क्या 26 वर्षीय लक्ष्मी मिश्रा की यही गलती थी की वह गरीब परिवार से थी ?

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बनारस की लक्ष्मी मिश्रा की कहानी: गरीबी, रिश्ते और एक दर्दनाक अंत

बनारस शहर के कैथोर मोहनदासपुर गांव में 26 वर्षीय लक्ष्मी मिश्रा की हत्या ने पूरे इलाके को हिला दिया। यह कहानी सिर्फ एक लड़की की नहीं, बल्कि समाज की उस कड़वी सच्चाई की है जिसमें गरीबी, असमानता, रिश्तों का बोझ और सामाजिक दबाव मिलकर एक मासूम की जिंदगी को निगल जाते हैं।

1. गरीबी की छाया

लक्ष्मी मिश्रा बेहद गरीब परिवार से थी। उसके माता-पिता दिन-रात मेहनत करके अपना घर चलाते थे, लेकिन इतना भी नहीं कि बेटी को अच्छी शिक्षा या सम्मानजनक जिंदगी दे सकें। लक्ष्मी सुंदर थी, लेकिन उसकी सुंदरता उसके लिए खुशियों का कारण नहीं बनी।
गरीबी ने उसके माता-पिता को मजबूर कर दिया कि वे उसकी शादी जल्दी कर दें, ताकि एक जिम्मेदारी कम हो जाए।

2. कम उम्र में शादी

लक्ष्मी जब 19 साल की हुई तो उसके माता-पिता ने उसकी शादी एक ऐसे व्यक्ति से कर दी, जो उम्र में लगभग 20 साल बड़ा था। प्रदीप मिश्रा, 46 साल का ऑटो ड्राइवर, मेहनतकश लेकिन उम्रदराज।
शादी के बाद लक्ष्मी अपने ससुराल चली गई। शुरू-शुरू में सब ठीक था, लेकिन समय के साथ रिश्ते में दरारें आने लगीं। उम्र का फासला, सोच का अंतर, और शारीरिक-सामाजिक असंतुष्टि ने दोनों के बीच दूरी बढ़ा दी।

3. रिश्तों में दरार और अफेयर की शुरुआत

कुछ साल बाद लक्ष्मी का अपने पति प्रदीप से मन भर गया। दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते, लक्ष्मी ताने मारती—”अब तुम बूढ़े हो चुके हो।”
इसी दौरान लक्ष्मी की जिंदगी में एक नया शख्स आया। वह उसी गांव का युवक था, जिससे लक्ष्मी का अफेयर शुरू हो गया।
प्रदीप को शुरुआत में कुछ पता नहीं था, लेकिन एक दिन उसने लक्ष्मी को फोन पर उस युवक से बात करते देख लिया। उस दिन घर में जबरदस्त झगड़ा हुआ, लेकिन लक्ष्मी अपने आशिक को छोड़ने को तैयार नहीं थी।

4. बार-बार घर छोड़ना और सामाजिक दबाव

लक्ष्मी अपने आशिक के साथ दो बार घर छोड़कर भाग गई। प्रदीप हर बार उसे ढूंढकर वापस ले आता, समझाने की कोशिश करता—”समाज में हमारी बदनामी होगी, सही रास्ता चुनो।”
लेकिन लक्ष्मी पर कोई असर नहीं होता। समाज में बातें फैलने लगीं, परिवार की इज्जत दांव पर थी। प्रदीप अंदर से टूट गया, उसे डर सताने लगा कि कहीं वह समाज में मुंह दिखाने लायक भी न रह जाए।

