पत्नी ने अपने ही पति के साथ कर दिया कारनामा/वजह जानकार पुलिस के होश उड़ गए/

धोखा और अंधविश्वास: जगमोहन और सीमा की खौफनाक कहानी

1. एकमपुर गाँव का समृद्ध परिवार

गाजियाबाद जिले के एकमपुर गाँव में जगमोहन सिंह नाम का एक प्रभावशाली जमींदार रहता था। उसके पास 18 एकड़ उपजाऊ जमीन थी और खेती के काम से उसने अच्छा खासा धन जमा कर रखा था। जगमोहन के परिवार में उसकी पत्नी सीमा देवी थी। सीमा स्वभाव से थोड़ी आरामपसंद थी और उसे घर के काम करना पसंद नहीं था। वह अक्सर जगमोहन से घर के लिए एक सहायक या नौकरानी रखने की जिद करती थी।

दूसरी ओर, जगमोहन के पास अधिक पैसा आने के कारण उसके चरित्र में कुछ दोष पैदा हो गए थे। वह गाँव की अन्य महिलाओं के प्रति /आकर्षित/ होने लगा था। वह /लंगोट/का/ढीला/ बन चुका था और उसका ध्यान अपनी पत्नी से हटकर /पर-स्त्रियों/ की ओर जाने लगा था। यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी थी, जो अंततः उसकी जान की दुश्मन बनने वाली थी।

2. नौकरानी की तलाश और गायत्री का आगमन

15 अक्टूबर 2025 को सीमा देवी ने जगमोहन को धमकी दी कि यदि घर के काम के लिए कोई मदद नहीं मिली, तो वह अपने मायके चली जाएगी। हार मानकर जगमोहन नौकरानी की तलाश में निकला। उसी शाम उनकी पड़ोसिन गायत्री देवी उसके पास आई। गायत्री को अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए ₹6,000 की सख्त जरूरत थी।

जगमोहन ने मौके का फायदा उठाते हुए गायत्री के सामने एक शर्त रखी। उसने कहा, “मैं तुम्हें ₹6,000 अभी दे दूँगा और हर महीने ₹15,000 वेतन भी दूँगा, लेकिन तुम्हें मेरे घर के सारे काम करने होंगे।” गायत्री, जो आर्थिक तंगी से जूझ रही थी और थोड़ी लालची भी थी, तुरंत मान गई। सीमा भी खुश थी कि उसे काम से मुक्ति मिल गई, लेकिन वह नहीं जानती थी कि यह फैसला उसके वैवाहिक जीवन को तबाह कर देगा।

3. रजामंदी और गलत रिश्तों की शुरुआत

गायत्री ने काम शुरू कर दिया। जगमोहन की नजरें अब हर वक्त गायत्री पर टिकी रहती थीं। 30 अक्टूबर 2025 को सीमा देवी अपनी बीमार माँ को देखने चार दिनों के लिए मायके चली गई। जगमोहन को जिसका इंतजार था, वह मौका उसे मिल गया।

अगले दिन जब गायत्री काम करने आई, तो जगमोहन ने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया। उसने गायत्री को लालच दिया कि यदि वह उसके साथ /वक्त/गुजारती/ है, तो वह उसे और अधिक पैसे देगा। गायत्री भी पैसों के लालच में फिसल गई। उन दोनों के बीच उनकी /आपसी/रजामंदी/ से /शारीरिक/संबंध/ कायम हुए। जगमोहन उसे अतिरिक्त पैसे देता और गायत्री खुश होकर घर लौट जाती।

4. दोस्तों का साथ और गहरी साजिश

उसी रात जगमोहन अपने दोस्त प्रेम सिंह के पास गया। दोनों ने मिलकर शराब पी। नशे में धुत जगमोहन ने प्रेम को अपनी नौकरानी गायत्री के बारे में बताया और उसकी सुंदरता की तारीफ की। प्रेम सिंह भी /बहती/गंगा/में/हाथ/धोने/ के लिए तैयार हो गया। जगमोहन ने कहा कि वह गायत्री को मना लेगा, बस उसे थोड़े और पैसे देने होंगे।

जगमोहन ने गायत्री को फोन किया और ₹10,000 का लालच दिया। गायत्री रात के समय जगमोहन के घर पहुँची। वहाँ प्रेम सिंह को देखकर वह पहले तो हिचकिचाई, लेकिन जब उसे और अधिक पैसों का आश्वासन मिला, तो वह /सहमत/ हो गई। उन तीनों ने मिलकर उस रात /गलत/काम/ किया। अगले चार दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा। जगमोहन और प्रेम सिंह रात भर गायत्री के साथ /वक्त/बिताते/ और उसे पैसे देकर विदा कर देते।

