दामाद बेटी को रखना नही चाहता था / ये कहानी हकीमपुर की हैं

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रिश्तों का क-त्ल: हकीमपुर में दामाद की घिनौनी करतूत और सास का ‘खौ-फ-नाक’ इंसाफ; वासना की आग में जलकर राख हुआ एक परिवार

हकीमपुर, उत्तर प्रदेश।

उत्तर प्रदेश के एक शांत गाँव हकीमपुर में हाल ही में एक ऐसी घटना घटी, जिसने माँ-बेटी और दामाद के पवित्र रिश्तों को स-र-म-सा-र कर दिया है। एक तरफ जहाँ दामाद ने अपनी सास पर ही अपनी गंदी नजरें डालीं, वहीं दूसरी तरफ अपनी बेटी के सुहाग को बचाने की कोशिश में एक माँ खुद खु-नी बन गई। यह कहानी वासना, धोखे और अंततः एक मृ-त्यु के तांडव की है।

1. खुशहाल परिवार और एक श-रा-बी दामाद

कहानी की शुरुआत हकीमपुर गाँव के रहने वाले वीरेंद्र और उनकी पत्नी शांति (नाम परिवर्तित) से होती है। शांति एक बेहद खूबसूरत और घरेलू महिला थी, जो अपने पति के साथ सुख-शांति से रहती थी। उनकी एक इकलौती बेटी थी, कीर्ति, जिसकी शादी कुछ साल पहले किशन नाम के युवक से हुई थी।

ऊपर से देखने में सब ठीक था, लेकिन कीर्ति का वैवाहिक जीवन न-र-क बन चुका था। उसका पति किशन एक आवारा और नि-क-म्मा इंसान था। वह दिन भर अपने श-रा-बी दोस्तों के साथ घूमता था और रात में घर आकर अपनी पत्नी कीर्ति के साथ अ-प्रा-कृ-ति-क (Unnatural) तरीके से श-री-रि-क सं-बं-ध बनाने की कोशिश करता था। कीर्ति इन सब बातों से बेहद परेशान थी और अक्सर अपनी माँ को फोन करके रोती थी।

2. माँ का फैसला: दामाद को सुधारने की कोशिश

अपनी बेटी का दुख देखकर शांति का दिल पसीज गया। उसने अपनी बेटी से कहा कि वह किशन को कुछ दिनों के लिए अपने मायके (शांति के घर) भेज दे, ताकि वह उसे समझा-बुझाकर सही रास्ते पर ला सके।

शांति का इरादा नेक था, वह चाहती थी कि उसका दामाद सुधर जाए और उसकी बेटी का घर बस जाए। लेकिन उसे यह अंदाजा नहीं था कि वह जिस शै-ता-न को अपने घर बुला रही है, उसकी नजर खुद अपनी सास की खूबसूरती पर टिक जाएगी।

3. दामाद की नीयत में खोट और ‘हंस मंजन’ का इशारा

किशन जब अपने ससुराल पहुँचा, तो वह अपनी सास शांति की खूबसूरती देखकर दंग रह गया। उसके मन में अपनी पत्नी के बजाय अपनी सास के प्रति वासना जाग उठी। एक दोपहर, करीब 3:00 बजे का समय था। शांति का पति वीरेंद्र खेत पर काम करने गया था और घर पर शांति अकेली आँगन में कपड़े धो रही थी।

तभी किशन वहां पहुँचा और शांति के सामने खड़े होकर ‘हंस मंजन’ (दांत साफ करना) करने लगा। यह एक गंदा और कामुक इशारा था, जिसे शांति तुरंत समझ गई। किशन की आँखों में अपने प्रति ह-व-स देखकर शांति ने एक खौ-फ-नाक योजना बनाई। उसने किशन से कहा, “दामाद जी, यह काम करने का समय अभी नहीं है। अगर आपके मन में इतनी ही बे-चै-नी है, तो रात को मेरे कमरे में आइएगा।”

4. वो काली रात: विश्वासघात का खेल

शांति की बात सुनकर किशन के मन में लड्डू फूटने लगे। उसे लगा कि उसकी सास भी उसके प्रति आ-क-र्षि-त है। रात के अंधेरे में जब वीरेंद्र गहरी नींद में सो गया, तो किशन चुपके से शांति के कमरे में दाखिल हुआ। शांति उसे बरामदे में ले गई और वहां दोनों के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसने रिश्तों की हर मर्यादा को ताक पर रख दिया।

