आईपीएस मैडम को 8 साल बाद अपना पति और बेटी सड़क पर भीख मांगते हुए मिले | पुलिस की चाल

इंसाफ की ज्वाला: एक आईपीएस की जंग

अध्याय 1: नई तैनाती और पुरानी यादें

बागपत जिले की सीमा पर जैसे ही आईपीएस अंजलि की गाड़ी ने प्रवेश किया, उनके मन में यादों का एक बवंडर उठने लगा। अंजलि, जो अपनी ईमानदारी और सख्त अनुशासन के लिए पूरे प्रदेश में जानी जाती थीं, इस बार एक विशेष मिशन पर यहाँ आई थीं। उनके साथ उनका भरोसेमंद जूनियर ऑफिसर आकाश था, जो दिखने में तो बहुत कर्तव्यनिष्ठ था, लेकिन उसके मन के भीतर कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी।

अंजलि का अतीत एक गहरे घाव जैसा था। आठ साल पहले, एक भयानक एक्सीडेंट में उन्हें बताया गया था कि उनके पति रोहन और उनकी नन्ही बेटी अब इस दुनिया में नहीं रहे। उस समय वे एक साधारण पुलिस अफसर थीं, लेकिन उस सदमे ने उन्हें इतना मजबूत बना दिया कि उन्होंने आईपीएस बनकर सिस्टम को सुधारने की कसम खा ली।

शहर की ओर जाते हुए अंजलि ने अचानक गाड़ी रुकवाई। सड़क के किनारे दो भिखारी बैठे थे—एक अधेड़ उम्र का आदमी और एक छोटी बच्ची। उनकी हालत अत्यंत दयनीय थी। अंजलि का दिल पसीज गया। जैसे ही वे उनकी मदद के लिए आगे बढ़ीं, आकाश ने उन्हें रोकने की कोशिश की। “छोड़िए मैडम, ये फजूल लोग हैं। इनसे बदबू आ रही है, हमें दफ्तर के काम से देरी हो रही है।”

लेकिन अंजलि ने उसकी बात अनसुनी कर दी। जैसे ही उनकी नजर उस भिखारी की आंखों में पड़ी, उन्हें बिजली का झटका सा लगा। “ये तो बिल्कुल रोहन जैसे लग रहे हैं,” उनके मन ने कहा।

अध्याय 2: आकाश का काला चेहरा

आकाश अंजलि से शादी करने का सपना देख रहा था। वह जानता था कि अगर अंजलि को उनके पति और बेटी के जिंदा होने का पता चल गया, तो उसका सपना चकनाचूर हो जाएगा। दरअसल, आठ साल पहले अंजलि का एक्सीडेंट कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि आकाश और उसके भ्रष्ट साथियों की साजिश थी। उन्होंने रोहन को डरा-धमका कर और अंजलि की मौत की झूठी खबर देकर शहर छोड़ने पर मजबूर कर दिया था।

अंजलि ने मन ही मन ठान लिया कि वह उस भिखारी का सच जानकर रहेंगी। अगली सुबह, वे बिना वर्दी के उसी जगह पहुंचीं, लेकिन वहां कोई नहीं था। उन्होंने चाय वाले से पूछा, तो पता चला कि पुलिस ने सुबह ही वहां से भिखारियों को भगा दिया है। अंजलि समझ गईं कि कोई है जो उन्हें सच तक पहुंचने से रोकना चाहता है।

तलाश करते हुए अंजलि एक प्राचीन मंदिर के पास पहुंचीं। वहां का नजारा भयावह था। पुलिस वाले निर्दोष भिखारियों को बेरहमी से पीटकर भगा रहे थे। अंजलि ने अपनी पहचान बताए बिना एक भिखारी को रोका और पूछा, “वह छोटी बच्ची और उसका पिता कहां हैं?”

“मैडम, वे अंदर मंदिर के पिछले हिस्से में छिपे हैं,” भिखारी ने कांपते हुए कहा।

अध्याय 3: आठ साल बाद मिलन

अंजलि मंदिर के भीतर पहुंचीं। वहां फटे-पुराने कपड़ों में वही आदमी बैठा था। अंजलि ने पास जाकर धीरे से कहा, “रोहन… क्या तुम रोहन हो?”

उस आदमी ने चौंककर ऊपर देखा। उसकी आंखों में पहचान की चमक उभरी, फिर डर। “मेरा नाम तुम्हें कैसे पता? पुलिस वाले फिर से आ गए क्या?”

