80 साल के बूढ़े आदमी के कत्ल की ऐसी कहानी जिसने पुलिस को भी उलझा करके रख दिया।
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80 साल के बूढ़े आदमी के कत्ल की कहानी: एक रहस्य जो पुलिस को भी उलझा गया
बरसात की काली रात थी। गांव के बाहर बाजरे के खेतों में एक सनसनीखेज घटना घटी, जिसने पूरे गांव और पुलिस को हिला कर रख दिया। 80 साल के बुजुर्ग खजान सिंह की लाश खेत के बीचोंबीच संदिग्ध हालत में मिली थी। नीचे के कपड़े उतरे हुए, पास में करीने से रखे थे, ऊपर सिर्फ बनियान पहने हुए। ऐसा लग रहा था कि कपड़े जबरदस्ती नहीं उतारे गए बल्कि खुद उतारकर रखे गए थे। गांव के लोग हैरान थे—आखिर इतनी रात गए, खजान सिंह खेत में क्या कर रहे थे?
खजान सिंह गांव के सबसे सम्मानित बुजुर्ग थे। उनका व्यवहार इतना अच्छा था कि हर कोई उन्हें भगवान का रूप मानता था। हुक्का पीते, लोगों को पास बिठाते, प्यार से बातें करते। उनके बेटे शादीशुदा थे, पोता भी था, लेकिन खजान सिंह अधिकतर वक्त ट्यूबवेल पर ही गुजारते थे। अचानक उनकी लाश मिलने से गांव में अफरातफरी मच गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। मौत हार्ट अटैक से हुई थी, लेकिन उनके शरीर पर ऐसे निशान थे जिससे साफ लग रहा था कि मरने से ठीक पहले वे किसी महिला के साथ संबंध बना रहे थे। पुलिस की जांच सुमित्रा देवी पर आकर टिक गई, जो गांव की सबसे सम्मानित बुजुर्ग महिला थी। दरोगा भुजवल सिंह अस्पताल पहुंचे, जहां सुमित्रा आखिरी सांसें ले रही थी। दरोगा ने सख्ती से पूछा—उस रात खेत में क्या हुआ था?
सुमित्रा कांप उठी। 60 साल पुराना राज, जो उसने सीने में दफन कर रखा था, बाहर आने को तड़प उठा। वह राज सिर्फ एक रात का नहीं, बल्कि उस नाजायज रिश्ते का था जिसका सबूत उसका बड़ा बेटा था। सुमित्रा ने कांपते होठों से बताया—“साहब, वो जिद कर रहे थे। कह रहे थे शायद यह आखिरी मुलाकात है। इसके बाद फिर कभी मिलना हो या ना हो।”
सुमित्रा ने उस रात की सच्चाई बयां की। दोनों खेत के बीचोंबीच गए। खजान सिंह ने नीचे के कपड़े उतारे, सुमित्रा ने भी खुद को हवाले कर दिया। 80 साल की उम्र में भी खजान सिंह में वही ताकत थी, वही जूनून। लेकिन सहवास के दौरान अचानक खजान सिंह को सीने में दर्द उठा। “मुझे दर्द हो रहा है…” कहकर वहीं दम तोड़ दिया। सुमित्रा घबरा गई, कपड़े ठीक किए और वहां से निकल आई। उसकी तबियत बिगड़ गई, अस्पताल में भर्ती हो गई।
दरोगा भुजवल सिंह ने पूरी कहानी जानने के बाद निष्कर्ष निकाला—यह कत्ल नहीं, एक हादसा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यही आया कि मौत हार्ट अटैक से हुई थी, लेकिन खेतों के बीचोंबीच, किसी महिला के साथ संबंध बनाते समय। पुलिस ने केस को बंद कर दिया, लेकिन गांव में चर्चा होती रही।
खजान सिंह और सुमित्रा देवी की प्रेम कहानी
सुमित्रा देवी ने बताया—“मैं खजान सिंह की पुरानी प्रेमिका हूं। मेरे पति का देहांत 14 साल पहले हो गया था। खजान सिंह से मेरे संबंध तब से थे जब मेरी शादी भी नहीं हुई थी। हम एक ही स्कूल में पढ़ते थे। खेलकूद के दौरान हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई। जाति अलग थी, शादी मुमकिन नहीं थी। लेकिन प्यार इतना गहरा था कि शादी के बाद भी हम मिलते रहे।”
शादी के बाद भी दोनों ने वादा किया था कि जब भी खजान सिंह बुलाएंगे, सुमित्रा आएगी। “मेरे बच्चे भी हुए, पर खजान सिंह कभी-कभी बुलाते थे, हम मिल लेते थे। 14 साल हो गए पति को मरे हुए, खजान सिंह की पत्नी भी नहीं रही। अब दो दिन पहले जब उन्होंने बुलाया, तो कहा—शायद यह आखिरी मुलाकात है।”
खेतों के बीचोंबीच, बरसात की रात, दो बुजुर्ग प्रेमी आखिरी बार मिले। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। सहवास के दौरान खजान सिंह को अटैक आया और वहीं दम तोड़ दिया।
गांव में सनसनी और पुलिस की उलझन
खजान सिंह के पोते ने ट्यूबवेल पर खाना पहुंचाया, लेकिन दादा वहां नहीं थे। जगदीश ने पूरे गांव में खोजबीन की, रिश्तेदारों को भेजा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन गांव वाले खेतों में खोजने लगे। एक कुत्ता बार-बार खेतों से अंदर-बाहर जा रहा था। उसके मुंह पर खून लगा था। गांव वालों ने उसका पीछा किया तो देखा—खजान सिंह की लाश पड़ी थी, कुत्तों ने नोच दिया था।
पुलिस ने जांच शुरू की। कपड़े उतरे हुए थे, पास में रखे थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साबित किया कि मौत हार्ट अटैक से हुई थी, लेकिन मरने से पहले वह किसी महिला के साथ थे। गांव में चर्चा होने लगी—आखिर 80 साल की उम्र में भी खजान सिंह का यह शौक क्यों नहीं गया?
दरोगा भुजवल सिंह ने सुमित्रा देवी से पूछताछ की। सुमित्रा ने सब सच बता दिया। दरोगा ने मामले को आगे न बढ़ाने का फैसला लिया। केस बंद कर दिया गया। खजान सिंह की लाश गुमनाम तरीके से दफन कर दी गई। गांव में यह कहानी धीरे-धीरे दबी रह गई, लेकिन बुजुर्गों की प्रेम कहानी, वासना, और मौत की यह दास्तान आज भी गांव के किस्सों में जिंदा है।
सीख और सोच
यह कहानी सिर्फ एक कत्ल की नहीं, बल्कि इंसानी भावनाओं, रिश्तों, और समाज के नजरिए की भी है। उम्र चाहे कोई भी हो, प्यार और वासना का खेल कभी खत्म नहीं होता। समाज अक्सर बुजुर्गों को भगवान का रूप मानता है, लेकिन उनके भीतर भी इंसानी इच्छाएं होती हैं। इस घटना ने पुलिस को उलझा दिया, लेकिन सच्चाई यही थी कि यह कत्ल नहीं, एक हादसा था—एक अधूरी प्रेम कहानी का अंतिम अध्याय।
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