देखिए.. जिंदा बेटी का श्मशानघाट में अंतिम संस्कार
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सविता का संघर्ष
प्रारंभ
कानपुर जिले के कल्याणपुर में एक साधारण परिवार में सविता कुशवाहा अपने माता-पिता और छोटे भाई के साथ रहती थी। सविता 23 साल की थी, एक महत्वाकांक्षी लड़की, जो अपनी पढ़ाई में बहुत अच्छी थी। उसके माता-पिता ने हमेशा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था। लेकिन सविता का दिल किसी और में बस गया था। उसका प्रेमी संजू मालवीय एक साधारण लड़का था, जो उसके मोहल्ले में ही रहता था। दोनों के बीच प्यार गहरा था, और उन्होंने एक साथ जीवन बिताने का फैसला किया।
भागने का निर्णय
एक दिन, सविता और संजू ने तय किया कि वे घर से भाग जाएंगे। सविता ने सोचा कि यह उनके लिए एक नया जीवन शुरू करने का सही समय है। उसने अपने माता-पिता को बिना बताए संजू के साथ भागने का निर्णय लिया। यह निर्णय उसके लिए आसान नहीं था, लेकिन प्यार की गर्मी ने उसे मजबूर कर दिया।
जब उसके परिवार को पता चला कि सविता भाग गई है, तो वे बेताब हो गए। उन्होंने तुरंत पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। कुछ दिनों के बाद, पुलिस ने सविता को संजू के साथ पकड़ लिया और थाने में बुलाया।
थाने में मुलाकात
जब सविता के माता-पिता थाने पहुंचे, तो उन्होंने अपनी बेटी को देखकर राहत की सांस ली। लेकिन सविता ने अपने माता-पिता से कहा कि वह घर नहीं लौटेगी। वह अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती थी। यह सुनकर उसके माता-पिता का गुस्सा और भी बढ़ गया।
“तुमने हमारे परिवार की इज्जत को गिरा दिया है!” उसके पिता ने गुस्से में कहा। सविता ने अपनी पसंद पर अडिग रहते हुए कहा, “मैं अपने जीवन का निर्णय खुद लूंगी। मैं संजू के साथ रहना चाहती हूं।”

परिवार का निर्णय
सविता के माता-पिता ने उसे मरा हुआ मान लिया। उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंची थी। उन्होंने तय किया कि अगर उनकी बेटी ने ऐसा किया है, तो वह उनके लिए मर चुकी है। परिवार ने एक शव यात्रा निकालने का निर्णय लिया।
सविता के पुतले को तैयार किया गया और पूरे मोहल्ले में शव यात्रा निकाली गई। रिश्तेदार, पड़ोसी और मोहल्ले के लोग इस शव यात्रा में शामिल हुए। सबने मिलकर अर्थी सजाई और श्मशान घाट तक ले गए। यह सब देखकर सविता के दिल में एक अजीब सा दर्द हुआ। वह अपने परिवार की भावनाओं को समझती थी, लेकिन वह अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती थी।
श्मशान घाट की यात्रा
श्मशान घाट पर पहुंचकर परिवार ने अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं। सविता अपने परिवार के साथ वहां खड़ी थी, लेकिन कोई उसे देख नहीं रहा था। उसकी आंखों में आंसू थे। उसने अपने परिवार को देखा, जो उसकी मौत का शोक मना रहा था।
“मैं जिंदा हूं!” वह चिल्लाना चाहती थी, लेकिन उसके गले से आवाज नहीं निकली। वह चाहती थी कि उसके परिवार को उसकी सच्चाई पता चले, लेकिन वह जानती थी कि इस समय उनकी सोच बदलना आसान नहीं होगा।
सविता का संघर्ष
सविता ने संजू के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत की। लेकिन उसके मन में अपने परिवार के लिए एक गिल्टी की भावना थी। वह जानती थी कि उसके परिवार ने उसे मरा हुआ मान लिया है।
वह अक्सर अपने परिवार के बारे में सोचती थी। उसे अपने माता-पिता की चिंता थी। उसने संजू से कहा, “मैं अपने परिवार को बताना चाहती हूं कि मैं जिंदा हूं।”
संजू ने उसे समझाया, “अगर तुम उन्हें बताओगी, तो वे तुम्हें वापस घर ले जाएंगे। क्या तुम वहां जाना चाहोगी?”