अंजलि की आंखों से आंसू बह निकले। “रोहन, मैं तुम्हारी अंजलि हूं।”

रोहन का चेहरा पीला पड़ गया। “नहीं, मेरी अंजलि तो आठ साल पहले मर चुकी है। पुलिस ने मुझे बताया था कि उसकी मौत हो गई और अगर मैं यहाँ रहा तो वे मेरी बेटी को भी मार देंगे।”

अंजलि ने तब अपनी उंगली से वह पुरानी अंगूठी निकाली जो रोहन ने उन्हें शादी पर दी थी। रोहन के पास भी वैसी ही एक अंगूठी थी, जो उसने संभाल कर रखी थी। सच सामने था। साजिश इतनी गहरी थी कि एक परिवार को आठ साल तक एक-दूसरे के लिए ‘मृत’ घोषित कर दिया गया था।

अध्याय 4: एक नई साजिश और गिरफ्तारी

अंजलि ने रोहन और अपनी बेटी को फिलहाल एक सुरक्षित स्थान पर भेज दिया, लेकिन आकाश को इसकी भनक लग गई। उसने अंजलि को नीचा दिखाने और रोहन को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का एक नया पैंतरे आजमाया।

आकाश ने अपने एक आदमी को भिखारी के भेष में रोहन के पास भेजा और उनकी झोपड़ी में नशीले पदार्थों का एक पैकेट रखवा दिया। इसके तुरंत बाद, आकाश ने अपनी टीम के साथ वहां छापा मारा। “पकड़ लो इसे! यह मंदिर के पास नशा बेच रहा है!” आकाश ने चिल्लाकर कहा।

अंजलि जब वहां पहुंचीं, तो रोहन सलाखों के पीछे थे। आकाश ने कुटिल मुस्कान के साथ कहा, “मैडम, आपके पति तो नशे के सौदागर निकले। अब कानून अपना काम करेगा। आप अपनी वर्दी पर दाग मत लगाइए, इस भिखारी को भूल जाइए और मुझसे शादी कर लीजिए।”

रोहन चिल्ला रहे थे, “अंजलि, मेरा यकीन करो, इन्होंने ही यह नशा वहां रखा है!”

अध्याय 5: अदालत का इंसाफ

अंजलि ने हार नहीं मानी। उन्हें पता था कि आकाश जैसा शातिर अपराधी बिना सबूत के नहीं फंसेगा। उन्होंने अपनी पूरी टीम का इस्तेमाल किया और चुपके से उस इलाके के सीसीटीवी फुटेज और आकाश के फोन कॉल रिकॉर्ड्स निकलवाए।

अदालत का दिन आया। आकाश बहुत आश्वस्त था। उसने झूठे गवाह और कुछ छेड़छाड़ की गई तस्वीरें पेश कीं। जज साहब ने अंजलि से पूछा, “आईपीएस अंजलि, क्या आपके पास कोई सबूत है कि पुलिस ने यह सब साजिश के तहत किया है?”

अंजलि ने दृढ़ता से कहा, “जी जज साहब।” उन्होंने एक पेनड्राइव निकाली। “मैंने उस मंदिर के पास और पुलिस स्टेशन के भीतर गुप्त कैमरे लगवाए थे।”

जैसे ही वीडियो चला, पूरी अदालत सन्न रह गई। वीडियो में आकाश साफ तौर पर अपने गुंडों को नशा देते हुए और रोहन को फंसाने की बात करते हुए दिख रहा था। इतना ही नहीं, आठ साल पुरानी साजिश के रिकॉर्ड भी अंजलि ने ढूंढ निकाले थे।

अध्याय 6: अंत और नई शुरुआत

जज साहब ने हथौड़ा मारते हुए फैसला सुनाया, “तमाम सबूतों और गवाहों के मद्देनजर, यह अदालत आकाश को भ्रष्टाचार, साजिश और निर्दोष को फंसाने के जुर्म में 18 साल की कड़ी कैद और भारी जुर्माने की सजा सुनाती है।”

आकाश के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। वह चिल्लाता रह गया, लेकिन कानून के लंबे हाथों ने उसे जकड़ लिया था।

अंजलि ने रोहन और अपनी बेटी को गले लगा लिया। आठ साल का वनवास खत्म हुआ था। उन्होंने साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ रोब दिखाने के लिए नहीं, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और अन्याय को जड़ से उखाड़ने के लिए होती है।

सीख: सत्य को कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है, लेकिन उसे मिटाया नहीं जा सकता। ईमानदारी का रास्ता कठिन जरूर होता है, लेकिन जीत हमेशा उसी की होती है। अपनों का साथ कभी न छोड़ें और हमेशा इंसाफ के लिए खड़े रहें।