Food Delivery वाले गरीब पति ने लिया घमंडी Bank PO पत्नी से बदला |

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“सुशांत की यात्रा”

सुशांत एक साधारण आदमी था, जो रोज़ की तरह काम करने के लिए उठता और एक साधारण बाइक पर काम पर जाता था। वह शहर में एक प्राइवेट मेडिकल कंपनी में काम करता था और उसकी मासिक तनख्वाह महज ₹25,000 थी। लेकिन सुशांत के अंदर एक सपना था, वह अपनी पत्नी काव्या के साथ एक अच्छा जीवन जीना चाहता था, और वह जानता था कि उसे अपनी मेहनत से ही इसे हासिल करना होगा।

काव्या एक पढ़ी-लिखी और महत्वाकांक्षी लड़की थी, जिसे सरकारी नौकरी की तैयारी करनी थी। वह एक प्राइवेट स्कूल में काम करती थी, लेकिन उसका सपना था कि वह सरकारी बैंक पीओ बने। काव्या के लिए यह सिर्फ एक नौकरी नहीं थी, बल्कि यह उसका भविष्य और परिवार की समृद्धि का रास्ता था। सुशांत ने अपनी सारी बचत, ओवरटाइम और कर्ज लेकर काव्या की कोचिंग की फीस का इंतज़ाम किया था, ताकि वह अपने सपने को पूरा कर सके।

सुशांत का जीवन अब एक मशीन की तरह चलने लगा था। वह दिन में डॉक्टरों के पास दवाइयाँ पहुंचाता और रात में स्विग्गी या जोमैटो का डिलीवरी बॉय बनकर काम करता। जब काव्या रजाई में बैठकर अपनी पढ़ाई करती, सुशांत सड़क पर कांपते हुए खाना पहुंचा रहा होता। काव्या का सपना था कि वह एक दिन सरकारी अधिकारी बने, और सुशांत ने इस सपने के लिए अपनी सारी मेहनत लगा दी थी।

दो साल की कठिन मेहनत के बाद काव्या का सिलेक्शन सरकारी बैंक पीओ के पद पर हो गया। सुशांत खुशी से रो पड़ा और पूरे मोहल्ले में मिठाई बांटी। उसकी मेहनत रंग लाई थी, लेकिन काव्या की दुनिया अब बदल चुकी थी। वह अब अपनी पुरानी दुनिया से बाहर निकल चुकी थी, जहाँ केवल सुशांत और उसकी मेहनत थी। अब काव्या के पास एक नई नौकरी थी, नई दुनिया थी, और नए दोस्त थे।

काव्या की पहली पोस्टिंग एक दूर शहर में हुई थी, जहां उसे एक बड़े बैंक में काम करने का मौका मिला। सुशांत ने अपनी बचत से काव्या के लिए नया स्कूटर और कपड़े खरीदे और उसे वहां छोड़ने गया। लेकिन काव्या की दुनिया अब पूरी तरह से बदल चुकी थी। वह अब उन लोगों के साथ घूमा करती थी जो उसकी नई दुनिया का हिस्सा थे।

सुशांत ने महसूस किया कि काव्या अब उसे पहले की तरह समय नहीं दे रही थी। वह कभी भी उसे फोन नहीं उठाती थी, और हमेशा व्यस्त रहती थी। सुशांत को यह सब सही नहीं लगता था, लेकिन फिर भी वह काव्या के साथ अपना रिश्ता बनाए रखने की कोशिश करता रहा।

एक दिन सुशांत को काव्या के फ्लैट में कुछ ऐसा दिखाई दिया जो उसकी दुनिया को बदलने वाला था। सुशांत ने देखा कि काव्या रवि नामक एक सीनियर बैंक अधिकारी के साथ हाथ पकड़े खड़ी थी। काव्या का चेहरा पहले की तरह खुश था, वह एक ऐसे इंसान के साथ खड़ी थी जिसे सुशांत जानता था, लेकिन जिसको कभी उसने अपना प्रतिस्पर्धी नहीं समझा था।

जब सुशांत ने काव्या से इस बारे में बात की, तो काव्या ने झूठ बोलते हुए कहा कि वह सिर्फ एक दोस्त है। लेकिन जब काव्या ने खुलकर अपने मन की बात सुनी, तो उसने सुशांत से कहा, “सुशांत, तुम मुझे अब समझ नहीं पाते। मैं एक क्लास वन अफसर हूं, मेरी सैलरी ₹80,000 है और तुम्हारी ₹25,000। हम दोनों की सोच और रहन-सहन बिल्कुल अलग हैं। मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकती।”

काव्या ने सुशांत से म्यूचुअल डिवोर्स की मांग की। सुशांत ने कोशिश की, लेकिन काव्या ने अपनी राह चुन ली थी। सुशांत ने अपनी सारी मेहनत और पैसे काव्या पर लुटा दिए थे, लेकिन काव्या ने उसे छोड़ दिया।

काव्या ने सुशांत पर घरेलू हिंसा का झूठा आरोप लगा दिया और एक केस दर्ज करवा दिया। काव्या ने कहा कि सुशांत उसकी सैलरी छीनता था, उसे मारता पीटता था और उसके साथ दुर्व्यवहार करता था। पुलिस ने सुशांत और उसके पिता को थाने में बैठाया और सुशांत की मां को सदमे के कारण दिल का दौरा पड़ा।

अदालत में जब पहली बार पेशी हुई, तो काव्या एक नई कार से आई और सुशांत बस या ऑटो से। काव्या के महंगे वकील ने कहा कि सुशांत को हर महीने ₹10,000 मेंटेनेंस देना चाहिए। लेकिन सुशांत ने कोर्ट में सच्चाई का सामना किया। उसने बैंक से काव्या की सैलरी स्लिप और रेवेन्यू डॉक्यूमेंट्स लाकर अदालत में पेश किए। कोर्ट ने काव्या पर पर्जरी का केस दर्ज किया और उसे मानसिक उत्पीड़न के लिए ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया।

काव्या की जिंदगी अब बदल चुकी थी। वह अब एक छोटे से प्राइवेट कंपनी में काम करने लगी थी। उसकी नौकरी चली गई, और वह एक छोटे से गांव में रह रही थी। सुशांत ने भी अपनी फार्मा कंपनी शुरू की और धीरे-धीरे अपना जीवन फिर से संवार लिया।

काव्या और सुशांत का रिश्ता अब खत्म हो चुका था। काव्या अब सड़क पर खड़ी थी, और सुशांत अपनी नई कार में अपने भविष्य की ओर बढ़ रहा था। काव्या ने अपनी गलती का एहसास किया, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। सुशांत ने अपनी मेहनत से जो खोया था, वह अब कभी वापस नहीं आएगा, लेकिन उसने यह समझ लिया कि आत्मविश्वास और संघर्ष से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।