डोसा किंग का ‘डेथ वारंट’: अर्श से फर्श तक सरवणा भवन के मालिक की वो सनसनीखेज दास्तान, जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया

चेन्नई | विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

कहते हैं कि इंसान की किस्मत उसके कर्मों से बनती है, लेकिन जब वही इंसान अंधविश्वास और वासना की बेड़ियों में जकड़ जाए, तो करोड़ों का साम्राज्य भी उसे कलंक से नहीं बचा पाता। यह कहानी है तमिलनाडु के एक साधारण किसान के बेटे पिचाई राजगोपाल की, जिसे दुनिया ‘डोसा किंग’ के नाम से जानती थी। एक ऐसा व्यक्ति जिसने ‘सरवणा भवन’ के नाम से दक्षिण भारतीय खाने को सात समंदर पार पहुँचाया, लेकिन एक ज्योतिषी की भविष्यवाणी और एक 22 साल की लड़की की चाहत ने उसे ‘सलाखों’ के पीछे पहुँचा दिया।

शून्य से शिखर: प्याज के खेतों से ‘सरवणा भवन’ तक

5 अगस्त 1947, भारत की आजादी से ठीक 10 दिन पहले तमिलनाडु के पुनाईडी गांव में राजगोपाल का जन्म हुआ। पिता प्याज की खेती करते थे, लेकिन राजगोपाल की आँखों में बड़े सपने थे। गरीबी से तंग आकर उन्होंने पढ़ाई छोड़ी और चेन्नई (तब मद्रास) चले आए। शुरुआती दिनों में उन्होंने होटलों में बर्तन धोए और चाय बनाई।

मेहनत रंग लाई और 1968 में उन्होंने ‘मुरगन स्टोर’ नाम की एक किराने की दुकान खोली। लेकिन राजगोपाल की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट तब आया जब एक ज्योतिषी ने उनसे कहा— “किराने की दुकान छोड़ो, आग से जुड़ा काम (होटल) करो, तभी चमकोगे।” 14 दिसंबर 1981 को उन्होंने ‘सरवणा भवन’ का पहला रेस्टोरेंट खोला। नारियल के तेल में पका खाना, घर जैसा स्वाद और कम कीमत। देखते ही देखते राजगोपाल ‘डोसा किंग’ बन गए। साल 2019 तक दुनिया भर में उनके 125 से ज्यादा आउटलेट खुल चुके थे, जिनमें अमेरिका, लंदन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल थे।

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अंधविश्वास का जाल: ‘तीसरी शादी’ और ज्योतिषी की भविष्यवाणी

राजगोपाल का बिजनेस जितना बढ़ रहा था, उनका अंधविश्वास उतना ही गहरा होता जा रहा था। उनकी दो शादियाँ विफल हो चुकी थीं। तभी उनके ज्योतिषी ने एक ऐसी सलाह दी जिसने उनकी बर्बादी की पटकथा लिख दी। ज्योतिषी ने कहा— “अगर तुम तीसरी शादी करोगे, तो तुम्हारा साम्राज्य अजेय हो जाएगा और तुम दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बनोगे।”

राजगोपाल की नजर अपनी ही एक शाखा के असिस्टेंट मैनेजर की 22 साल की बेटी जीवा ज्योति पर पड़ी। जीवा ज्योति सुंदर थी और राजगोपाल उस पर मोहित हो गए। उस समय राजगोपाल की उम्र 51 साल थी।

प्रिंस शांतकुमार: प्यार के रास्ते का ‘कांटा’

जीवा ज्योति राजगोपाल की दौलत से प्रभावित नहीं थी। उसने 1998 में अपनी पसंद के एक मैथ्स टीचर प्रिंस शांतकुमार से लव मैरिज कर ली थी। जब जीवा ज्योति अपनी ट्रैवल एजेंसी के लिए मदद मांगने राजगोपाल के पास गई, तो राजगोपाल ने इसे मौके के तौर पर देखा। उन्होंने जीवा को महंगे तोहफे भेजने शुरू किए और उसे प्रिंस को छोड़ने का दबाव बनाया।

राजगोपाल ने प्रिंस से साफ कहा— “जीवा को छोड़ दो, वरना अंजाम बुरा होगा।” डर के मारे यह कपल चेन्नई से भाग गया, लेकिन राजगोपाल के गुंडों ने उन्हें ढूंढ निकाला।

कोडाईकनाल के जंगलों में ‘खूनी खेल’

24 अक्टूबर 2001 को राजगोपाल के गुंडों ने प्रिंस शांतकुमार का अपहरण कर लिया। उन्हें चेन्नई से 300 मील दूर कोडाईकनाल की पहाड़ियों में ले जाया गया। 31 अक्टूबर 2001 को प्रिंस की लाश जंगल में मिली। पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ कि प्रिंस की गला घोंटकर हत्या की गई थी।

जीवा ज्योति ने हिम्मत नहीं हारी। उसने सीधे ‘डोसा किंग’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हालाँकि शुरुआत में पुलिस ने राजगोपाल के रसूख के कारण केस दबाने की कोशिश की, लेकिन मीडिया के दबाव और जीवा ज्योति की कोर्ट में गुहार के बाद राजगोपाल को सरेंडर करना पड़ा।

18 साल की कानूनी जंग: कानून के हाथ लंबे हैं

राजगोपाल ने अपनी दौलत और वकीलों की फौज के दम पर सालों तक जेल जाने से बचने की कोशिश की।

2004: सेशन्स कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई।

2009: मद्रास हाईकोर्ट ने सजा बढ़ाकर ‘उम्रकैद’ कर दी।

2019: सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा और उन्हें जेल जाने का आदेश दिया।

हैरानी की बात यह है कि 2001 से 2019 के बीच राजगोपाल ज्यादातर समय ‘मेडिकल ग्राउंड’ पर जमानत पर बाहर रहे। उनका बिजनेस फलता-फूलता रहा, लेकिन जीवा ज्योति के जख्म हरे रहे।

9 दिन की जेल और ‘डोसा किंग’ का अंत

9 जुलाई 2019 को 71 साल के राजगोपाल ऑक्सीजन मास्क पहनकर एम्बुलेंस में सरेंडर करने पहुँचे। जेल जाने के महज 4 दिन बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और 18 जुलाई 2019 को अस्पताल में उनकी मौत हो गई। 18 साल तक जिस न्याय का इंतजार जीवा ज्योति कर रही थी, वह राजगोपाल की मौत के साथ खत्म हुआ। राजगोपाल ने अपनी पूरी उम्रकैद में से केवल 8 दिन जेल में बिताए।

निष्कर्ष: कर्मों का हिसाब

पिचाई राजगोपाल की कहानी एक महान उद्यमी के पतन की कहानी है। वह व्यक्ति जो अपने हजारों कर्मचारियों के लिए ‘अन्नाची’ (बड़ा भाई) था, अपनी वासना और अंधविश्वास के कारण एक ‘कातिल’ बनकर मरा। सरवणा भवन आज भी चल रहा है, डोसा आज भी बिक रहा है, लेकिन उसके संस्थापक का नाम हमेशा एक ऐसी मिस्ट्री के साथ जुड़ा रहेगा जिसने प्यार और भरोसे का कत्ल किया।


उपसंहार: जीवा ज्योति आज एक सफल ब्राइडल डिजाइनर हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि एक आम लड़की भी सत्ता और पैसे के अहंकार को घुटनों पर ला सकती है।