Rampur के जहांगीर ने पायल का क़त्ल करके कोसी नदी के किनारे फार्म हॉउस में दफनाया फिर 27 दिन बाद
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अध्याय 1: मोहब्बत का आगाज़ और सुनहरे ख्वाब

साल 2014 की बात है। रामपुर के ‘गंज’ थाना क्षेत्र की ‘हमाम वाली गली’ में रहने वाली 22 वर्षीय पायल (ज़ैनब) की जिंदगी में जहांगीर नाम के एक युवक का प्रवेश हुआ। जहांगीर और पायल के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गया। दोनों के परिवारों के बीच भी रजामंदी हुई और उनका रिश्ता तय हो गया।
अगले चार सालों तक, उनके बीच फोन पर घंटों बातें होती रहीं। पायल जहांगीर को अपना सर्वस्व मान चुकी थी। एक दिन बातों-बातों में पायल ने जहांगीर से पूछा, “तुम मुझसे कितना प्यार करते हो?” जहांगीर ने जवाब दिया, “बहुत सारा।” फिर उसने यही सवाल पायल से दोहराया। पायल ने भावुक होकर कहा, “मैं तुमसे इतना प्यार करती हूँ कि तुम्हारे लिए अपनी जान दे भी सकती हूँ और किसी की जान ले भी सकती हूँ।”
जहांगीर ने उस वक्त मुस्कुराते हुए कहा था, “वक्त आने पर मुकर मत जाना।” पायल ने भी चुनौती स्वीकार करते हुए कहा, “किसी दिन आज़मा कर देख लेना।” उस समय पायल को अंदाज़ा भी नहीं था कि जहांगीर वास्तव में उसे मौत के घाट उतारने की योजना बना रहा है।
अध्याय 2: दिल का बदलना और साजिश का बीज
वक्त बीतता गया, लेकिन जहांगीर का मन बदलने लगा। उसकी मुलाकात उत्तराखंड के रामनगर की एक दूसरी लड़की से हुई। धीरे-धीरे जहांगीर उस लड़की के करीब आ गया और उसने तय कर लिया कि वह पायल से नहीं बल्कि रामनगर वाली लड़की से निकाह करेगा।
जब पायल को इस बात की भनक लगी, तो वह टूट गई। उसने जहांगीर पर दबाव बनाना शुरू किया कि वह उससे ही शादी करे। पायल अपनी ज़िद पर अड़ गई— “शादी करूँगी तो सिर्फ तुमसे।” जहांगीर के लिए पायल अब एक रुकावट बन चुकी थी। उसने उसे रास्ते से हटाने के लिए एक ऐसी खतरनाक साजिश रची, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए।
अध्याय 3: वह काली शाम और खौफनाक मंजर
1 नवंबर 2018 की शाम। जहांगीर ने पायल को फोन किया और कहा कि वह उससे अकेले में मिलना चाहता है ताकि वे अपनी शादी के बारे में बात कर सकें। उसने पायल को कोसी नदी के किनारे स्थित अपने कृषि फार्म हाउस पर बुलाया।
पायल ने अपनी माँ से झूठ बोला कि वह अपनी सहेली से मिलने जा रही है। वह खुशी-खुशी घर से निकली, यह सोचकर कि आज शायद जहांगीर सब ठीक कर देगा। जहांगीर का दोस्त इमरोज उसे अपनी बाइक पर बिठाकर ले गया। रास्ते में जहांगीर भी उनके साथ हो लिया।
जैसे ही वे कोसी नदी के किनारे फार्म हाउस पहुँचे, वहाँ का माहौल देखकर पायल सहम गई। वहाँ पहले से ही जहांगीर का पिता ताहिर, उसका नौकर निसार, दोस्त इमरोज, दानिश और प्रभुजीत सिंह उर्फ सागर मौजूद थे। पायल कुछ समझ पाती, उससे पहले ही जहांगीर ने हाथ में कुल्हाड़ी उठा ली।
बिना किसी बातचीत के, जहांगीर ने कुल्हाड़ी से पायल के गले पर वार किया। उसने बेरहमी से पायल के शरीर के तीन टुकड़े कर दिए। वहां पहले से ही गड्ढा खोदकर तैयार रखा गया था। उन सभी ने मिलकर पायल की लाश को बोरे में भरकर ज़मीन में दफना दिया और ऐसे घर लौट आए जैसे कुछ हुआ ही न हो।
अध्याय 4: भाई की तड़प और पुलिस की लापरवाही
जब पायल रात भर घर नहीं लौटी, तो उसका भाई राहिल और परिवार वाले परेशान हो गए। राहिल अगले दिन गंज थाने पहुँचा। उसने पुलिस को बताया कि उसकी बहन 1 नवंबर की शाम 7 बजे से लापता है। लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस का वही पुराना ढर्रा— “जवान लड़की है, किसी के साथ भाग गई होगी।”
राहिल और उसके माता-पिता हर दिन थाने के चक्कर काटते रहे। 12 दिन बीत गए, लेकिन पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की। आखिरकार, परिवार के लगातार दबाव और विलाप को देखकर 13 नवंबर 2018 को पुलिस ने मामला दर्ज किया।
