जिस बेटे को जज 8 साल से ढूंढ रहा था- वो स्टेशन पर रिक्शा चलाते मिला फिर..
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“जिस बेटे को जज 8 साल से ढूंढ रहा था- वो स्टेशन पर रिक्शा चलाते मिला फिर…”
भाग 1: आदित्य का संघर्ष
दिल्ली के चांदनी चौक की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर एक छोटा सा रिक्शा धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। रिक्शा चलाने वाला बच्चा किसी के लिए अनजान था, लेकिन उसकी छोटी उम्र और कमजोर कद ने उसे कई बार नजरअंदाज किया गया था। आदित्य, महज़ 10 साल का एक लड़का, रिक्शा चला रहा था, लेकिन उसकी हालत और भी खराब हो चुकी थी। उसके हाथों में जख्म थे, शरीर में थकान थी, और उस दिन उसने बहुत मुश्किल से कुछ पैसे कमाए थे।
उसकी माँ बीमार थी, और वह दवाइयों के लिए पैसे जुटाने के लिए रिक्शा चला रहा था। लेकिन दिनभर की मेहनत के बाद भी उसके पास केवल ₹50 थे। वह जानता था कि इन पैसों से उसकी माँ का इलाज नहीं हो सकता। आदित्य अपनी छोटी सी दुनिया में जैसे-तैसे जी रहा था, बिना किसी मदद के।
एक दिन, जब आदित्य अपनी यात्रा से वापस लौट रहा था, उसे पुलिस के तीन जवानों ने देखा। वे आदित्य के रिक्शा के पास पहुंचे, और आदित्य को अपनी मदद का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा, “तू क्या कर लेगा, हमें पैसे नहीं देगा। तेरे जैसे बच्चे रोज़ आते हैं, और चले जाते हैं।”
आदित्य ने उनसे विनती की, “साहब, मेरी दादी बीमार है, मुझे दवाइयों के लिए पैसे चाहिए।” लेकिन पुलिस वालों को इस बच्चे की कोई परवाह नहीं थी। उन्होंने आदित्य से ₹50 छीन लिए और उसे सड़क पर थप्पड़ मारा। आदित्य का दिल टूट चुका था, लेकिन वह किसी से मदद की उम्मीद नहीं कर सकता था। उसे समझ में आ गया कि उसके पास जो कुछ भी था, वह जल्दी खत्म हो जाएगा।
लेकिन क्या पुलिस वालों को यह मालूम था कि यह बच्चा किसी और का नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े न्यायाधीश का बेटा है, जो पिछले 8 सालों से उसे ढूंढ रहे थे?

भाग 2: जज राहुल कुमार का पीछा
8 साल पहले, जब आदित्य केवल 2 साल का बच्चा था, वह दिल्ली के एक मॉल में अपने पिता, सुप्रीम कोर्ट के जज राहुल कुमार और अपनी मां प्रिया कुमार के साथ खरीदारी करने गया था। वह दिन रविवार था, और जज राहुल कुमार ने सोचा था कि वह अपने बेटे के साथ कुछ समय बिताएंगे। आदित्य अभी-अभी चलना सीख रहा था, और मॉल की रंग-बिरंगी दुनिया उसे बहुत आकर्षित कर रही थी।
जज राहुल कुमार को उस दिन अपने बेटे से बहुत उम्मीदें थीं। आदित्य की छोटी-छोटी तितलियों की तरह उंगलियाँ अपने पिता की उंगली में फंसी हुई थीं, और वह खुशी से इधर-उधर देख रहा था। लेकिन अचानक ही आदित्य मॉल में कहीं खो गया। जज राहुल कुमार और उनकी पत्नी प्रिया कुमार अपने बेटे आदित्य को ढूंढते रहे, लेकिन वह कहीं नहीं मिला।
उनकी सांसें तेज़ हो गईं, और यह एक अभूतपूर्व डर का पल था, क्योंकि आदित्य उनके जीवन का सबसे कीमती हिस्सा था। पुलिस, सुरक्षा गार्ड और प्राइवेट डिटेक्टिव्स की टीम भी काम पर लग गई, लेकिन आठ साल तक आदित्य का कोई सुराग नहीं मिला। जज राहुल कुमार ने तमाम कोशिशें कीं, विज्ञापन दिए, और कई मीडिया चैनलों पर भी अपील की, लेकिन आदित्य का कोई पता नहीं चला।
