प्रेमिका ने अपने ही प्रेमी के साथ किया करनामा/ब्लेड के साथ कर दिया काम तमाम/

विश्वासघात का अंत: कैली गांव की खौफनाक दास्तां

अध्याय 1: कैली गांव और आंचल का संघर्ष

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित ‘कैली’ एक शांत और साधारण सा गांव था, जहां जीवन अपनी धीमी गति से चलता था। इसी गांव के एक छोटे से मकान में आंचल देवी अपने परिवार के साथ रहती थी। आंचल एक बेहद सुशील और मेहनती महिला मानी जाती थी, लेकिन उसके जीवन में दुखों का पहाड़ तब टूटा जब पाँच साल पहले एक लंबी बीमारी के कारण उसके पति का देहांत हो गया।

पति की मृत्यु के बाद आंचल इस संसार में बिल्कुल अकेली पड़ गई थी। उसके ऊपर न केवल अपनी जिम्मेदारी थी, बल्कि उसकी इकलौती बेटी पूनम का भविष्य भी उसके कंधों पर था। पूनम उस समय दसवीं कक्षा की छात्रा थी। आंचल ने हार नहीं मानी और गांव के बड़े जमींदारों के खेतों में मेहनत-मजदूरी करना शुरू कर दिया। वह रोज सुबह 7 बजे घर से निकलती और शाम ढले ही वापस लौटती।

हालांकि, आर्थिक तंगी और एकाकीपन ने आंचल के स्वभाव में बदलाव लाना शुरू कर दिया था। गांव के लोग उसकी मेहनत की सराहना तो करते थे, लेकिन उसके अकेलेपन का फायदा उठाने की कोशिश करने वाले भी कम नहीं थे।

अध्याय 2: पूनम की जरूरतें और आंचल की मजबूरी

पूनम अपनी मां से बहुत प्यार करती थी, लेकिन गरीबी की मार उसे अक्सर परेशान करती थी। एक दिन पूनम ने अपनी मां से कहा, “मां, मेरे पास स्कूल की केवल एक ही वर्दी है। मुझे इसे रोज धोना और सुखाना पड़ता है। क्या मुझे एक नई ड्रेस मिल सकती है?”

आंचल का दिल अपनी बेटी की बात सुनकर भर आया, लेकिन उसकी जेब खाली थी। उसने पूनम को समझाया कि मजदूरी का पैसा समय पर नहीं मिलता। गांव के रसूखदार लोग काम तो करा लेते हैं, लेकिन भुगतान के वक्त आनाकानी करते हैं। इसी उधेड़बुन में आंचल ने तय किया कि वह गांव के सरपंच अमर सिंह के पास जाएगी, ताकि उसे कुछ अग्रिम राशि या नियमित काम मिल सके।

अध्याय 3: तेजबीर का प्रवेश और गलत इरादे

5 दिसंबर 2025 का वह दिन आंचल के जीवन का सबसे निर्णायक मोड़ साबित होने वाला था। आंचल सरपंच अमर सिंह के घर पहुंची, लेकिन उस वक्त सरपंच का परिवार किसी काम से बाहर गया हुआ था। घर पर केवल सरपंच का इकलौ quy बेटा तेजबीर था।

तेजबीर एक बिगड़ा हुआ और विलासी युवक था। जैसे ही उसने आंचल को दरवाजे पर देखा, उसके मन में नकारात्मक विचार आने लगे। जब आंचल ने अपनी आर्थिक तंगी और बेटी की पढ़ाई के खर्च का जिक्र किया, तो तेजबीर ने उसकी मदद करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन एक बेहद शर्मनाक शर्त के साथ। उसने आंचल की मजबूरी का फायदा उठाकर उसे गलत रास्ते पर चलने के लिए उकसाया।

आंचल, जो अपनी बेटी की फीस और वर्दी के लिए व्याकुल थी, उस क्षण कमजोर पड़ गई। उसने तेजबीर की शर्तों को स्वीकार कर लिया और यहीं से एक ऐसे अनैतिक संबंधों की शुरुआत हुई, जिसने आगे चलकर दो परिवारों को तबाह कर दिया।

