जब नीले ड्रम में मिली पुलिस ऑफिसर की लाश, थाने में मच गया हड़कंप || Crime patrol || New episode ||

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नीले ड्रम का रहस्य

जब एक लाश ने कई जिंदगियों के गुनाह उजागर कर दिए

बरसात के बाद की उमस भरी दोपहर थी। विरार की उस पुरानी बस्ती में अजीब सी बेचैनी फैली हुई थी। उस्मान शेख का पुराना मकान—जो पिछले दो महीने से किराएदारों के बदलते खेल का गवाह बन चुका था—आज पुलिस की गाड़ियों से घिरा हुआ था।

घर के अंदर एक कमरे में पड़ा था नीला प्लास्टिक ड्रम

ड्रम खुलते ही हवा में ऐसी बदबू फैली कि अनुभवी पुलिसकर्मी भी पल भर को पीछे हट गए।

“सर… बॉडी पूरी तरह सड़ चुकी है,” फॉरेंसिक अफसर ने नाक पर रूमाल रखते हुए कहा।
“नमक डाला गया है, ताकि बदबू बाहर न आए।”

एसआई वृंदा देशमुख ने ड्रम के अंदर झांका।

वो पल… जिसने उसके जीवन की दिशा ही बदल दी।

“सर,” डॉक्टर की आवाज कांप रही थी,

“ये बॉडी किसी लड़की या औरत की है।”


अध्याय 1: एक बंद कमरा, कई किराएदार

मकान मालिक उस्मान शेख घबराया हुआ था।

“साहब… ये कमरा दो महीने से बंद था। चाबी मेरे पास नहीं थी। शिंदे फैमिली जब घर खाली करके गई, तब ताला लगाकर गई थी।”

लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं थी।

पहले शिंदे फैमिली,
फिर काले फैमिली,
फिर कुछ दिनों के लिए पाटिल फैमिली,
और फिर—घर खाली।

“इतने लोगों के आने-जाने के बावजूद,” वृंदा ने सवाल किया,
“किसी को बदबू नहीं आई?”

उस्मान की आंखें झुक गईं।

“नमक डाला गया था मैडम… बदबू दबाने के लिए।”


अध्याय 2: पाटिल फैमिली की जल्दबाज़ी

जांच में सबसे पहले शक गया अनिल पाटिल और उसकी पत्नी सुषमा पर।

उन्होंने उस कमरे का ताला पड़ोसन कमला के सामने तुड़वाया था—बिना उस्मान का इंतजार किए।

“सर,” एक सिपाही बोला,
“इतनी जल्दी क्यों थी इन्हें? अगर कुछ छुपा नहीं होता, तो उस्मान का इंतजार करते।”

वृंदा को भी यही खटक रहा था।

“नज़र रखो इन पर,” उसने आदेश दिया।

लेकिन तब तक…
अनिल और सुषमा फरार हो चुके थे।


अध्याय 3: ड्रम की लाश—पहचान का संकट

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई।

उम्र: 23–24 साल

शरीर पर 7 बार चाकू से वार

मौत: 45–60 दिन पहले

मतलब हत्या जून के आखिरी हफ्ते या जुलाई के पहले हफ्ते में हुई थी।

“सर,” एक कॉन्स्टेबल बोला,
“इससे पहले उस घर में काले फैमिली रहती थी।”

नाम सामने आया—पल्लवी काले


अध्याय 4: पल्लवी की अधूरी शिकायत

फिराल पुलिस स्टेशन की फाइलें खंगाली गईं।

दो महीने पहले पल्लवी काले ने शिकायत दर्ज कराई थी—

“मेरे ससुराल वाले दहेज के लिए मुझे मारते हैं।
केरोसिन डालकर जलाने की कोशिश की गई।”

उस दिन…
पुलिस ऑफिसर वृंदा देशमुख ने काले फैमिली को चेतावनी देकर छोड़ दिया था।

“अगर आज के बाद इसे हाथ लगाया,”
वृंदा ने सख्ती से कहा था,
“तो तीनों जेल से जिंदगी भर बाहर नहीं आओगे।”