5. हत्या की रात: एक दर्दनाक फैसला

19 दिसंबर 2025 की रात, प्रदीप ने लक्ष्मी को अपनी बहन के ससुराल जौनपुर जिले में ले गया। वहां भी झगड़ा हुआ।
गुस्से में आकर प्रदीप ने तय कर लिया कि अब लक्ष्मी को हमेशा के लिए इस दुनिया से हटा देगा।
रात 11 बजे उसने लक्ष्मी को ऑटो में बैठाया, कहा—”चाय पिलाने चलो, बाहर घूम आते हैं।” लक्ष्मी मान गई।
रास्ते में एक सुनसान जगह पर ऑटो रोककर प्रदीप ने अपने गले का गुलबन लक्ष्मी के गले में लपेटा और तब तक खींचता रहा जब तक उसकी सांसें नहीं रुक गईं।
लक्ष्मी की मौत के बाद प्रदीप ने उसकी डेड बॉडी को ऑटो में रखा, आगे जाकर एक भारी पत्थर उठाया और लक्ष्मी के चेहरे पर जोर-जोर से वार किया, ताकि पहचान न हो सके।

6. डेड बॉडी को छुपाना और पुलिस की जांच

प्रदीप ने लक्ष्मी की डेड बॉडी को कैथोर मोहनदासपुर गांव के बगीचे में बाजरे की फसल के नीचे छुपा दिया।
वह वापस अपनी बहन के घर चला गया, जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
अगली सुबह किसान दयाराम यादव ने फसल में महिला की डेड बॉडी देखी। दयाराम बोल नहीं सकता था, इसलिए इशारों में गांववालों को बताया।
गांव में सनसनी फैल गई, पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने जांच शुरू की, डेड बॉडी की पहचान मुश्किल थी क्योंकि चेहरा बिगाड़ दिया गया था।
लेकिन एक हाथ पर दिल का टैटू और पी-एल (Pradeep-Lakshmi) के अंग्रेजी लेटर ने पुलिस को सुराग दिया।

7. पुलिस की पड़ताल और सच का खुलासा

पुलिस ने लक्ष्मी की पहचान की, उसके पति प्रदीप को ढूंढना शुरू किया। मोबाइल सर्विलांस से अगले दिन प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया गया।
पहले प्रदीप ने अनजान बनने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ में टूट गया। उसने कबूल किया—”मेरी पत्नी की हत्या मैंने की है।”

प्रदीप ने पूरी कहानी बताई—शादी, अफेयर, बार-बार घर छोड़ना, समाज की बातें, और आखिरकार हत्या।
पुलिस ने पत्थर, ऑटो—सब सबूत बरामद कर लिए। प्रदीप को अदालत में पेश किया गया, जेल भेज दिया गया।

8. समाज, गरीबी और सवाल

लक्ष्मी की कहानी में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या उसकी गलती सिर्फ यही थी कि वह गरीब परिवार से थी?
अगर उसके माता-पिता अमीर होते, तो शायद उसकी शादी उम्रदराज आदमी से न होती।
अगर समाज में लड़की की पसंद मायने रखती, तो शायद उसकी जिंदगी बच जाती।
गरीबी, असमानता, रिश्तों की मजबूरी और सामाजिक दबाव ने लक्ष्मी की जिंदगी छीन ली।

9. सीख और संदेश

यह कहानी बताती है कि समाज में लड़कियों की जिंदगी कितनी नाजुक है, खासकर गरीब परिवारों की।
शादी, रिश्ते, इज्जत, अफेयर—हर चीज पर समाज की नजर है, लेकिन लड़की की खुशी, उसका अधिकार कहीं खो जाता है।
अगर परिवार, समाज और कानून समय रहते जाग जाएं, तो शायद ऐसी घटनाएं न हों।

10. अंतिम विचार

लक्ष्मी मिश्रा की मौत सिर्फ एक हत्या नहीं, समाज की सोच का भी क़त्ल है।
गरीबी, रिश्तों की मजबूरी, और सामाजिक दबाव ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली।
जरूरत है कि हम अपने आसपास की लड़कियों को समझें, उनकी भावनाओं और इच्छाओं को सम्मान दें।
हर किसी को सुरक्षित और खुश रहने का हक है—फिर चाहे वह गरीब हो या अमीर।

जय हिंद।