अध्याय 4: रिश्तों का जाल और दोहरा खेल

समय बीतने के साथ तेजबीर का आना-जाना आंचल के घर बढ़ गया। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब तेजबीर की नजर आंचल की जवान बेटी पूनम पर पड़ी। तेजबीर के इरादे अब और भी खतरनाक हो गए थे। उसने न केवल आंचल के साथ संबंध बनाए रखे, बल्कि धीरे-धीरे पूनम को भी अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया।

हैरानी की बात यह थी कि पूनम भी, अपनी कम उम्र और नासमझी के कारण, तेजबीर की ओर आकर्षित होने लगी। उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति को वह पसंद कर रही है, उसके उसकी मां के साथ भी अनैतिक संबंध हैं। मां-बेटी एक-दूसरे से अनजान, एक ही व्यक्ति के साथ विश्वासघात के भंवर में फंस चुकी थीं।

अध्याय 5: अंगूठी और खुलासे की रात

29 दिसंबर 2025 को आंचल ने तेजबीर से एक सोने की अंगूठी की मांग की। तेजबीर ने अपने घर में चोरी करके पैसे जुटाए और शहर से दो अंगूठियां खरीदीं—एक आंचल के लिए और एक पूनम के लिए। उस दोपहर जब तेजबीर आंचल के घर पर था और दोनों कमरे में बंद थे, तभी पूनम स्कूल से अचानक वापस आ गई।

पूनम ने जो देखा, उसने उसके पैरों तले जमीन खिसका दी। कमरे का नजारा देखकर वह समझ गई कि उसकी मां और उसका प्रेमी उसे धोखा दे रहे हैं। उस क्षण पूनम के भीतर दुख से ज्यादा प्रतिशोध की ज्वाला भड़क उठी। उसने उस वक्त तो कुछ नहीं कहा, लेकिन उसके दिमाग में एक खौफनाक योजना बन चुकी थी।

अध्याय 6: कत्ल की वो खौफनाक रात

रात के सन्नाटे में जब आंचल गहरी नींद में सो रही थी, पूनम उठी। उसके हाथ में एक तेज ब्लेड था। उसने बिना सोचे-समझे अपनी ही मां का गला काट दिया। आंचल को चीखने तक का मौका नहीं मिला। अपनी मां को खत्म करने के बाद, पूनम ने तेजबीर को फोन किया और उसे मिलने के लिए खेत वाले कमरे में बुलाया।

तेजबीर, जो पूनम के इरादों से पूरी तरह बेखबर था, खुशी-खुशी वहां पहुंच गया। वहां भी दोनों के बीच वही अनैतिक गतिविधियां शुरू हुईं, लेकिन मौका मिलते ही पूनम ने वही खूनी खेल तेजबीर के साथ भी खेला। उसने तेजबीर पर जानलेवा हमला किया और उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी।

अध्याय 7: आत्मसमर्पण और न्याय की प्रतीक्षा

इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद, पूनम भागी नहीं। वह सीधे पुलिस स्टेशन पहुंची और दरोगा महेंद्र सिंह के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि कैसे धोखे और अपमान ने उसे इस हद तक जाने पर मजबूर कर दिया।

जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, तो नजारा देखकर अनुभवी अधिकारियों के भी रोंगटे खड़े हो गए। एक 10वीं कक्षा की छात्रा ने इतनी बेरहमी से दो हत्याएं की थीं, यह किसी के लिए भी विश्वास करना मुश्किल था।

निष्कर्ष: यह कहानी हमें सिखाती है कि अनैतिकता और विश्वासघात का रास्ता हमेशा विनाश की ओर ले जाता है। आंचल की मजबूरी, तेजबीर का लालच और पूनम का प्रतिशोध—इन तीनों ने मिलकर एक हंसते-खेलते संसार को श्मशान में बदल दिया। आज पूनम जेल की सलाखों के पीछे है, और कैली गांव की हवाओं में आज भी उस रात की चीखें महसूस की जा सकती हैं।

नैतिक शिक्षा: रिश्तों में ईमानदारी और मर्यादा का होना अत्यंत आवश्यक है। गलत रास्ते का अंत हमेशा दुखद ही होता है।