Gopalganj Thawe Bhawani Mandir का चोर पकड़ा गया, फिल्में देखकर बना प्लान, SIT ने ऐसे दबोचा

प्रस्तावना

बिहार के गोपालगंज जिले का प्रसिद्ध थावे भवानी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां हर दिन हजारों भक्त मां दुर्गा के दर्शन करने आते हैं। लेकिन दिसंबर 2025 में इस मंदिर की पवित्रता को ठेस पहुंची जब एक सुनियोजित चोरी की घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। करीब 1.8 करोड़ रुपये के आभूषण और दान पेटी मंदिर से गायब हो गए। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए, बल्कि मंदिर सुरक्षा व्यवस्था को भी कठघरे में ला खड़ा किया। आइए, इस घटना की पूरी कहानी, जांच, और समाज के लिए इसके संदेश को विस्तार से जानें।

चोरी की रात: कैसे हुआ वारदात का अंजाम

17 दिसंबर 2025 की रात थी। मंदिर परिसर में सामान्य शांति थी। भक्तों के जाने के बाद मंदिर के गर्भगृह में मां दुर्गा की प्रतिमा, सोने-चांदी के हार, मुकुट, कीमती आभूषण और दान पेटी सुरक्षित रखे गए थे। लेकिन इसी रात दो चोरों ने मंदिर परिसर में घुसकर बड़ी चोरी को अंजाम दिया।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मंदिर के पीछे बन रहे एक मकान से रस्सी के सहारे मंदिर परिसर में दाखिल हुए। उन्होंने गर्भगृह में घुसकर मां दुर्गा की प्रतिमा से सोने-चांदी के हार, लॉकर में रखा मुकुट, अन्य कीमती आभूषण और लगभग 50 किलो वजनी दान पेटी उठा ली। चोरी के बाद आरोपी गांव के रास्ते से होते हुए अपने घर लौट गए।

चोरी किए गए सामान की अनुमानित कीमत लगभग 1.8 करोड़ रुपये आंकी गई। यह घटना इतनी बड़ी थी कि पूरे जिले में हड़कंप मच गया। श्रद्धालुओं में आक्रोश था, प्रशासन पर सवाल उठ रहे थे।

चोरी की प्लानिंग: फिल्में, इंटरनेट और रेकी

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि यह चोरी अचानक नहीं, बल्कि महीनों की प्लानिंग का नतीजा थी। मुख्य आरोपी दीपक राय उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमनिया थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसने चोरी से पहले कई क्राइम थ्रिलर फिल्में देखीं, Google और YouTube के जरिए थावे भवानी मंदिर की जानकारी जुटाई।

दीपक ने ऑनलाइन सर्च के जरिए मंदिर का स्ट्रक्चर, गर्भगृह, मां दुर्गा के मुकुट और आभूषणों की डिटेल्स निकाली। 10 और 11 दिसंबर की रात वह खुद मंदिर पहुंचा और फाइनल रेकी की। उसने तय किया कि कहां से घुसना है, गर्भगृह तक कैसे पहुंचना है, और चोरी के बाद बाहर निकलने का रास्ता कौन सा होगा।

चोरी के बाद भी दीपक लगातार सोने और आभूषणों की कीमत से जुड़ी जानकारी सर्च करता रहा। उसके मोबाइल फोन में थावे मंदिर से जुड़ी पूरी सर्च हिस्ट्री मिली है। पुलिस ने बरामद सामानों में रड कटर, चोरी के समय पहने कपड़े, मोबाइल फोन, बाइक और बैग भी शामिल किया।

पुलिस जांच और आरोपी की गिरफ्तारी

घटना के बाद पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव था। पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए 12 विशेष जांच टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में लगातार छापेमारी की। तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल सर्विलांस के आधार पर जांच टीम गाजीपुर जिले तक पहुंची।

यहां से देवानंद राय के बेटे दीपक राय को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान दीपक ने चोरी की वारदात में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली। पुलिस जांच में सामने आया कि दीपक एक पेशेवर मंदिर चोर है और पहले भी कई मंदिरों में चोरी कर चुका है। मार्च 2025 में उसने मध्य प्रदेश के महू जिले के शीतला माता मंदिर में चोरी की थी, जिसके बाद वह जेल गया था और 13 नवंबर 2025 को जेल से बाहर आया।