पुलिस ने जब पायल की कॉल डिटेल्स (CDR) निकाली, तो उसमें इमरोज और जहांगीर के नंबर सामने आए। पुलिस ने इमरोज को पकड़ा, लेकिन महज़ औपचारिकता निभाकर उसे जेल भेज दिया। जहांगीर के बारे में पता चला कि वह किसी पुराने मामले में अपनी ज़मानत तुड़वाकर जानबूझकर जेल चला गया है। यह उसकी साजिश का हिस्सा था ताकि उस पर शक न जाए।
अध्याय 5: अजमेर का छलावा और पुलिस का जमीर
पुलिस ने कोर्ट से जहांगीर की तीन दिन की रिमांड मांगी। रिमांड के पहले दिन जहांगीर ने पुलिस को खूब घुमाया। दूसरे दिन उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए कहा, “साहब, मैंने उसे मार दिया है और लाश राजस्थान के अजमेर में दफना दी है।”
रामपुर से अजमेर लगभग 650 किलोमीटर दूर था। पुलिस उसे लेकर अजमेर पहुँची, लेकिन वहाँ कुछ नहीं मिला। जहांगीर का मकसद सिर्फ समय बर्बाद करना था ताकि रिमांड के तीन दिन खत्म हो जाएं और वह वापस जेल की सुरक्षा में पहुँच जाए।
वापस लौटते समय पुलिस का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्हें एहसास हुआ कि एक अनपढ़ अपराधी उन्हें बेवकूफ बना रहा है। पुलिस ने सख्ती बरती, तो जहांगीर टूट गया। उसने कुबूल किया कि लाश कहीं और नहीं, बल्कि रामपुर में ही कोसी नदी के किनारे फार्म हाउस में दबी है।
अध्याय 6: 27 दिन बाद हकीकत का सामना
हत्या के 27वें दिन पुलिस जहांगीर को लेकर फार्म हाउस पहुँचे। खुदाई शुरू हुई और जो मंजर सामने आया, उसने सबके होश उड़ा दिए। बोरे के अंदर से पायल की सड़ी-गली लाश तीन टुकड़ों में बरामद हुई।
पायल के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। शहर में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा था। पुलिस ने जहांगीर के साथ-साथ उसके पिता ताहिर और बाकी साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने महज 40 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल कर दी।
अध्याय 7: अदालत का फैसला और बेशर्म मुस्कुराहट
यह मामला सात साल तक चला। आखिरकार 27 जनवरी 2026 को एडीजे प्रथम अक्षय कुमार दीक्षित की अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने जहांगीर, ताहिर, इमरोज, निसार, दानिश और प्रभुजीत सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
लेकिन इस कहानी का सबसे दुखद पहलू अदालत के बाहर देखने को मिला। जब पुलिस इन दोषियों को वैन में बिठाकर ले जा रही थी, तो उनके चेहरों पर पछतावे का एक भी निशान नहीं था। वे सभी कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे, अपनी मूंछों पर ताव दे रहे थे। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वे जेल नहीं, बल्कि किसी ओलंपिक में मेडल जीतकर आ रहे हों।
निष्कर्ष: कानून और समाज के सामने सवाल
पायल के परिवार को आज भी लगता है कि न्याय अधूरा है। उनका कहना है कि जिस बेरहमी से उनकी बेटी के टुकड़े किए गए, उसके लिए इन दरिंदों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। दोषियों की वह बेशर्म मुस्कुराहट समाज और कानून व्यवस्था के मुंह पर एक तमाचा थी।
यह कहानी हमें आगाह करती है कि अंधा विश्वास कितना घातक हो सकता है। प्यार के नाम पर अपनी जान देने का वादा करने वाली पायल को क्या पता था कि वही प्यार एक दिन कुल्हाड़ी बनकर उसके शरीर के टुकड़े कर देगा।
आज भी रामपुर की उन गलियों में जब पायल का जिक्र होता है, तो लोगों की आंखें नम हो जाती हैं और दिल में उन मुस्कुराते हुए हत्यारों के प्रति नफरत भर जाती है। परिवार ने अब उच्च न्यायालय में अपील करने का निर्णय लिया है, इस उम्मीद में कि शायद वहां से इन मूंछों पर ताव देने वाले अपराधियों को उनके किए की सही सजा मिल सके।
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