भाग 3: आदित्य की खोज
अब 8 साल बाद, आदित्य रिक्शा चला रहा था, और वह उसी जगह पर था, जहां एक समय वह अपने पिता से बिछड़ गया था। उसकी आँखों में दर्द था, लेकिन उसमें एक अदम्य इच्छाशक्ति भी थी। जब वह तीन पुलिस वालों के पास गया और उनसे पैसे मांगे, तो उन्होंने उसे बहुत बुरी तरह से पीटा। उन्हें नहीं पता था कि यह वही बच्चा है, जिसे वे हर रोज़ याद करते थे।
विकास, संजय और अनिल — ये वही पुलिस वाले थे, जिन्होंने आदित्य के साथ बुरी तरह व्यवहार किया। आदित्य के रोने से उनकी बेरहमी बढ़ी, और उन्होंने आदित्य से पैसे छीनकर उसे सड़क पर फेंक दिया। यह दृश्य पास की चाय की दुकान पर बैठे बुजुर्ग अंकल ने देखा, और उन्होंने पुलिस वालों से कहा, “यह मासूम बच्चा है, इसके पैसे वापस कर दो।”
लेकिन पुलिस वाले उसे भी मारने लगे। आदित्य भागते हुए रिक्शा लेकर वहां से चला गया, लेकिन इन पुलिस वालों को क्या पता था कि यह वही बच्चा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के जज राहुल कुमार पिछले आठ साल से ढूंढ रहे थे?
भाग 4: सच्चाई का खुलासा
आदित्य का वीडियो वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर उसकी मारपीट का वीडियो तेजी से फैल गया। मीडिया चैनलों ने इस वीडियो को प्रमुखता से दिखाया, और लोगों ने पुलिस वालों के खिलाफ गुस्से में प्रतिक्रिया दी। जज राहुल कुमार को जब यह वीडियो मिला, तो उनकी आँखों में आंसू थे। यह वही बच्चा था, जिसे वह 8 साल से ढूंढ रहे थे।
राहुल कुमार ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने अपने अधिकारियों को आदेश दिया कि आदित्य को ढूंढा जाए और उसकी मां सुमित्रा देवी को भी खोजा जाए। 8 साल बाद, राहुल कुमार ने अंततः अपने बेटे को ढूंढ लिया था, लेकिन वह रिक्शा चलाने वाला बच्चा नहीं था। वह एक मजबूत और सशक्त लड़का बन चुका था।
भाग 5: आदित्य और सुमित्रा देवी का पुनर्मिलन
राहुल कुमार और उनकी टीम ने सुमित्रा देवी को ढूंढ लिया। वह एक गरीब महिला थी, जिसने आदित्य को 8 साल पहले मॉल में पाया था और तब से उसे पाला था। राहुल कुमार ने सुमित्रा देवी से मिले और आदित्य के बारे में सब कुछ सुना। वह रोते हुए कहने लगे, “आपने मेरे बेटे को अपना पोता मानकर पाला है, मैं आपका कैसे शुक्रिया अदा कर सकता हूं?”
सुमित्रा देवी ने उन्हें कहा, “आपका बेटा बहुत खास है, मैंने उसे अपनी संतान की तरह पाला है। वह अब वह बच्चा नहीं है, जो मैंने 8 साल पहले मॉल में पाया था।” राहुल कुमार ने आदित्य को अपनी गोदी में लिया और उसे गले लगाते हुए कहा, “तुम मेरा बेटा हो, आदित्य। मैं तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाऊँगा।”
निष्कर्ष: इस कहानी में एक बेटे के अपमान और संघर्ष की दास्तान है, जिसने अपने पिता को 8 साल बाद पाया। यह भी दर्शाता है कि एक छोटे से बच्चे की सच्चाई को छिपाना नहीं जा सकता, और एक दिन वह सबको अपनी ताकत और कड़ी मेहनत से दिखा ही देता है।
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