पेट्रोल पंप पर काम करने वाले दो लोगों से उसे प्यार हो गया || मध्य प्रदेश शिक्षक मामला

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मध्य प्रदेश शिक्षक हत्याकांड: प्रेम, विश्वासघात और साजिश की पूरी कहानी

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सामने आया एक मामला इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला न केवल एक शिक्षक की हत्या का है, बल्कि रिश्तों में टूटते भरोसे, अवैध प्रेम संबंधों और एक सोची-समझी आपराधिक साजिश की भयावह तस्वीर भी पेश करता है। जिस महिला को समाज में एक जिम्मेदार कार्यकर्ता और पत्नी के रूप में जाना जाता था, वही इस हत्याकांड की मुख्य साजिशकर्ता निकली।

सामान्य जीवन से शुरू हुई कहानी

शिवपुरी जिले के कराहल क्षेत्र में रहने वाले 42 वर्षीय रमाकांत पाठक एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। वे अपने सरल स्वभाव, अनुशासन और नियमित जीवन के लिए जाने जाते थे। उनकी पत्नी साधना (37 वर्ष) आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थीं। दोनों की शादी को लगभग दस वर्ष हो चुके थे। संतान न होने के बावजूद उनका दांपत्य जीवन बाहर से देखने पर सामान्य और संतुलित लगता था।

रोज की तरह रमाकांत स्कूल जाते और साधना आंगनबाड़ी केंद्र। शाम को दोनों घर लौटते और घरेलू जीवन सामान्य रूप से चलता रहता। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के अनुसार, उनके बीच कभी किसी बड़े विवाद की चर्चा नहीं सुनी गई थी।

पेट्रोल पंप से शुरू हुआ रिश्ता

कहानी ने मोड़ तब लिया जब साधना रोज़ आंगनबाड़ी जाते समय रास्ते में पड़ने वाले एक पेट्रोल पंप से अपनी स्कूटी में पेट्रोल भरवाने लगी। वहां काम करने वाला 30 वर्षीय युवक मनीष अक्सर पेट्रोल भरता था। शुरुआत में यह महज़ औपचारिक बातचीत तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे नजरें मिलने लगीं, फिर बातचीत बढ़ी और फोन नंबरों का आदान-प्रदान हो गया।

बताया गया कि साधना अक्सर केवल 100 रुपये का ही पेट्रोल भरवाती थी, ताकि बार-बार आने का बहाना बना रहे। कुछ ही समय में दोनों के बीच बातचीत रोज़ाना होने लगी और यह रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया।

दूसरे युवक की एंट्री

उसी पेट्रोल पंप पर काम करने वाला एक और युवक सतनाम (35 वर्ष) भी साधना को जानने लगा। मनीष और सतनाम आपस में अच्छे दोस्त थे। धीरे-धीरे सतनाम भी साधना की ओर आकर्षित हो गया। मनीष के माध्यम से साधना और सतनाम की भी नज़दीकियां बढ़ने लगीं।

अब हालात यह हो चुके थे कि साधना एक साथ दो युवकों के साथ संबंध में थी। वह न तो मनीष को रोक रही थी और न ही सतनाम को। मुलाकातों का तरीका बदल गया—अब होटल की जगह लंबी ड्राइव और अलग-थलग स्थानों पर मिलने का सिलसिला शुरू हो गया।

घर में बढ़ता शक और तनाव

इस दौरान साधना का व्यवहार घर में बदलने लगा। वह देर रात घर लौटती या कभी-कभी पूरी रात बाहर रहती। रमाकांत ने जब सवाल उठाए तो साधना ने उन्हें ही शक करने के लिए दोषी ठहराना शुरू कर दिया। घरेलू तनाव बढ़ने लगा।

25 दिसंबर की रात, जब साधना सो चुकी थी, रमाकांत ने संदेह के चलते उसका मोबाइल फोन चेक किया। मोबाइल में मौजूद बातचीत और तस्वीरें देखकर वह स्तब्ध रह गया। उसे पहली बार अपनी पत्नी के दोहरे जीवन का पता चला।

अगली सुबह रमाकांत ने उन नंबरों पर कॉल किया, जिससे सच्चाई और स्पष्ट हो गई। उसे मालूम पड़ा कि दोनों युवक पास के एक पेट्रोल पंप पर काम करते हैं।

साजिश का जन्म

जब मनीष और सतनाम को पता चला कि रमाकांत सच्चाई जान चुका है, तो उन्होंने तुरंत साधना को इसकी जानकारी दी। साधना समझ गई कि अब मामला हाथ से निकल सकता है। पति-पत्नी के बीच तीखा झगड़ा हुआ और रमाकांत ने तय किया कि वह खुद उन युवकों से मिलकर बात करेगा।

यहीं से एक खौफनाक साजिश ने जन्म लिया। पुलिस जांच के अनुसार, साधना ने दोनों युवकों को संदेश भेजकर कहा कि अगर रमाकांत जिंदा रहा तो उसकी बदनामी तय है। उसने कथित तौर पर हत्या के बदले उन्हें बड़ी रकम देने का वादा किया।

घटना की रात

रमाकांत को बातचीत के बहाने एक वाहन में बैठाया गया और उसे एक सुनसान इलाके की ओर ले जाया गया। वहां घटना को अंजाम दिया गया और बाद में इसे सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की गई। शव को घाटी में फेंक दिया गया ताकि कोई संदेह न हो।

घटना के बाद साधना सामान्य व्यवहार करती रही। अगले दिन वह खुद थाने पहुंची और पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई, जिससे किसी को उस पर शक न हो।

पुलिस जांच और खुलासा

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। रमाकांत का मोबाइल फोन चालू मिला, जिसकी लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस ननपुरा घाटी पहुंची और वहां से शव बरामद किया गया। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि मामला दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या का है।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालने पर आखिरी बातचीत मनीष और सतनाम से होने की पुष्टि हुई। जब पुलिस ने उन्हें बुलाने की कोशिश की तो दोनों ने फोन बंद कर लिए। यहीं से शक गहरा गया।

जांच आगे बढ़ी तो यह सामने आया कि दोनों युवक लगातार एक ही नंबर पर बात कर रहे थे—और वह नंबर साधना का था।

गिरफ्तारी और कबूलनामा

पुलिस ने साधना को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद मनीष और सतनाम को भी गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

समाज के लिए सबक

यह मामला कई सवाल खड़े करता है—क्या रिश्तों में संवाद की कमी इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है? क्या अवैध संबंधों की कीमत किसी की जान हो सकती है? और सबसे अहम, भरोसे का टूटना किस हद तक इंसान को अपराध की ओर धकेल सकता है?

कानून अपना काम करेगा और अदालत तय करेगी कि दोषियों को क्या सजा मिलेगी। लेकिन यह घटना समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि गलत फैसले और लालच किस तरह पूरे परिवारों को तबाह कर सकते हैं।