मरा हुआ पति भूत बन कर घर में हर रोज आता था/जिसकी वजह से पत्नी के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/

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यह घटना एक महिला की दुखद कहानी है, जो अपने जीवन में कई कठिनाईयों का सामना करती है। यह कहानी राजस्थान के जोधपुर जिले के बसनी चरण गांव की एक विधवा महिला सरोज देवी की है, जो अपने जीवन में कई त्रासदियों से गुजरती है। उसके पति विक्रम की एक कार दुर्घटना में मौत हो जाती है, और उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है। इसके बावजूद, सरोज देवी हार नहीं मानती और अपने बच्चों को ट्यूशन देना शुरू कर देती है, जिससे वह अपने परिवार का पालन-पोषण करती है।

जीवन में संघर्ष

सरोज देवी का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। पति के निधन के बाद, वह अकेले अपने घर का खर्च उठाने के लिए कड़ी मेहनत करती है। उसका एक छोटा सा परिवार है जिसमें उसकी सास दयावती और उसका देवर टिंकू शामिल हैं। टिंकू 15 साल का है और अक्सर झगड़े करता रहता है, जिससे सरोज देवी और दयावती को परेशानी होती है। लेकिन दयावती यह सोचती है कि टिंकू और सरोज की शादी करवा दी जाए, ताकि परिवार में शांति बनी रहे।

एक नई शुरूआत

दयावती अपनी बहू को मनाने में सफल हो जाती है और धीरे-धीरे वह टिंकू को अपनी शादी के लिए राजी कर लेती है। सरोज देवी भी इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है, हालांकि वह इस विचार से बिल्कुल भी खुश नहीं होती। वह उम्मीद करती है कि उसके जीवन में सब कुछ सामान्य हो जाएगा, लेकिन उसे यह नहीं पता होता कि उसके सामने और भी बड़ी मुसीबतें आने वाली हैं।

रहस्यमयी घटनाएँ

4 दिसंबर 2025 की रात को एक अजीब घटना घटित होती है। सरोज देवी चीखने और चिल्लाने लगती है, और उसकी सास दयावती उसे बताती है कि वह सपने में अपने पति विक्रम को देखती है। सरोज देवी बताती है कि उसका पति भूत बनकर उसे डराता है। दयावती इसे महज एक बुरा सपना मानती है और उसे शांत करने की कोशिश करती है, लेकिन कुछ दिन बाद इस घटना की गंभीरता बढ़ जाती है।

एक और रहस्य

एक दिन जब सरोज देवी दूध लेने के लिए दुकान पर जाती है, तो उसे दूध बेचने वाला सुरेश और उसका दोस्त पवन अजीब नजरों से देखते हैं। सरोज देवी इस पर ध्यान नहीं देती, लेकिन रात को एक और अजीब घटना घटित होती है। भूत फिर से सरोज देवी के कमरे में प्रवेश करता है और उसके साथ गलत काम करता है, लेकिन सरोज देवी को इसकी कोई जानकारी नहीं होती। यह घटनाएँ लगातार होती रहती हैं और सरोज देवी की स्थिति गंभीर होती जाती है।

तांत्रिक का सहारा

दयावती अपनी बहू को तांत्रिक विद्यासागर के पास भेज देती है। तांत्रिक यह बताता है कि सरोज देवी के पति की आत्मा उसे परेशान कर रही है और वह उसके साथ गलत काम कर रहा है। दयावती अपनी बहू को समझाती है, लेकिन सरोज देवी इस बात पर विश्वास नहीं करती। फिर तांत्रिक विद्यासागर पूजा करने के लिए आता है, लेकिन इसके बावजूद घटनाएँ रुकती नहीं हैं।

पुलिस से मदद

अंततः, सरोज देवी और दयावती पुलिस स्टेशन जाने का निर्णय लेती हैं। पुलिस दरोगा अमर सिंह सरोज देवी की पूरी कहानी सुनकर उसे बताता है कि घर में भूत-प्रेत का काम नहीं हो सकता, बल्कि इसका कारण कुछ और है। अमर सिंह और उसकी टीम ने घर के बाहर पहरा देने का फैसला किया और कुछ दिन बाद सुरेश और पवन को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों ने यह स्वीकार किया कि वे दूध में नींद की दवाइयाँ मिलाते थे, जिससे परिवार गहरी नींद में सो जाता था और वे सरोज देवी के साथ गलत काम करते थे।

न्याय की उम्मीद

सुरेश और पवन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इनके खिलाफ चार्जशीट दायर की। यह घटना अब अदालत में जाएगी, जहां इन दोनों को सजा मिलने की संभावना है। यह एक दुखद और भयावह घटना है, जिसने सरोज देवी को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी तोड़ दिया। लेकिन अब उसे न्याय की उम्मीद है, और वह अपनी कहानी साझा करने के माध्यम से सभी को सतर्क करना चाहती है।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि किसी भी प्रकार के मानसिक या शारीरिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाना बहुत महत्वपूर्ण है। समाज को इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और हर व्यक्ति को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जागरूक करना चाहिए।