सुनहरीपुर का शैतान और कोठे का सच: एक खौफनाक साजिश
अध्याय 1: विदाई की वह सुनहरी सुबह
हिंदुस्तान के एक शांत गाँव ‘सुनहरीपुर’ में आज हलचल थी। बूढ़ा राजेश अपने इकलौते बेटे ओम को दुबई की नौकरी के लिए रुखसत कर रहा था। ओम की शादी को अभी कुछ ही महीने हुए थे। उसकी पत्नी प्रिया, जो बेहद खूबसूरत थी और खुद को एक बहादुर पुलिस अफसर बताती थी, नम आँखों से ओम को विदा कर रही थी।
ओम ने राजेश का हाथ पकड़कर कहा, “बाबा, प्रिया का ख्याल रखिएगा। यह घर में अकेली है।” राजेश के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान तैर गई। उसने ओम के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “बेटा, तू बेफिक्र रह। मैं प्रिया को बहुत प्यार दूँगा, उसे कभी अकेलेपन का अहसास नहीं होने दूँगा।” ओम अपनी बीवी को गले लगाकर गाड़ी में बैठ गया, यह सोचे बिना कि वह अपनी दुनिया किस ‘रखवाले’ के हाथ में छोड़ जा रहा है।
अध्याय 2: ससुर का बदला रूप और प्रिया का जाल
अगले ही दिन से घर का माहौल बदलने लगा। जब प्रिया ने राजेश को चाय दी, तो राजेश ने उसे पास बिठा लिया। उसने कहा, “बहू, मैं बहुत तन्हा महसूस करता हूँ। सोच रहा हूँ कि इस उम्र में दूसरी शादी कर लूँ।” प्रिया, जो मन ही मन राजेश की जायदाद पर नज़र गड़ाए बैठी थी, घबरा गई। उसे लगा कि अगर नई बीवी आई, तो सारी दौलत उसके हाथ से निकल जाएगी।
प्रिया ने चालाकी से कहा, “ससुर जी, आपको शादी की क्या ज़रूरत? मैं हूँ न आपको खुश रखने के लिए। आप जो कहेंगे, मैं वही करूँगी।” राजेश की आँखों में एक शिकारी जैसी चमक उभरी। उसने धीरे से प्रिया के कंधे पर हाथ रखा। प्रिया ने मुस्कुराकर चाय के बर्तन उठाए और रसोई में चली गई। राजेश उसे जाते हुए पीछे से देख रहा था, जैसे कोई भेड़िया अपने शिकार को देख रहा हो।
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अध्याय 3: रात का गुनाह और रहस्यमयी गुलदान
एक रात राजेश चुपके से प्रिया के कमरे की ओर बढ़ा। प्रिया आईने के सामने खड़ी अपने बाल सँवार रही थी। राजेश ने जानबूझकर गिरने का नाटक किया और प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया। प्रिया सहम गई, लेकिन उसने विरोध नहीं किया। राजेश ने अपनी घिनौनी चालें जारी रखीं।
इधर प्रिया रोज़ रात को ओम से वीडियो कॉल पर बात करती, उसे अपनी अदाओं से लुभाती और उसे यकीन दिलाती कि वह उससे बहुत प्यार करती है। लेकिन उसे नहीं पता था कि राजेश खिड़की के पीछे खड़ा होकर यह सब देख रहा था। राजेश के दिल में हसद (जलन) की आग जल रही थी।
राजेश ने एक चाल चली। वह एक ‘रिश्ते करवाने वाली’ औरत को घर लाया। प्रिया को डराने के लिए उसने कहा कि वह जल्द ही शादी कर लेगा। प्रिया डर गई और उस रात दूध का गिलास लेकर राजेश के कमरे में पहुँच गई। उसने अपना दुपट्टा गिराकर राजेश के सीने पर सिर रख दिया और कहा, “मेरे होते हुए आपको किसी और की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।” राजेश ने उसे अपने पास सुला लिया।

अध्याय 4: कोठे की तस्वीरें और कैमरे का राज
