तलाकशुदा पत्नी ने अपमान किया शोरूम में… पति ने Owner बनकर सबक सिखाया! Heart Touching Story

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तलाकशुदा पत्नी ने अपमान किया शोरूम में… पति ने Owner बनकर सबक सिखाया! (Heart Touching Story)

प्रस्तावना

मुंबई के बांद्रा इलाके में एक लग्जरी कार शोरूम “व्हील्स एम्पायर” था। बाहर से देखने पर यह शोरूम किसी फिल्मी सेट जैसा लगता था—टेम्पर्ड ग्लास की दीवारें, नीली-गोल्डन लाइटिंग, और फर्श पर ऐसी चमक कि अपना चेहरा साफ नजर आ जाए। अंदर खड़ी कारें—लैम्बोर्गिनी, पोर्श, मर्सिडीज, बेंटले—कीमतें 2 करोड़ से 12 करोड़ तक। यहां सिर्फ वही आते थे जिनके पास पैसा था, शोहरत थी, रुतबा था।

इस शोरूम की मैनेजर थी सान्या कपूर—32 साल, स्टाइलिश, कॉन्फिडेंट, और थोड़ी एरोगेंट। सान्या की सबसे बड़ी कमजोरी थी कि वह इंसान को सिर्फ कपड़ों, घड़ी और जूतों से जज करती थी। साधारण कपड़े वाले उसके लिए हमेशा अनवांटेड थे।

अपमान की शुरुआत

एक सामान्य सोमवार की सुबह थी। शोरूम में हल्की म्यूजिक बज रही थी। सेल्समैन ग्राहकों को कारें दिखा रहे थे। तभी ग्लास डोर खुला। अंदर दाखिल हुआ एक शख्स—फीकी ग्रे टीशर्ट, थोड़ी पुरानी ब्लैक जींस, जूते में धूल, हाथ में प्लास्टिक की फाइल। उम्र करीब 35, चेहरे पर हल्की दाढ़ी, लेकिन आंखों में अजीब सी शांति। यह था आरव शर्मा—सान्या का तलाकशुदा पति।

तीन साल पहले सान्या ने आरव को छोड़ दिया था। उस रात की आखिरी बात आज भी आरव के सीने में चुभती थी—”तुम जैसे छोटे-मोटे मैकेनिक के साथ मैं अपनी जिंदगी बर्बाद नहीं करूंगी। मुझे पैसा चाहिए, स्टेटस चाहिए। तुम में तो कुछ है ही नहीं।”

सान्या ने आरव को देखते ही तिरस्कार से बोला, “ओह माय गॉड! कार खरीदने आए हो? तुम्हारे पास तो साइकिल खरीदने की औकात नहीं है। सिक्योरिटी, इसे बाहर निकालो।”

आरव शांत रहा, “मैडम, मुझे कार खरीदनी है।” सान्या ने जोर से हंसते हुए कहा, “यह आदमी तो मेरा तलाकशुदा पति है। जल्दी बाहर करो।”

गार्ड ने आरव को धक्का देकर बाहर निकाल दिया। शोरूम में सब हंस रहे थे, लेकिन आरव की आंखों में दर्द नहीं, बस एक गहरी शांति थी।

अतीत की झलक

तीन साल पहले, कॉलेज के दिनों में आरव मैकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहा था। सान्या फैशन और बिजनेस मैनेजमेंट। दोनों में केमिस्ट्री थी। शादी के बाद आरव ने एक छोटी सी वर्कशॉप में काम शुरू किया। सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक काम। हाथों में ग्रीस, कपड़े गंदे, लेकिन दिल में बड़ा सपना—अपनी खुद की ऑटो पार्ट्स कंपनी बनाना।

सान्या बदल रही थी। उसकी कंपनी में अच्छी जॉब लगी, पैसे आने लगे। दोस्तों की पार्टीज में उसके पति डॉक्टर, सीए, सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। आरव—मैकेनिक। सान्या को शर्म आने लगी। धीरे-धीरे झगड़े बढ़े। एक रात सान्या चिल्लाई, “मैं थक गई हूं इस गरीबी से। तुम कुछ नहीं कर सकते। तलाक हो गया।”

संघर्ष और सफलता

तलाक के बाद आरव टूट गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी। वह पहले से दस गुना मेहनत करने लगा। रातों को वर्कशॉप में सोता, दिन में अलग-अलग शहर जाकर ऑटो पार्ट्स सप्लाई करता। धीरे-धीरे उसने अपना छोटा बिजनेस शुरू किया—”एसआर ऑटोटेक”। पहले लोकल पार्ट्स, फिर क्वालिटी इतनी बेहतर हुई कि बड़े-बड़े डीलर्स आने लगे। एक साल में कंपनी दस गुना बढ़ गई। फिर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई। आज एसआर ऑटोटेक मुंबई के 80% लग्जरी शोरूम्स को पार्ट्स सप्लाई करता था—और “व्हील्स एम्पायर” भी उनमें से एक था।

वक्त का पहिया घूमा

तीन दिन बाद शोरूम में खास तैयारी थी। सान्या ने नई ड्रेस पहनी, हेयर कलर करवाया, परफ्यूम लगाया। वो टीम को ब्रीफिंग दे रही थी—”आज हमारे सबसे बड़े सप्लायर और नए पार्टनर आ रहे हैं। सब परफेक्ट होना चाहिए।”