जेल से छूटते ही दीपक ने फिर से मंदिरों को निशाना बनाने की योजना बनाई। उसने पुणे के एक बड़े मंदिर की भी रेकी शुरू कर दी थी। पुलिस के अनुसार दीपक हमेशा मंदिरों को ही अपना निशाना बनाता था और चोरी से जुड़ी फिल्मों को देखता रहता था।

अपराध की तकनीक और डिजिटल साक्ष्य

दीपक राय ने चोरी की प्लानिंग में टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल किया। उसने Google और YouTube पर मंदिर की रेकी, आभूषणों की डिटेल्स, और पुलिस जांच के तरीके तक सर्च किए। पुलिस ने बताया कि दीपक जेल में रहते हुए भी कई मंदिरों की जानकारी जुटाता था। उसने बिहार आधारित एक फिल्म भी देखी थी जिसमें पुलिस अनुसंधान की प्रक्रिया दिखाई गई थी।

चोरी के दिन दीपक ने मोबाइल साथ नहीं रखा ताकि कोई डिजिटल फुटप्रिंट न रहे। रेकी के दौरान भी उसने यह सुनिश्चित किया कि उसके मोबाइल से कोई लोकेशन ट्रैक न हो सके। इससे साफ जाहिर होता है कि आरोपी बेहद शातिर और पेशेवर था।

प्रशासन की लापरवाही और जवाबदेही

इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन की लापरवाही सामने आई। एसपी ने स्वीकार किया कि प्रशासन और पुलिस के स्तर से चूक हुई थी। टीओपी प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई। एसपी ने कहा, “जिम्मेदारी हम लोग लेते हैं एज ए पुलिस अधीक्षक। घटना संवेदनशील थी, इसलिए 12 के आसपास टीम्स अलग-अलग बिंदुओं पर काम कर रही थीं।”

स्थानीय लोगों और मंदिर प्रशासन की भूमिका की भी जांच की गई, लेकिन कोई संलिप्तता सामने नहीं आई। सभी डिटेन किए गए स्थानीय लोगों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।

संगठित गिरोह और अन्य मामलों में संलिप्तता

पुलिस जांच में पता चला कि दीपक राय खुद अपने आप में एक संगठित गिरोह चलाता है। अलग-अलग घटना के लिए अलग-अलग लोगों को कन्विंस करता है, जिनको पैसे की जरूरत होती है। अब तक पांच मामलों में उसकी संलिप्तता पाई गई है—बनारस में बाइक चोरी, महू में मंदिर चोरी, और कई अन्य मंदिरों में चोरी।

दीपक ने चोरी किए गए आभूषण अपने पास नहीं रखे थे, बल्कि अपने साथी को सौंप दिए थे ताकि पकड़े जाने की स्थिति में उसके पास से कोई बरामदगी न हो सके। पुलिस अब दूसरे आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है और उम्मीद है कि जल्दी ही चोरी किए गए आभूषण भी बरामद कर लिए जाएंगे।

स्थानीय माहौल और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

थावे भवानी मंदिर में हुई चोरी ने श्रद्धालुओं के मन में आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की। स्थानीय लोग पुलिस प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। जिले में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर फिर से विचार हो रहा है।

समाज के लिए संदेश और निष्कर्ष

यह घटना केवल एक मंदिर चोरी का मामला नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती अपराध प्रवृत्ति और टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग का उदाहरण है। पेशेवर अपराधी अब इंटरनेट, फिल्मों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर बड़े अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह अपनी जांच प्रक्रिया को और आधुनिक बनाए, टेक्निकल साक्ष्यों पर ज्यादा ध्यान दे, और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।

इस घटना से यह भी सीख मिलती है कि प्रशासनिक लापरवाही कितनी बड़ी समस्या बन सकती है। पुलिस को चाहिए कि वह समय रहते सतर्क रहे और अपराधियों की रणनीति को समझे। स्थानीय लोगों को भी चाहिए कि वे अपने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें।

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