आधी रात को जब प्रिया सो गई, राजेश चुपचाप उसके कमरे में गया। उसने अलमारी के ऊपर रखे एक फूलों वाले गुलदान को उठाया। उस गुलदान के भीतर एक छोटा सा छिपा हुआ कैमरा था। राजेश ने उस कैमरे की फुटेज देखी और उसके चेहरे पर एक खौफनाक इत्मीनान फैल गया।
अगले दिन प्रिया ने एक नया ड्रामा शुरू किया। वह राजेश के पास आई और फूट-फूट कर रोने लगी। उसने इल्जाम लगाया कि राजेश ने उसका फायदा उठाया है और वह अब गर्भवती (Pregnant) है। उसने धमकी दी कि वह पूरे गाँव को यह सच बता देगी। राजेश पहले तो घबराया, फिर उसने चालाकी से कहा, “ठीक है बहू, मैं सब संभाल लूँगा। पर यह राज किसी को पता न चले।”
उसी सुबह राजेश एक दूसरी औरत को घर लाया और उसे अपनी ‘नई पत्नी’ बताया। उसने प्रिया से कहा कि अब यह औरत घर का सारा काम करेगी और प्रिया एक मालकिन की तरह रहेगी। प्रिया अपनी जीत पर खुश थी, पर वह यह नहीं जानती थी कि वह औरत असल में एक ‘लेडी डॉक्टर’ थी जिसे राजेश ने प्रिया का झूठ पकड़ने के लिए बुलाया था।
अध्याय 5: ओम की वापसी और सच का विस्फोट
प्रिया ने अपनी जायदाद की लालच में ओम को फोन किया और उसे भड़काया। उसने राजेश के साथ अपनी एक वीडियो क्लिप ओम को भेजी ताकि ओम अपने बाप का दुश्मन बन जाए। ओम आगबबूला होकर दुबई से गाँव लौटा। उसने आते ही राजेश का गिरेबान पकड़ लिया और चिल्लाया, “तुम बाप नहीं दरिंदे हो!”
राजेश शांत था। उसने ओम को एक पुराना खत और कुछ तस्वीरें थमा दीं। “बेटा, ये देखो। तुम्हारी बीवी कोई पुलिस अफसर नहीं, बल्कि एक कोठे की तवाइफ है।” तस्वीरें देखकर ओम के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। प्रिया उन तस्वीरों में एक कोठे पर ग्राहकों के बीच बैठी हँस रही थी।
राजेश ने फिर उस गुलदान वाला वीडियो चलाया। वीडियो में दिख रहा था कि प्रिया रात के अंधेरे में खिड़की से एक लड़के को अंदर बुलाती है और उसके साथ रंगरेलियां मनाती है। राजेश ने गरजकर कहा, “यह औरत सारा दिन उस आशिक से बात करती थी और तुझे सिर्फ एक बार फोन करती थी। मैंने इसके साथ झूठा रिश्ता सिर्फ इसलिए बनाया ताकि इसकी असलियत सबके सामने ला सकूँ।”
उपसंहार: अंजाम-ए-गुनाह
राजेश ने खुलासा किया कि जो ‘नई पत्नी’ वह लाया था, वह डॉक्टर थी जिसने साबित कर दिया कि प्रिया के गर्भवती होने का दावा भी एक सफेद झूठ था। ओम की आँखों में खून उतर आया। उसने प्रिया को एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा। प्रिया पैरों में गिरकर गिड़गिड़ाने लगी, “ओम! मुझे माफ कर दो!”
लेकिन ओम ने उसे धक्के देकर घर से निकाल दिया और तीन बार चिल्लाया— “तलाक! तलाक! तलाक!” राजेश ने कहा, “बेटा, इसे पुलिस को नहीं देंगे, वरना हमारी बदनामी होगी। इसकी सजा यही है कि यह वापस उसी गंदगी में जाए जहाँ से आई थी।”
ओम ने अपने बाप को गले लगा लिया और अपनी गलती की माफी माँगी। राजेश ने भारी मन से कहा, “बेटा, मैंने तुझे दुबई इसीलिए भेजा था ताकि तू इसके जादू से बाहर निकल सके। देर से ही सही, पर आज घर की सफाई हो गई।”
सुनहरीपुर की गलियों में अब प्रिया की बदनामी के चर्चे थे, और उस आलीशान घर में अब सिर्फ एक कड़वा सन्नाटा और टूटे हुए रिश्तों की यादें बाकी थीं।
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