“मैडम के पति तो अंदर हैं!” — और मेरा घर उसी दिन टूट गया

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मैडम के पति तो अंदर हैं!” — और मेरा घर उसी दिन टूट गया

भाग 1: एक आम दिन की शुरुआत

राजेश शर्मा अपनी पत्नी, राधिका के लिए एक सरप्राइज तैयार करने निकला था। एक साधारण सा दिन, एक साधारण सा कदम, लेकिन उस दिन के बाद जो हुआ, वह न सिर्फ उसकी दुनिया को बदलने वाला था, बल्कि उसके जीवन के सबसे बड़े विश्वास को भी चुराने वाला था।

राजेश ने सोचा था कि आज वह अपनी पत्नी के लिए कुछ खास करेगा। वह उसे यह दिखाएगा कि वह कितनी अच्छी तरह उसकी परवाह करता है। राजेश की पत्नी राधिका एक बड़ी आईटी कंपनी की सीईओ थी। उसका काम दिन-रात की मीटिंग्स, कॉन्फ्रेंस कॉल्स, और इन्वेस्टर्स के अपडेट्स से भरा हुआ था। राजेश के पास वक्त की कमी नहीं थी, लेकिन वह जानता था कि उसे अपनी पत्नी के लिए कुछ खास करना चाहिए।

भाग 2: राधिका की दुनिया और राजेश की तकलीफ

राजेश के लिए शादी का मतलब था एक-दूसरे का साथ देना, रिश्ते को संभालना और एक दूसरे की ख्वाहिशों को पूरा करना। लेकिन राधिका के लिए यह सब कुछ अलग था। वह ऑफिस में व्यस्त रहती थी और घर आने के बाद भी वही तनाव, वही थकावट। राजेश ने कभी अपनी पत्नी से शिकायत नहीं की। वह जानता था कि वह उसके साथ है, बस उसे कभी समझने का वक्त नहीं मिलता।

राजेश का छोटा सा काम था, लेकिन वह उसमें संतुष्ट था। उसे लगता था कि शादी में सपोर्ट का मतलब है दूसरे की उड़ान के लिए रास्ता साफ करना। यही उसका कर्तव्य था। राधिका की जिम्मेदारियां बहुत बड़ी थीं, लेकिन राजेश को लगता था कि उसकी जिम्मेदारी यही है कि वह घर को संभाले और राधिका को अपना काम करने का पूरा समय दे।

लेकिन अब एक दिन ऐसा आया जब राधिका के दिन की व्यस्तता और राजेश की अकेली दुनिया का सामना हुआ। राजेश ने तय किया कि वह राधिका को सरप्राइज देने के लिए ऑफिस जाएगा। उसने टिफिन में राधिका की पसंदीदा फिल्टर कॉफी और कुछ स्वादिष्ट खाने का सामान रखा। उसका दिल भर आया था यह सोचकर कि वह राधिका को एक पल के लिए अपने बारे में सोचने का मौका देगा।

भाग 3: ऑफिस में एक अजनबी का सामना

राजेश को राधिका के ऑफिस में गाड़ी से ड्रॉप करने के बाद जब वह अंदर गया, तो वहां का माहौल कुछ अलग था। उसे पहले तो सिक्योरिटी डेस्क पर रोक लिया गया। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं सीईओ का पति हूं, बस यह टिफिन और कॉफी दे दूंगा।” गार्ड ने उसे देखा और मुस्कुराया। वह समझ नहीं पाया कि राजेश किस दुनिया में है। गार्ड ने कहा, “सर, सीईओ के पति तो रोज आते हैं। देखिए, वह लिफ्ट से आ रहे हैं।”

राजेश ने पलटकर देखा तो एक आदमी लिफ्ट से बाहर आ रहा था। वह महंगे सूट में था और उसकी चाल में कॉन्फिडेंस था। गार्ड ने उसे “सर” कहकर सलाम किया। राजेश को समझते देर नहीं लगी। वह गार्ड की तरफ देखकर बोला, “आपने यह कैसे जान लिया?” गार्ड ने कहा, “सर, यही तो रूटीन है।”

राजेश ने धीरे से टिफिन और कॉफी का फ्लास्क पकड़ा और बिना किसी रुकावट के ऑफिस में चला गया। वह समझ चुका था कि यह कोई साधारण कहानी नहीं है।

भाग 4: राजेश का दिल टूटा

जैसे ही राजेश ऑफिस के रिसेप्शन पर पहुंचा, उसने देखा कि राधिका अपने पार्टनर के साथ खड़ी थी। वह शांत थी और उसके चेहरे पर वही कॉर्पोरेट शांति थी, जो हमेशा से थी। राजेश ने धीरे से टिफिन और कॉफी का फ्लास्क आगे बढ़ाया। राधिका ने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद, लेकिन तुमने मुझे बताया नहीं कि तुम आ रहे हो।” राजेश ने हल्के से कहा, “बस सोचा था कि एक छोटा सा सरप्राइज दूं।”

लेकिन राधिका की मुस्कान अब थोड़ी अजीब सी लगने लगी थी। उसकी मुस्कान उतनी सच्ची नहीं थी, जितनी वह हमेशा देती थी। राजेश ने सोचा कि शायद आज का दिन कुछ खास है, लेकिन फिर उसे महसूस हुआ कि यह कुछ और ही है।

भाग 5: राजेश का दिल टूट गया

राजेश ने धीरे से पूछा, “क्या तुम ऑफिस के पार्टनर के साथ इस तरह से मिलती रहती हो?” राधिका ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी आँखों में एक घबराहट थी। राजेश ने देखा कि उसकी पत्नी के आसपास कुछ और लोग थे, जिनकी मौजूदगी उसे पहले कभी महसूस नहीं हुई थी।

राजेश का दिल टूट चुका था। उसे समझ आ गया कि अब वह किसी और के साथ नहीं है। उसकी पत्नी ने उसे नजरअंदाज किया था, और इसने उसे समझने का एक और मौका नहीं दिया था।

भाग 6: सच्चाई का खुलासा

राजेश की मानसिक स्थिति अब बिल्कुल खराब हो चुकी थी। वह अपने घर लौट आया, लेकिन उसे पूरी तरह से यह समझ में आ चुका था कि उसकी पत्नी और वह अलग हो चुके थे। उसने अपनी पत्नी से कभी नहीं पूछा था कि वह क्या चाहती थी, लेकिन अब उसे यह एहसास हुआ कि वह पूरी तरह से अकेला था।

लेकिन अब एक नया कदम उठाना था। राजेश ने तय किया कि वह अपनी जिंदगी को नए तरीके से जीएगा। उसने किसी से बात करने का फैसला किया और यह समझने की कोशिश की कि उसके रिश्ते की जड़ें कहां तक गई थीं।

निष्कर्ष

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि रिश्ते में भरोसा और ईमानदारी सबसे जरूरी है। कभी भी किसी के साथ खुद को समझाने का प्रयास मत करो, क्योंकि सच्चे रिश्ते वही होते हैं जो बिना किसी दिखावे के होते हैं।