यूपी के शामली में 58 वर्षीय अब्बास अली को पुलिस ने पहले रोजा को गिरफ्तार कर ली फिर जो हुआ ?

रिश्तों का कत्ल: एक ससुर की काली करतूत
उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव ईसोपुर खुरगान में 19 फरवरी 2026 को एक ऐसी खौफनाक सच्चाई सामने आई, जिसने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया। 58 वर्षीय अब्बास अली, जिसकी सफेद दाढ़ी और सिर पर टोपी उसे एक सम्मानित और धार्मिक बुजुर्ग की छवि देती थी, के चेहरे के पीछे एक /दरिंदा/ छिपा था। यह कहानी एक ऐसे विश्वासघात की है जहाँ रक्षक ही /भक्षक/ बन गया।
घटना की विस्तृत पृष्ठभूमि
अब्बास अली का परिवार छोटा था। उसकी पत्नी की मृत्यु कई साल पहले हो चुकी थी। उसका इकलौता बेटा सलमान (28 वर्ष), जो शादीशुदा था और अपनी पत्नी मुस्करा (25 वर्ष) से बेइंतहा मोहब्बत करता था। मुस्करा कैराना की रहने वाली थी और बेहद खूबसूरत थी। उनका एक साल का बेटा भी है, जिसका नाम अदनान है।
पिछले छह महीनों से सलमान आर्थिक तंगी दूर करने के लिए पंजाब के लुधियाना शहर में एक निजी कंपनी में नौकरी कर रहा था। घर पर मुस्करा अपने मासूम बच्चे और ससुर अब्बास अली के साथ रहती थी। पड़ोसियों के अनुसार, सलमान और मुस्करा के बीच कभी कोई विवाद नहीं हुआ था और वे एक खुशहाल जीवन जी रहे थे।
11 फरवरी की वह काली रात और रहस्यमयी मौत
बात 11 फरवरी 2026 की रात की है। मुस्करा ने रोज़ की तरह खाना बनाया, अपने ससुर को खिलाया और फिर अपने कमरे में बेटे के साथ सोने चली गई। अगले दिन, 12 फरवरी की सुबह जब काफी देर तक मुस्करा के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो अब्बास अली ने उसे जगाने का नाटक किया।
जब अंदर से कोई जवाब नहीं मिला, तो उसने पड़ोसियों को इकट्ठा किया। पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने जब दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का नज़ारा भयावह था। मुस्करा की /लाश/ खाट पर पड़ी थी और उसका एक साल का बच्चा पास ही सो रहा था। अब्बास अली ने उस समय ऐसा विलाप किया कि पुलिस और ग्रामीणों को उस पर ज़रा भी शक नहीं हुआ। कमरे की कुंडी अंदर से बंद होने के कारण शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की तफ्तीश
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब मुस्करा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि गला घोंटकर की गई /हत्या/ थी। शामली पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यदि दरवाजा अंदर से बंद था, तो /कातिल/ अंदर कैसे पहुँचा और वारदात को अंजाम देकर बाहर कैसे निकला?
पुलिस ने मुस्करा के मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगाली। जांच में एक नंबर मिला जिससे मुस्करा की पिछले 3-4 महीनों से लगातार बात हो रही थी। वह नंबर जावेद अली का था, जो कैराना का रहने वाला था और मुस्करा का पुराना प्रेमी था।
बंद कमरे का राज और जावेद का खुलासा
पुलिस ने जब जावेद अली को हिरासत में लिया, तो उसने एक ऐसा सच बताया जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। जावेद ने कुबूल किया कि वह 11 फरवरी की शाम को मुस्करा से मिलने उसके घर गया था, लेकिन वह उसे जीवित और स्वस्थ छोड़कर आया था।
जावेद ने बताया कि मुस्करा के ससुर अब्बास अली की नियत अपनी बहू पर खराब थी। अब्बास ने ही खुद जावेद से संपर्क किया था और उसे अपने घर बुलाना शुरू किया था। वह जावेद का इस्तेमाल एक मोहरे की तरह कर रहा था। अब्बास ने जावेद को मुस्करा से मिलने की छूट इस शर्त पर दी थी कि जावेद मुस्करा को इस बात के लिए मनाए कि वह अपने ससुर (अब्बास) के साथ भी /गलत संबंध/ बनाए। मुस्करा ने अपने ससुर की इस /घिनौनी/ मांग को बार-बार ठुकराया था और जावेद को भी इससे दूर रहने को कहा था।
ससुर का खौफनाक कबूलनामा और तकनीक
19 फरवरी 2026 को, जब रमजान का पवित्र महीना चल रहा था और अब्बास अली रोजे की हालत में था, पुलिस ने उसे उसके घर से उठा लिया। शुरुआत में ग्रामीणों ने एक “नमाजी” व्यक्ति की गिरफ्तारी का विरोध किया, लेकिन जब पुलिस ने सबूत पेश किए, तो पूरा गांव स्तब्ध रह गया।
अब्बास ने पुलिस की सख्ती के आगे घुटने टेक दिए और पूरी साजिश का खुलासा किया:
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सिटकनी खोलने की तकनीक: अब्बास ने बताया कि उसने दरवाजे के एक छोटे से छेद के जरिए तार की मदद से अंदर की सिटकनी को ऊपर उठा लिया था।
वारदात: वह रात के करीब 12 बजे मुस्करा के कमरे में घुसा और उसके बेड पर लेट गया। जब मुस्करा की नींद खुली और उसने विरोध किया, तो अब्बास ने उसे /दबोच/ लिया। मुस्करा ने उसे धक्का दिया, जिससे गुस्साए अब्बास ने उसका गला तब तक दबाया जब तक उसकी जान नहीं निकल गई।
कमरा बंद करने का झांसा: /हत्या/ के बाद वह कमरे से बाहर निकला और उसी तार के जरिए सिटकनी को वापस नीचे गिरा दिया, जिससे पुलिस को लगे कि दरवाजा अंदर से ही बंद था।
बेटे का शर्मनाक साथ
इस मामले का सबसे दुखद पहलू यह था कि जब अब्बास ने /हत्या/ के बाद अपने बेटे सलमान को फोन किया, तो सलमान ने अपनी पत्नी के लिए न्याय मांगने के बजाय अपने /कातिल/ पिता का साथ दिया। सलमान को पूरी सच्चाई पता थी, लेकिन उसने पुलिस को गुमराह किया।
निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति
पुलिस ने अब्बास अली को मुख्य /अभियुक्त/ के रूप में और सलमान को साक्ष्य छुपाने और /अपराध/ में सहयोग करने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को जिला अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
सीख: यह घटना समाज के उस चेहरे को उजागर करती है जहाँ “टोपी और दाढ़ी” के पीछे /हैवानियत/ छिपी हो सकती है। यह हमें सिखाती है कि रिश्तों का सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में होना चाहिए। एक मासूम माँ की जान केवल इसलिए चली गई क्योंकि उसने अपनी गरिमा और चरित्र से समझौता करने से इंकार कर दिया था।
समाज की प्रतिक्रिया: मुस्लिम समाज और ईसोपुर खुरगान के निवासियों ने इस कृत्य की घोर निंदा की है। लोगों का कहना है कि पवित्र रमजान के महीने में ऐसी /नापाक/ और /दरिंदगी/ भरी हरकत करने वाला व्यक्ति समाज और धर्म के नाम पर एक काला धब्बा है। उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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