किशन को लगा कि उसने अपनी सास को हासिल कर लिया है, लेकिन शांति के मन में कुछ और ही चल रहा था। अगले दिन किशन अपने घर वापस चला गया और कीर्ति के साथ बहुत अच्छे से रहने लगा। कीर्ति को लगा कि उसकी माँ ने कोई जादू कर दिया है, लेकिन असलियत बहुत भ-या-न-क थी।

5. एक हफ्ते बाद: वासना का दोबारा आगमन और अ-ंतिम फैसला

किशन का मन अब बार-बार अपनी सास के पास जाने का करने लगा। एक हफ्ते बाद वह फिर से अपने ससुराल पहुँचा और शांति से वही घिनौनी मांग करने लगा। शांति उसे गाँव के बाहर एक एकांत जगह पर ले गई। वहां किशन ने नशे और ह-व-स में डूबे हुए शांति से कहा, “काश तुम मेरी पहली पत्नी होती, कीर्ति में वो बात नहीं जो तुम में है।”

यह सुनते ही शांति का धैर्य जवाब दे गया। उसे अपनी बेटी के प्रति किशन की न-फ-र-त और खुद के प्रति उसकी वासना पर अ-त्य-धिक क्रोध आया। उसने सोचा कि ऐसे इंसान का जिंदा रहना समाज और उसकी बेटी के लिए ख-त-रा है।

6. क-त्ल की खौ-फ-नाक वारदात

शांति ने पहले से ही एक पै-ना औ-जार छिपा रखा था। जैसे ही किशन अपनी गंदी बातों में मशगूल हुआ, शांति ने उस औ-जार से किशन पर हमला कर दिया और उसकी जीवन लीला वहीं समाप्त कर दी। उसने किशन के श-री-र को वहीं झाड़ियों में फेंक दिया और चुपचाप अपने घर आकर सो गई।

अगले दिन सुबह गाँव में ह-ड़कंप मच गया। किशन की ला-श बरामद हुई। शांति वहां पहुँचकर फूट-फूटकर रोने का नाटक करने लगी ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर श-व को कब्जे में लिया और अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

7. माँ का बेटी के सामने सच का खुलासा

कुछ महीनों बाद, जब मामला थोड़ा शांत हुआ, तो शांति ने अपनी बेटी कीर्ति को सब कुछ सच-सच बता दिया। उसने बताया कि किशन एक इंसान नहीं बल्कि रा-क्ष-स था, जो न केवल अपनी पत्नी बल्कि अपनी सास को भी नहीं छोड़ना चाहता था।

कीर्ति अपनी माँ की बात सुनकर हैरान रह गई, लेकिन उसने अपनी माँ के फैसले का समर्थन किया क्योंकि वह खुद किशन के जु-ल्मों से तंग आ चुकी थी। शांति ने जल्द ही अपनी बेटी की दूसरी शादी एक अच्छे लड़के से करा दी और उसे नए जीवन की ओर भेजा।

निष्कर्ष और समाज के लिए चेतावनी

हकीमपुर की यह घटना हमें कई कड़वे सबक सिखाती है:

रिश्तों की मर्यादा: वासना और ह-व-स किसी भी रिश्ते को खा सकती है। दामाद और सास का रिश्ता माँ-बेटे जैसा होता है, लेकिन किशन जैसे लोग इसे क-लंकित करते हैं।

अ-प-रा-ध का अंत: गलत काम का नतीजा हमेशा बुरा होता है। किशन की वासना ने ही उसकी जान ले ली।

माँ का रक्षक रूप: हालांकि कानून हाथ में लेना गलत है, लेकिन शांति ने अपनी बेटी के भविष्य को बचाने के लिए जो रास्ता चुना, वह समाज में व्याप्त बु-रा-इयों के प्रति उसके गुस्से को दर्शाता है।

वर्तमान में यह मामला पुलिस की फाइलों में एक ‘अनसुलझी गुत्थी’ बनकर रह गया है, लेकिन गाँव के लोग आज भी इस घटना को याद कर सिहर उठते हैं।