आखिर ऐसा क्या हुआ कि दो बहनों की जिंदगी एक ही पल में तबाह हो गई | Sonali Sneha Case

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एक बहन की कहानी: विश्वास और धोखा

भाग 1: एक सुखद शुरुआत

महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में, जहां हर कोई एक-दूसरे को जानता था, वहाँ एक साधारण परिवार रहता था। इस परिवार में माता-पिता और उनकी दो बेटियाँ, सोनाली और स्नेहा, शामिल थीं। सोनाली 22 साल की थी, जबकि स्नेहा 19 साल की। दोनों बहनें पढ़ाई में बहुत अच्छी थीं और अपने माता-पिता की आँखों का तारा थीं। उनके पिता, शंकर मोहिते, एक मेहनती किसान थे, जबकि उनकी माँ एक गृहिणी थीं। परिवार में प्यार और समर्पण की कमी नहीं थी।

सोनाली और स्नेहा हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़ी रहती थीं। दोनों बहनों के बीच एक गहरा बंधन था। वे एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होतीं और मुश्किल समय में एक-दूसरे का सहारा बनतीं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनके जीवन में कुछ बदलाव आने लगे।

भाग 2: संकट का समय

अप्रैल 2017 में, शंकर की अचानक तबीयत खराब हो गई। परिवार में चिंता का माहौल था। इलाज के बावजूद, शंकर की हालत बिगड़ती गई और 12 अगस्त 2017 को उनका निधन हो गया। यह एक ऐसा समय था जब परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। अब घर में कमाने वाला कोई नहीं था।

सोनाली और स्नेहा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी, लेकिन उनकी माँ को चिंता थी कि अब उनकी बेटियों की शादी कैसे होगी। रिश्तेदारों और पड़ोसियों का दबाव बढ़ने लगा। “बेटियों की शादी कर दो, नहीं तो क्या होगा?” यह वाक्य अब घर में गूंजने लगा।

भाग 3: परिवार की जिम्मेदारी

सोनाली और स्नेहा ने अपनी माँ को आश्वस्त करने की कोशिश की। “हम सब कुछ संभाल लेंगे, माँ,” सोनाली ने कहा। लेकिन माँ की चिंता कम नहीं हुई। “तुम्हारी शादी होनी चाहिए। तुम्हें किसी अच्छे लड़के से शादी करनी चाहिए,” माँ ने कहा।

इस बीच, गणेश, जो उनका छोटा भाई था, ने भी वादा किया कि वह नौकरी मिलने के बाद सब कुछ संभाल लेगा। लेकिन गणेश केवल 16 साल का था और उसकी शादी की कोई संभावना नहीं थी।

भाग 4: रिश्तेदारों का दबाव

गणेश ने अपनी बहनों की शादी को टालने की कोशिश की। “अगर बहनें शादी कर लेंगी, तो वे अपने हिस्से की संपत्ति अपने ससुराल वालों के नाम कर देंगी,” उसने सोचा। रिश्तेदारों का दबाव बढ़ते-बढ़ते इस हद तक पहुंच गया कि गणेश ने अपनी बहनों को नुकसान पहुँचाने का खतरनाक विचार मन में डाल लिया।

“मुझे अपनी बहनों को खत्म करना होगा,” गणेश ने सोचा। यही वह पल था जब उसने इंटरनेट पर जहर के बारे में सर्च करना शुरू किया।

भाग 5: एक खतरनाक योजना

गणेश ने जहर देने के तरीकों के बारे में कई बार सर्च किया। “कितनी मात्रा में जहर दिया जाए ताकि मौत हो जाए?” “जहर कितने दिनों में असर करता है?” ऐसे दर्जनों कीवर्ड्स उसने खोजे। गणेश ने ठान लिया कि वह अपनी बहनों को खत्म कर देगा।

15 अक्टूबर 2023 को, जब पूरा परिवार एक रिश्तेदार के घर गया हुआ था, तब गणेश ने अपनी योजना को अंजाम देने का सही समय समझा। घर लौटने पर, उसने रसोई में सूप बनाया और उसमें जहर मिला दिया।

भाग 6: एक त्रासदी

सोनाली और स्नेहा ने उस सूप को भरोसे से पिया। उन्हें नहीं पता था कि यह सूप नहीं, बल्कि उनकी आखिरी सांसें हैं। कुछ घंटों बाद, स्नेहा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका।

