साल की लड़कियों 40 का पति||आज रात मर्जी कर लो कल मेरी लाश |

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बलिया, उत्तर प्रदेश।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नरसिंहपुर गाँव से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने प्रेम, त्याग और मानवीय संवेदनाओं की एक नई परिभाषा लिखी है। यह कहानी है ‘सपना’ (नाम परिवर्तित) की, जिसे उसके माता-पिता ने सामाजिक डर और गरीबी के कारण एक 40 साल के अधेड़ व्यक्ति से व्याह दिया था, लेकिन अंत में जो हुआ उसने पूरे प्रदेश को चकित कर दिया।

पृष्ठभूमि: गरीबी और समाज का डर

नरसिंहपुर गाँव के रहने वाले हरिकृष्ण और उनकी पत्नी शांति देवी की बड़ी मन्नत के बाद एक बेटी हुई, जिसका नाम उन्होंने बड़े प्यार से ‘सपना’ रखा। सपना बचपन से ही पढ़ने-लिखने में बहुत मेधावी थी। वह अपने स्कूल की टॉपर रही और उसके सपने बहुत ऊंचे थे।

जब सपना आठवीं कक्षा में थी, तब उसके जीवन में ‘विकास’ नाम के एक लड़के की प्रविष्टि हुई। विकास सपना के गाँव से करीब 10 किलोमीटर दूर रहता था और दोनों एक ही स्कूल में साथ पढ़ते थे। दोनों की उम्र लगभग 15-16 साल थी। पढ़ाई के साथ-साथ उनके बीच एक मासूम प्रेम पनपने लगा। वे एक-दूसरे की पढ़ाई में मदद करते थे और दोनों ने मिलकर शिक्षक (टीचर) बनने का सपना देखा था।

गलतफहमी और मजबूर विवाह

गाँव के कुछ लोगों को सपना और विकास का साथ बैठना और बातें करना रास नहीं आया। उन्होंने हरिकृष्ण के कान भरने शुरू कर दिए कि उनकी बेटी किसी लड़के के साथ भाग सकती है और परिवार की नाक कटवा सकती है। गरीबी और सामाजिक बदनामी के डर से हरिकृष्ण ने जल्दबाजी में सपना की शादी तय कर दी।

रिश्ता गाजीपुर के रामपुर बसंत गाँव के मोहन लाल के साथ तय हुआ। मोहन लाल की उम्र लगभग 40 वर्ष थी, वह आर्थिक रूप से समृद्ध था लेकिन उसकी पहली पत्नी की मृ-त्यु हो चुकी थी और उसकी कोई संतान नहीं थी। सपना ने विरोध किया, अपनी पढ़ाई पूरी करने की गुहार लगाई, लेकिन माता-पिता ने उसकी एक न सुनी।

सुहागरात की वो खौफनाक रात

शादी संपन्न हुई और सपना दुल्हन बनकर मोहन लाल के घर पहुँची। सुहागरात के समय जब मोहन लाल कमरे में आया, तो 15 साल की सपना थ-र-थ-र कांप रही थी। मोहन लाल ने जब उसका घूँ-घ-ट उठाया, तो उसने सपना की आंखों में प्यार नहीं बल्कि मौ-त का खौफ देखा।

सपना ने रोते हुए अपने पति से कहा, “आज की रात सब कुछ तुम्हारा है, तुम मेरे साथ जो चाहो वो श-री-रि-क सं-बं-ध (फि-जी-कल रि-ले-शन) बना सकते हो। लेकिन याद रखना, कल सुबह तुम मेरी सिर्फ ला-श देखोगे। मैं खुद को ख-त्म कर लूंगी क्योंकि मैं किसी और से प्यार करती हूँ।”

मोहन लाल का साहसिक निर्णय

सपना की बात सुनकर मोहन लाल के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह एक सुलझा हुआ व्यक्ति था। उसने सपना को सांत्वना दी और वचन दिया कि जब तक वह बालिग नहीं हो जाती और उसकी मर्जी नहीं होती, वह उसे छु-एगा तक नहीं। मोहन लाल ने सपना से पूरी सच्चाई पूछी। सपना ने विकास के बारे में सब कुछ बता दिया।

मोहन लाल ने उसी वक्त एक ऐसा फैसला लिया जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। उसने कहा, “मैं तुम्हें म-रने नहीं दूंगा। अगर तुम्हारा सुख विकास के साथ है, तो मैं तुम्हारी शादी उससे कराऊंगा।”

मंदिर में विवाह और समाज को संदेश

मोहन लाल ने उसी रात विकास को फोन किया और उसे अपने घर बुलाया। सुबह मोहन लाल ने सपना के पिता हरिकृष्ण को भी बुलाया। सबके सामने मोहन लाल ने स्वीकार किया कि यह विवाह गलत था क्योंकि सपना की उम्र बहुत कम है और उसका दिल कहीं और है।

मोहन लाल ने खुद खड़े होकर एक मंदिर में सपना और विकास की शादी करवाई। उसने सपना के पिता को फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य को सामाजिक डर की वेदी पर ब-लि नहीं चढ़ाना चाहिए।

आज की स्थिति: सपनों की उड़ान

आज सपना और विकास दोनों खुशहाल जीवन जी रहे हैं। मोहन लाल ने न केवल उनकी शादी कराई बल्कि उनकी आगे की पढ़ाई का भी समर्थन किया। आज सपना और विकास दोनों ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद सरकारी स्कूल में शिक्षक (टीचर) के रूप में कार्यरत हैं। वे मोहन लाल को अपना भगवान मानते हैं और हर सुख-दुख के मौके पर उनसे आशीर्वाद लेने जाते हैं।

निष्कर्ष: माता-पिता के लिए एक सबक

यह कहानी हमें सिखाती है कि जबरन थोपी गई शादियां केवल बर्बादी लाती हैं। मोहन लाल ने जो किया वह किसी महानता से कम नहीं है। उन्होंने एक बच्ची की जिंदगी बचाई और उसे उसके सपनों तक पहुँचाया। आज के समय में माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों की भावनाओं को समझें और उन पर नजर रखने के साथ-साथ उन्हें सही दिशा में प्रोत्साहित करें, न कि डर के कारण उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करें।