लेकिन पल्लवी ने केस आगे नहीं बढ़ाया।

और कुछ ही दिनों बाद…
वो गायब हो गई।


अध्याय 5: एक और नाम—मिताली

जांच आगे बढ़ी तो एक और नाम उभरा—

मिताली शिंदे

वो शिंदे फैमिली की बहू थी।
अनाथ थी।
घरों में झाड़ू-पोछा कर के परिवार पालती थी।

मोहल्ले वालों ने बताया—

“उसके साथ भी बहुत मारपीट होती थी।
उसके साथ गलत काम भी हुआ था।”

लेकिन मिताली भी…
अचानक गायब हो गई।

अब सवाल था—

ड्रम में मिली लाश पल्लवी की है या मिताली की?


अध्याय 6: भागते हुए चेहरे

हाईवे पुलिस से सूचना आई—

“सर, अनिल पाटिल और सुषमा कोल्हापुर जाते ट्रक में देखे गए हैं।”

पूरे महाराष्ट्र में नाके बंद कर दिए गए।

आखिरकार दोनों पकड़े गए।

पूछताछ में जो सामने आया…
वो एक और खौफनाक सच्चाई थी।


अध्याय 7: अजित जयकर की मौत

सुषमा रोते हुए बोली—

“सर… मेरी शादी अजित जयकर से हुई थी।
वो गुंडा था… मुझे मारता था।”

अनिल और सुषमा भागने की तैयारी में थे,
जब अजित उन्हें ढूंढते हुए उस्मान के उसी कमरे तक पहुंच गया।

झगड़ा हुआ।
अजित पर हमला हुआ।

“हमने उसे मारा नहीं था सर,”
अनिल बोला,
“बस बेहोश हुआ था।”

लेकिन डर के मारे…
उसकी लाश उसी कमरे में छुपा दी गई।

और वहीं…
उन्हें पहले से एक और लाश मिली—ड्रम में।


अध्याय 8: जंगल में एक और शव

कुछ दिन बाद जंगल में एक और सड़ी हुई लाश मिली।

पहचान हुई—

सूरज यादव
पल्लवी का कथित प्रेमी।

मतलब अब तस्वीर और उलझ चुकी थी।

तीन लाशें।
चार संदिग्ध परिवार।
एक नीला ड्रम।


अध्याय 9: डीएनए का सच

आखिरकार डीएनए रिपोर्ट आई।

ड्रम में मिली लाश—
पल्लवी काले की थी।

जंगल में मिली लाश—
सूरज यादव की थी।

अब सिर्फ एक सवाल बचा था—

पल्लवी और सूरज को मारा किसने?


अध्याय 10: असली कातिल—उस्मान शेख

जांच की सारी कड़ियां जुड़ीं—और पहुंचीं एक नाम पर।

उस्मान शेख।

उस्मान ने टूटते हुए कबूल किया—

“मैंने अपने बेटे को बचाने के लिए किया साहब…”

उसका बेटा सोहेल,
नशे और औरतों की लत में डूब चुका था।

वृंदा देशमुख उसके पास मदद मांगने आई थी।

सोहेल ने उसके साथ बलात्कार किया।

और जब वृंदा पुलिस स्टेशन जाने लगी…

उस्मान ने उसे बहला-फुसलाकर सुनसान जगह ले जाकर मार डाला।

उसके बाद—

वृंदा की लाश सूटकेस में

पल्लवी की लाश ड्रम में

सूरज की लाश जंगल में

एक के बाद एक गुनाह…
सब एक गुनाह छुपाने के लिए


अध्याय 11: देर से मिला न्याय

जब सब सामने आया—

पूरा थाना सन्न रह गया।

जिस पुलिस ऑफिसर ने पल्लवी को बचाने की कोशिश की थी,
वही खुद शिकार बन गई थी।

उस्मान और उसका बेटा गिरफ्तार हुए।


अंतिम संदेश

इस केस ने एक सवाल छोड़ दिया—

जब माता-पिता अपने बच्चों की गलतियों पर पर्दा डालते हैं,
तो वो सिर्फ अपराधी नहीं बनाते…
वो कई मासूम जिंदगियों की कब्र खोदते हैं।

सतर्क रहें।
सुरक्षित रहें।