5. पड़ोसन दिव्या का हस्तक्षेप

जगमोहन की एक और पड़ोसन, दिव्या, इन सब हरकतों पर नजर रख रही थी। जब सीमा देवी अपने मायके से लौटी, तो दिव्या ने उसे सब कुछ बता दिया। उसने कहा, “सीमा, तुम्हारी पीठ पीछे तुम्हारा पति और उसका दोस्त तुम्हारी नौकरानी गायत्री के साथ /गंदा/खेल/ खेल रहे हैं।”

शुरुआत में सीमा ने विश्वास नहीं किया, लेकिन उसके मन में संदेह का बीज बो दिया गया था। एक रात जब जगमोहन चुपके से घर से निकला, तो सीमा ने उसका पीछा किया। उसने अपनी आँखों से जगमोहन को गायत्री के घर के अंदर जाते देखा। जब वह घर लौटा, तो सीमा ने उससे सवाल किया। जगमोहन ने शर्मिंदा होने के बजाय उसे धमकी दी—”मैं तुम्हें छोड़ दूँगा और गायत्री से शादी कर लूँगा, लेकिन उसे नहीं छोड़ूँगा।”

6. अंधविश्वास का सहारा और ‘घोड़े का उपाय’

परेशान सीमा फिर से दिव्या के पास गई। दिव्या ने उसे बताया कि वह जादू-टोने और अंधविश्वास के जरिए जगमोहन को सुधार सकती है। दिव्या ने सीमा को एक अजीब उपाय बताया—”तुम्हें अपने पति को एक महीने तक /घोड़े/का/पेशाब/ पिलाना होगा, इससे वह उस औरत के चंगुल से बाहर निकल आएगा।”

अपने पति को वापस पाने की चाहत में सीमा ने इस घिनौने उपाय को मान लिया। दिव्या ने उसे दो बोतलें लाकर दीं, जिन्हें सीमा हर रोज जगमोहन के खाने या पानी में मिलाकर पिलाने लगी। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी जगमोहन पर कोई असर नहीं हुआ। वह अभी भी हर रात गायत्री के पास जाता था और उस पर पैसे लुटाता था।

7. हत्या की साजिश और ₹5 लाख का सौदा

4 दिसंबर 2025 को सीमा का धैर्य टूट गया। उसे डर लगने लगा कि जगमोहन अपनी सारी जमीन और संपत्ति गायत्री के नाम कर देगा। उसने दिव्या से कहा, “अब बस एक ही रास्ता बचा है, मुझे अपने पति को /रास्ते/से/हटाना/ होगा।” सीमा ने दिव्या को इस काम में मदद के लिए ₹5 लाख देने का वादा किया।

रात के करीब 9:00 बजे जब जगमोहन शराब के नशे में धुत होकर सोया था, दिव्या सीमा के घर पहुँची। दोनों महिलाओं ने मिलकर पहले जगमोहन का /गला/घोंट/ दिया। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए उन्होंने जगमोहन की /लाश/के/टुकड़े-टुकड़े/ कर दिए और उन्हें बोरियों में भर दिया।

8. आंगन में दफन और पड़ोसी की सजगता

रात के करीब 11:30 बजे सीमा और दिव्या आंगन में गड्ढा खोदकर उन बोरियों को दफनाने लगीं। तभी उनका एक पड़ोसी, संजय कुमार, जो अनिद्रा का शिकार था और अपनी बालकनी में टहल रहा था, उसने यह सब देख लिया। संजय को शक हुआ कि इतनी रात को ये महिलाएँ क्या दफन कर रही हैं।

संजय तुरंत नीचे आया और शोर मचाने लगा। शोर सुनकर सीमा और दिव्या डरकर अंदर भाग गईं। अन्य पड़ोसी भी इकट्ठा हो गए। जब लोगों ने बोरी खोलकर देखी, तो उनके होश उड़ गए—अंदर जगमोहन की /कटी/हुई/लाश/ थी। तुरंत पुलिस को बुलाया गया।

9. गिरफ्तारी और जुर्म का कबूलनामा

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर सीमा और दिव्या को गिरफ्तार कर लिया। थाने में जब महिला दरोगा ने सख्ती से पूछताछ की, तो सीमा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि कैसे उसके पति के /अवैध/संबंधों/ और संपत्ति खोने के डर ने उसे एक कातिल बना दिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।

निष्कर्ष: जगमोहन की वासना और सीमा का अंधविश्वास व क्रोध, दोनों ने मिलकर एक हंसते-खेलते घर को उजाड़ दिया। यह घटना समाज को आइना दिखाती है कि अनैतिक रिश्ते और अंधविश्वास हमेशा विनाश की ओर ही ले जाते हैं।