स्नेहा की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। लेकिन जब डॉक्टरों की रिपोर्ट आई, तो उसमें एक और बड़ा झटका छिपा था—शरीर में जहर के अंश पाए गए थे।

भाग 7: शक की सुई

घबराए हुए परिवार ने रिश्तेदारों पर शक करना शुरू किया। पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हो गई। पुलिस ने परिवार के सभी सदस्यों के बयान लिए, लेकिन सभी के बयान एक जैसे ही थे।

जब सोनाली की तबीयत भी बिगड़ने लगी, तो उसे भी उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया, लेकिन सोनाली की हालत भी गंभीर हो गई।

भाग 8: मौत का साया

सोनाली को पनवेल के एमजीएम अस्पताल में रेफर किया गया। वहाँ अगले 10 दिन तक सोनाली जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही। लेकिन 30 अक्टूबर 2023 को, उसने भी जंग हार गई।

गणेश को गिरफ्तार किया गया। जब उससे लगातार पूछताछ हुई, तो जो कहानी बाहर आई, उसने भाई-बहन के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए।

भाग 9: एक खौफनाक सच

गणेश ने कबूल किया कि उसने अपनी बहनों को मारने की योजना बनाई थी। “मैं चाहता था कि मेरी बहनें शादी न करें, ताकि संपत्ति मेरे पास ही रहे,” उसने कहा।

इस कबूलनामे ने सभी को चौंका दिया। “मैंने अपनी बहनों को धोखा दिया। मैंने उस रिश्ते को तोड़ दिया जो जन्म-जन्मांतर का होता है,” उसने कहा।

भाग 10: न्याय की खोज

गणेश की गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। “यह केवल दो मौतों की कहानी नहीं है। यह एक सोच की कहानी है। बेटियों को बोझ समझा जाना,” एक पुलिस अधिकारी ने कहा।

गणेश को हत्या के आरोप में अदालत में पेश किया गया। “मुझे अपनी बहनों का ख्याल रखना चाहिए था, लेकिन मैंने उन्हें धोखा दिया,” उसने कहा।

भाग 11: एक नई शुरुआत

गणेश को 10 साल की सजा सुनाई गई। लेकिन यह सजा उसकी बहनों की मौत की भरपाई नहीं कर सकती थी। “मैंने जो किया, उसके लिए मुझे हमेशा पछतावा रहेगा,” उसने कहा।

गणेश की सजा के बाद, उसकी माँ ने कहा, “मेरी बेटियाँ अब नहीं रहीं। लेकिन मैं चाहती हूँ कि तुम अपनी गलती से सीखो।”

भाग 12: परिवार की ताकत

गणेश की सजा के बाद, परिवार ने एक नई शुरुआत की। “हमें आगे बढ़ना है, और अपनी बहनों की याद को हमेशा जीना है,” माँ ने कहा।

सभी ने मिलकर एक नया जीवन शुरू किया। “हमारी बहनें हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी,” उन्होंने कहा।

भाग 13: एक सच्चा सबक

यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं है, बल्कि यह एक सीख है। “बेटियाँ कभी बोझ नहीं होतीं। वे परिवार का हिस्सा होती हैं,” यह संदेश हर किसी को समझना चाहिए।

गणेश ने अपनी गलती से सीखा कि परिवार का महत्व क्या होता है। “मैंने जो किया, उसके लिए मुझे हमेशा पछतावा रहेगा,” उसने कहा।

भाग 14: समाज की सोच

समाज में बेटियों को बोझ समझने की सोच को बदलना होगा। “हमें उनकी अहमियत को समझना होगा,” एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा।

गणेश की कहानी ने सबको यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या हम सच में बेटियों को सम्मान देते हैं?

भाग 15: एक नई दिशा

गणेश ने अपनी सजा के दौरान कई किताबें पढ़ीं और अपने जीवन को बदलने का प्रयास किया। “मैं अपनी बहनों की याद में एक नया जीवन शुरू करूंगा,” उसने ठान लिया।

भाग 16: अंत में

इस कहानी ने हमें यह सिखाया कि परिवार और रिश्ते कितने महत्वपूर्ण होते हैं। बेटियाँ कभी बोझ नहीं होतीं, बल्कि वे हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा होती हैं।

गणेश ने अपनी गलती से सीख लिया और अब वह एक नया इंसान बन गया है। “मैं अपनी बहनों की याद को हमेशा संजोकर रखूँगा,” उसने कहा।