सविता ने सिर झुका लिया। वह जानती थी कि वह अपने परिवार को नहीं छोड़ सकती, लेकिन वह अपने प्यार को भी नहीं छोड़ना चाहती थी।
परिवार की प्रतिक्रिया
कुछ समय बाद, सविता के माता-पिता ने उसके बारे में सुना। उन्हें पता चला कि वह जिंदा है और संजू के साथ रह रही है। यह सुनकर उनके दिल में गुस्सा और दुख दोनों थे।
“हमारी बेटी ने हमें धोखा दिया है,” उसके पिता ने कहा। “हमने उसे मरा हुआ मान लिया था, लेकिन वह तो जिंदा है। हमें उसे वापस लाना होगा।”
उन्होंने पुलिस को बुलाया और सविता को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन सविता और संजू ने एक बार फिर भागने का फैसला किया।
नया जीवन
सविता और संजू ने एक नया जीवन शुरू किया। उन्होंने एक छोटे से शहर में जाकर रहने का फैसला किया। वहां उन्होंने एक नया नाम और पहचान बनाई। सविता ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और संजू ने काम करना शुरू किया।
लेकिन सविता के मन में अपने परिवार की यादें हमेशा बनी रहीं। वह जानती थी कि उसने अपने परिवार को दुखी किया है। लेकिन उसने अपने प्यार को भी नहीं छोड़ा।
अंत में
कई महीनों बाद, सविता ने अपने माता-पिता से मिलने का फैसला किया। उसने सोचा कि शायद अब वे उसे माफ कर देंगे। उसने संजू से कहा, “मैं अपने परिवार से मिलना चाहती हूं। मुझे लगता है कि उन्हें मेरी जरूरत है।”
संजू ने उसे समझाया, “लेकिन वे तुम्हें वापस घर नहीं आने देंगे। तुम क्या करोगी?”
सविता ने दृढ़ता से कहा, “मुझे अपने परिवार का सामना करना होगा। मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि मैं जिंदा हूं और खुश हूं।”
परिवार से मिलन
सविता अपने माता-पिता के घर गई। उसने दरवाजा खटखटाया। उसके माता-पिता ने दरवाजा खोला और उन्हें देखकर हैरान रह गए।
“सविता!” उसकी मां चिल्लाई। “तुम जिंदा हो?”
सविता ने कहा, “हाँ, माँ। मैं जिंदा हूं और खुश हूं। मैं संजू के साथ रह रही हूं। मैं तुमसे माफी मांगती हूं। मैंने तुम्हें दुखी किया।”
उसके पिता ने कहा, “तुमने हमें धोखा दिया है। तुमने हमारे परिवार की इज्जत को गिरा दिया है।”
सविता ने कहा, “मैंने ऐसा नहीं किया। मैंने अपने लिए एक नया जीवन चुना है। कृपया मुझे माफ कर दो।”
निष्कर्ष
सविता के माता-पिता ने उसे माफ कर दिया, लेकिन उन्होंने उसे यह भी कहा कि उसे अपने परिवार की इज्जत का ध्यान रखना चाहिए। सविता ने समझा कि प्यार और परिवार दोनों महत्वपूर्ण हैं।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि कभी-कभी हमें अपने परिवार की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन प्यार भी एक महत्वपूर्ण भावना है। सविता ने अपने परिवार को माफ किया और एक नया जीवन शुरू किया।
यह कहानी एक संघर्ष और प्यार की है, जिसमें सविता ने अपने परिवार और प्रेम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की।
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