धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर का दर्द: 45 साल की खामोशी, सौतन का दुख और वो अनकहे राज जो आज तक दुनिया से छिपे रहे
मुंबई: बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में हमने अक्सर चमकते सितारों की प्रेम कहानियों को देखा है। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की ‘बसंती-वीरु’ वाली जोड़ी को दुनिया ने सिर आंखों पर बिठाया। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक ऐसा नाम भी है जो हमेशा गुमनामी के अंधेरे में रहा— प्रकाश कौर। धर्मेंद्र की पहली पत्नी, जिन्होंने 45 सालों तक हर दर्द को पिया, हर अपमान को सहा, लेकिन अपनी गरिमा को कभी कम नहीं होने दिया। आज हम प्रकाश कौर के जीवन के उन पन्नों को पलटेंगे जिनसे अब तक पर्दा नहीं उठा था।
1. 19 साल की उम्र और वो मासूम शुरुआत
साल 1954, जब पंजाब के एक छोटे से गांव में 19 साल के धर्मेंद्र की शादी 17 साल की प्रकाश कौर से हुई। उस समय धर्मेंद्र कोई ‘ही-मैन’ नहीं थे, बल्कि एक साधारण सिख नौजवान थे जिनकी जेब खाली थी लेकिन आंखों में बड़े सपने थे। प्रकाश कौर ने उस समय धर्मेंद्र का हाथ थामा जब उनके पास कुछ भी नहीं था। उन्होंने घर संभाला, पंजाब की मिट्टी में रहकर बच्चों की परवरिश की और धर्मेंद्र को मुंबई जाकर अपनी किस्मत आजमाने की आजादी दी।
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2. सफलता की सीढ़ी और बढ़ती दूरियां
जैसे-जैसे धर्मेंद्र बॉलीवुड के बड़े सितारे बनते गए, प्रकाश कौर के हिस्से की खुशियां कम और अकेलापन बढ़ता गया। 1957 में सनी देओल, फिर विजेता, अजीता और 1969 में बॉबी देओल का जन्म हुआ। प्रकाश कौर ने अकेले दम पर चार बच्चों को पाला, जबकि धर्मेंद्र मुंबई की मायानगरी में अपनी पहचान बना रहे थे। जब 1970 के दशक में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की नजदीकियों की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनने लगीं, तब पंजाब में बैठी एक पत्नी का दिल बार-बार टूट रहा था।
3. हेमा मालिनी का प्रवेश और वो ‘भावनात्मक भूकंप’
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी का प्यार फिल्म ‘शोले’ के दौरान परवान चढ़ा। धर्मेंद्र अपनी पहली पत्नी और बच्चों को भूलकर हेमा के प्यार में इस कदर दीवाने हुए कि उन्होंने जितेंद्र और हेमा की शादी तक रुकवा दी। जब प्रकाश कौर को पता चला कि उनके पति अब किसी और के हो चुके हैं, तो उनकी दुनिया उजड़ गई। लेकिन यहां प्रकाश कौर ने जो किया, उसने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने न तो मीडिया में शोर मचाया, न ही धर्मेंद्र को तलाक दिया। उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए चुपचाप सब सहना बेहतर समझा।

4. इस्लाम कबूल करना और दूसरी शादी का जख्म
कानूनी अड़चनों के कारण धर्मेंद्र हिंदू रहते हुए दूसरी शादी नहीं कर सकते थे। इसलिए 1980 में उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाकर हेमा मालिनी से निकाह कर लिया। प्रकाश कौर के लिए यह सबसे बड़ा आघात था। जिस पति के संघर्ष में उन्होंने साथ दिया, वही अब किसी और का ‘दिलावर खान’ बन चुका था।
एक दुर्लभ इंटरव्यू में प्रकाश कौर ने कहा था, “भले ही धर्मेंद्र मेरे लिए एक अच्छे पति साबित न हुए हों, लेकिन वह एक बेहतरीन पिता हैं। हेमा मालिनी जैसी खूबसूरत औरत के सामने कोई भी पुरुष झुक सकता है।” यह बयान प्रकाश कौर की महानता और उनके अंदर छिपे गहरे दर्द को दर्शाता है।
5. शराब का नशा और वो एक फैसला जिसने सब तबाह कर दिया
कहा जाता है कि धर्मेंद्र अपनी जिंदगी के दो हिस्सों—प्रकाश कौर और हेमा मालिनी—के बीच हमेशा उलझे रहे। वह अक्सर शराब के नशे में खुद को इस तनाव से दूर करने की कोशिश करते थे। दिन हेमा के साथ बीतता और रातें प्रकाश कौर के घर। इस दोहरी जिंदगी ने न केवल प्रकाश कौर को मानसिक पीड़ा दी, बल्कि उनके बड़े बेटे सनी देओल के मन में हेमा मालिनी के प्रति गहरी नफरत पैदा कर दी। सनी देओल आज भी अपनी मां के आंसुओं का जिम्मेदार हेमा मालिनी को ही मानते हैं।
6. 45 साल का अकेलापन और अंतिम विदाई का परायापन
आज 45 साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रकाश कौर का दर्द कम नहीं हुआ। धर्मेंद्र के निधन (24 नवंबर 2025) के बाद भी दोनों परिवारों की दूरियां कम नहीं हुईं। शोक सभाएं अलग-अलग हुईं और हेमा मालिनी को एक बार फिर अहसास कराया गया कि वह इस परिवार के लिए ‘बाहरी’ हैं।
प्रकाश कौर की खामोशी आज भी एक सवाल है। उन्होंने कभी हेमा मालिनी को बुरा-भला नहीं कहा, लेकिन उनकी आंखों की नमी सब कुछ बयां कर देती है। एक तरफ ‘ड्रीम गर्ल’ का रुतबा था, तो दूसरी तरफ एक ‘त्यागमयी पत्नी’ का धैर्य।
निष्कर्ष: क्या यह प्यार था या धोखा?
धर्मेंद्र ने हेमा से शादी तो की, लेकिन प्रकाश कौर को कभी छोड़ नहीं पाए। उन्होंने दोनों को अलग-अलग घर दिए, लेकिन किसी को भी पूरा हक नहीं दे सके। प्रकाश कौर ने अपनी पूरी जिंदगी त्याग और खामोशी के नाम कर दी। वह आज भी बॉलीवुड के इतिहास की सबसे ‘मजबूत और खामोश’ महिला मानी जाती हैं।
आप प्रकाश कौर, धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के इस त्रिकोणीय रिश्ते के बारे में क्या सोचते हैं? क्या धर्मेंद्र का फैसला सही था? हमें कमेंट में जरूर बताएं।
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