वहाँ रात बिताने का कानूनी मौका मिल जाएगा। उसने तुरंत हाँ कर दी। काम शुरू करने के लिए उसे एक मजदूर की जरूरत थी, इसलिए वह गाँव के रहमान नाम के मजदूर के घर पहुँचा।

रहमान के घर का दरवाजा उसकी पत्नी आयशा ने खोला। आयशा बहुत ही खूबसूरत थी। उसे देखते ही अनवर की /नियत/ खराब हो गई। उसने देखा कि रहमान नशे में धुत्त पड़ा है। आयशा ने अपनी गरीबी का हवाला देते हुए अनवर से एक हजार रुपये उधार माँगे।

अनवर ने मौके का फायदा उठाते हुए कहा, “पैसे तो मिल जाएंगे, लेकिन तुम्हें मेरी /इच्छा/ पूरी करनी होगी।” गरीबी और मजबूरी के कारण आयशा के पास कोई रास्ता नहीं था। उसने दरवाजा बंद किया और उस दोपहर अनवर और आयशा के बीच /गलत संबंध/ कायम हुए। अनवर ने उसे पैसे दिए और शाम को रहमान को काम पर भेजने के लिए कहकर चला गया।

अध्याय ४: पहली घटना: फातिमा की मौत और रात का अपराध

१३ दिसंबर २०२५ को गाँव में फातिमा नाम की एक ४० वर्षीय महिला की बीमारी के कारण मौत हो गई। उसे उसी कब्रिस्तान में दफनाया गया जहाँ अनवर काम कर रहा था। अनवर दुखी होने के बजाय खुश था क्योंकि उसे तांत्रिक की शर्त पूरी करने का मौका मिल गया था।

उसने रहमान को लालच दिया, “रहमान, आज रात तुम्हें मेरे साथ कब्रिस्तान में रुकना होगा। मैं तुम्हें २,००० रुपये दूँगा।” रहमान लालच में आ गया। रात ८ बजे अनवर ने दो बोतल /शराब/ मंगवाई। दोनों ने जमकर शराब पी।

जब रहमान को गहरा नशा हो गया, तो अनवर ने फातिमा की कब्र खोदी और /लाश/ को बाहर निकाला। उसने उस निर्जीव देह के साथ /अनैतिक काम/ किया। काम खत्म करने के बाद उसने लाश को वापस दफना दिया।

अध्याय ५: आयशा के घर फिर से रात और पड़ोसन की नजर

अनवर का मन अभी नहीं भरा था। वह रहमान को उसके घर छोड़ने गया। रहमान बेसुध था। अनवर ने आयशा के साथ फिर से /समय बिताने/ का फैसला किया। उसने रहमान की जेब से ही पैसे निकाले और आयशा को देकर उसके साथ /शारीरिक संबंध/ बनाए।

लेकिन इस बार वे अकेले नहीं थे। पड़ोसन रुबीना ने अनवर को देर रात आयशा के घर से निकलते देख लिया। अगली सुबह रुबीना ने रहमान को सब बता दिया। रहमान ने आयशा से पूछा, लेकिन आयशा ने बड़ी चतुराई से बात घुमा दी कि रुबीना पैसे न मिलने के कारण झूठ बोल रही है। रहमान उसकी बातों में आ गया।

अध्याय ६: दूसरी घटना और अनवर का बढ़ता दुस्साहस

एक सप्ताह के भीतर गाँव में एक और महिला की मौत हुई। अनवर ने फिर वही प्रक्रिया दोहराई। उसने रहमान को पैसे दिए, उसे शराब पिलाई और दूसरी /लाश/ के साथ भी वही /घिनौना कृत्य/ किया।

घर लौटकर उसने सलमा को बताया, “दो काम हो गए हैं, बस एक आखिरी बाकी है।” सलमा खुश थी कि अब जल्द ही उनके घर में बच्चा आएगा। उनका अंधविश्वास उन्हें यह नहीं दिखा रहा था कि वे कितने बड़े पाप और अपराध के दलदल में धंस चुके हैं।

अध्याय ७: २२ दिसंबर २०२५: भंडाफोड़ और गिरफ्तारी

२२ दिसंबर को गाँव के कई लोगों ने रहमान को चेतावनी दी, “रहमान, अनवर को तुम्हारे घर आते देखा गया है। अपनी पत्नी पर नजर रखो।” इस बार रहमान को यकीन हो गया कि कुछ तो गलत है।

रात को जब अनवर ने फिर से कब्रिस्तान में रुकने और शराब पीने की बात की, तो रहमान ने एक योजना बनाई। उसने शराब पीने का नाटक किया और अनवर से कहा, “तुम काम करो, मैं घर जा रहा हूँ।”

अनवर जैसे ही तीसरी कब्र खोदने लगा, रहमान सीधे मुखिया राशिद के पास पहुँचा और पूरी बात बता दी। राशिद ने तुरंत पुलिस को फोन किया। जब पुलिस कब्रिस्तान पहुँची, तो अनवर रंगे हाथों कब्र खोदते हुए पकड़ा गया।

पुलिस ने उसे वहीं पीटना शुरू किया। पुलिस स्टेशन ले जाने पर अनवर ने जो कबूलनामा दिया, उसने पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े कर दिए। उसने बताया कि कैसे एक तांत्रिक के कहने पर उसने /लाशों/ के साथ /गलत काम/ किया।

निष्कर्ष

पुलिस ने अनवर के खिलाफ /लाश की गरिमा भंग करने/ और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। तांत्रिक अब्दुल और सलमा को भी सह-अभियुक्त बनाया गया। यह घटना हमें सिखाती है कि अंधविश्वास और /वासना/ इंसान को जानवर से भी बदतर बना सकते हैं।

समाज में फैले ऐसे ढोंगी बाबा और तांत्रिक मासूम लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर उन्हें अपराधी बना देते हैं। जागरूक रहें और ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें।

कानूनी चेतावनी: यह कहानी वास्तविक घटनाओं और जागरूकता के उद्देश्य से लिखी गई है। किसी भी प्रकार का अंधविश्वास या आपराधिक कृत्य दंडनीय अपराध है।