ठीक 11:15 पर मुख्य दरवाजा खुला। अंदर आए दो लोग—कबीर (ब्लैक सूट, कॉन्फिडेंट स्माइल) और आरव (चारकोल ग्रे सूट, टाई, पॉलिश्ड शूज, हाथ में रोलेक्स, क्लीन शेव)। सान्या ने देखा, उसका चेहरा सफेद पड़ गया। दिल की धड़कन रुक गई।

कबीर ने आगे बढ़कर हाथ मिलाया, “हेलो मैडम, मैं कबीर मेहरा, एसआर ऑटोटेक का हेड ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट।” फिर आरव की तरफ इशारा किया, “और यह हैं मिस्टर आरव शर्मा, हमारी कंपनी के फाउंडर सीईओ और अब इस व्हील्स एम्पायर के 100% ओनर।”

सान्या की सांस थम गई। कबीर मुस्कुराए, “हां मैडम, कल रात डील फाइनल हुई। कैश पेमेंट 7.8 करोड़। यह शोरूम अब पूरी तरह आरव सर का है।”

सबक की घड़ी

सान्या के पैर कांपने लगे। वो कुर्सी पकड़कर खड़ी रह गई। आरव धीरे-धीरे आगे बढ़ा। चाल में राजा वाला कॉन्फिडेंस। आवाज शांत, लेकिन हर शब्द जहर की तरह चुभ रहा था।

“याद है सान्या? तीन दिन पहले तुमने मुझे अपमानित कर के बाहर निकाला था। कहा था, यह कारें सड़क छाप लोगों के लिए नहीं बनी।”

सान्या के होंठ सूख गए। “मैं… मैं तो बस…”
आरव ने हाथ उठाकर रोका, “सुनो, तुम्हें पता है इस शोरूम की 70% कारों के इंजन पार्ट्स, सस्पेंशन, ब्रेक सिस्टम सब मेरी कंपनी से आते हैं। जिस कार को तुम छूती हो, उसका इंजन मेरे हाथों से बना है। जिस लग्जरी सीट पर बैठती हो, उसकी लेदर और फ्रेमिंग मेरे प्लांट में हुई है। यहां की हर चमक, हर कीमत मेरी मेहनत से जुड़ी है।”

शोरूम में पिन ड्रॉप सन्नाटा। सभी कर्मचारी चुप। ग्राहक भी रुक गए।
आरव ने एक गहरी सांस ली, “तुम कहती थी ना पैसों के बिना कोई वैल्यू नहीं, तो लो, उन्हीं पैसों से मैंने तुम्हारा पूरा शोरूम खरीद लिया।”

सान्या के पैर लड़खड़ाए। वो धीरे-धीरे फर्श पर बैठ गई। आंखों से आंसू बहने लगे। मेकअप बिगड़ रहा था।

माफी और नई शुरुआत

सान्या रोती रही, “आरव, प्लीज, मैं बहुत गलत थी। मुझे माफ कर दो।”
आरव की आंखों में भी हल्की नमी आई, लेकिन आवाज दृढ़ रही, “माफी का सवाल अब नहीं उठता सान्या। जो रिश्ता टूट चुका वो टूटा ही रहता है। लेकिन हां, आज मैंने साबित कर दिया गरीबी कोई गुनाह नहीं होती। मेहनत, सब्र और ईमानदारी ही असली अमीरी है।”

फिर उसने अकाउंटेंट को कहा, “अजय जी, मिसेज सान्या कपूर की पोजीशन आज से रिलीव। उन्हें दो महीने की सैलरी और ग्रेच्युटी दे दो। नई मैनेजर कल सुबह 10 बजे ज्वाइन करेगी।”

सान्या पूरी तरह टूट चुकी थी। वह रोती रही लेकिन कोई नहीं रुका। एक घंटे बाद सान्या शोरूम से बाहर निकल रही थी—हाथ में छोटा सा बॉक्स, जिसमें उसका पर्स, फोटो फ्रेम, कॉफी मग। वही ग्लास डोर, तीन दिन पहले जहां उसने आरव को अपमान से निकाला था, आज वही दरवाजा उसे बाहर धकेल रहा था।

आरव अंदर बड़ी खिड़की के पास खड़ा था। वह सान्या को जाते हुए देख रहा था—चेहरे पर न खुशी थी, न गम, बस एक गहरी शांत समझ।

अंतिम संदेश

दोस्तों, जिंदगी बहुत अजीब खेल खेलती है। जो आज तुम्हें छोटा समझता है, वही कल तुम्हारे सामने सिर झुकाता है। कभी किसी को उसकी जेब से मत तोलो, कभी किसी का मजाक मत उड़ाओ। वक्त का पहिया बहुत तेज घूमता है, और जब वह घूमता है तो सब कुछ उलट-पुलट हो जाता है।

कैसी लगी यह दिल को छू लेने वाली कहानी? क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ? किसी ने आपको छोटा समझा, लेकिन बाद में आपने सबको चौंका दिया? अपनी छोटी सी कहानी शेयर करो। मेहनत करते रहो, सब्र रखो। एक दिन वक्त खुद तुम्हारा साथ देगा।

मिलते हैं अगली कहानी में। तब तक जय हिंद।