कर्मचारी और इंस्पेक्टर ने मिलके IAS मैडम के पिता का लैपटॉप हैक कया फिर लैपटॉप ब्लास्टह गया फिर जो

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कर्मचारी और इंस्पेक्टर ने मिलकर IAS मैडम के पिता का लैपटॉप हैक किया—फिर लैपटॉप ब्लास्ट हो गया, फिर जो हुआ…

प्रस्तावना

शहर की सबसे चर्चित सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक थे अमित। उनकी पहचान ही उनकी मेहनत और ईमानदारी थी। अमित की एक बेटी थी—रूपा, जो बचपन से ही होशियार और जिद्दी थी। उसका सपना था कि वह एक दिन देश की सेवा करे और अपने पिता का नाम रोशन करे। अमित ने अपनी बेटी को खूब पढ़ाया, उसका हौसला बढ़ाया, और आखिरकार रूपा एक प्रतिष्ठित IAS अधिकारी बन गई।

एक दिन रूपा ने अपने पिता से कहा, “पापा, आपने मेरा सपना पूरा कर दिया।” अमित मुस्कुराए, बेटी के सिर पर हाथ फेरा और ऑफिस चले गए। उसी दिन रूपा भी साधारण कपड़ों में अपने पापा के ऑफिस की ओर निकली। वह जानना चाहती थी कि उनके ऑफिस में कर्मचारियों का व्यवहार कैसा है, खासकर बाहरी लोगों के प्रति। वह ऑटो से पहुंची, क्योंकि उसकी सादगी ही उसकी असली पहचान थी।

ऑफिस के बाहर का सच

ऑफिस के गेट पर एक गार्ड—अंकित—खड़ा था। रूपा ने विनम्रता से कहा, “मुझे अंदर जाना है, गाड़ी के पास कुछ जरूरी काम है।” अंकित ने रूखेपन से जवाब दिया, “मैडम, आप अंदर नहीं जा सकती। आप जैसे गरीबों के लिए मैं गेट नहीं खोल सकता। यहां से जाइए।”

रूपा हैरान थी। उसने पूछा, “क्यों? अचानक क्या हुआ? मुझे बहुत जरूरी काम है।” अंकित ने फिर से उसे टोक दिया, “यहां अमीर लोग आते हैं, गरीबों की कोई जगह नहीं।” रूपा साधारण कपड़ों में थी, इसलिए गार्ड ने उसे पहचान नहीं पाया। वह कपड़ों से लोगों की औकात आंकता था।

अंकित ने और लोगों को फोन करके बाहर बुला लिया। कुछ कर्मचारी बाहर आए, उनमें से एक—अनुराग—ने रूपा को देखकर बेहूदा बातें शुरू कर दीं। “तू तो बहुत ही खूबसूरत है रे लड़की। आज तक तेरे जैसी लड़की नहीं देखी।” रूपा ने कड़क आवाज में कहा, “अगर आप मुझ पर गलत नजर डालेंगे, तो मैं आपको जेल भिजवा दूंगी।”

असली मकसद

असल में रूपा यह देखना चाहती थी कि उसके पिता की कंपनी में काम करने वाले लोग बाहरी व्यक्तियों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। कर्मचारी अनुराग बोला, “अगर तू चाहे तो मैं तुझे नौकरी दिला सकता हूं।” रूपा भड़क गई, “क्या आप अपनी बहन-बेटियों पर भी ऐसी नजर डालते हैं? आपकी सोच बहुत गिरी हुई है।”

अंकित बीच में चिल्लाया, “ए लड़की, यहां से चलती बन वरना पुलिस को बुला दूंगा।” अनुराग ने तंज कसते हुए कहा, “अच्छी लड़की, तू तो बड़ी बदतमीज निकली।” फिर पुलिस इंस्पेक्टर विक्रम को फोन लगाया, “यह लड़की हमें परेशान कर रही है, जल्दी आ जाइए।”

इंस्पेक्टर विक्रम ने फोन पर कहा, “तू भी बहुत अच्छा काम कर रहा है। फैक्ट्री में जो छेड़छाड़ कर रहा है, उसकी वजह से हमारी अच्छी कमाई हो रही है।” रूपा सब सुन रही थी। वह जानना चाहती थी कि कंपनी के भीतर क्या-क्या गलत हो रहा है।

थाने में साजिश

पुलिस की गाड़ी आई, इंस्पेक्टर विक्रम उतरते ही बोला, “क्या हुआ अनुराग, मुझे इतनी जल्दी क्यों बुलाया?” अनुराग ने रूपा की ओर इशारा किया, “देखिए ना, यह लड़की हमें परेशान कर रही है।” विक्रम गुस्से में बोला, “ए लड़की, जल्दी यहां से निकल जा, वरना घसीटते हुए थाने ले जाऊंगा।”

रूपा ने शांत लेकिन कड़क आवाज में कहा, “मुझे अंदर जाना है, जरूरी काम है।” गार्ड चिढ़कर बोला, “यह लड़की बहुत ही बदतमीज है।” इंस्पेक्टर विक्रम दहाड़ा, “चल, तुझे अब सीधे थाने ही ले जाना पड़ेगा।”

तीनों ने मिलकर प्लान बनाया कि रूपा को जेल में बंद कर दिया जाए ताकि वह उनके काले कारनामों के बीच ना आए। वे उसे डराकर गाड़ी की तरफ ले जाने लगे। रूपा पास खड़ी होकर उनकी सारी बातें सुन रही थी।

अनुराग बोला, “हम तीनों ही कंपनी को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं। बस इस लड़की को हटाओ, फिर हमारा रास्ता साफ है।”

जेल में जाल

रूपा को थाने ले जाकर जेल में डाल दिया गया। इंस्पेक्टर विक्रम ने धमकी दी, “तेरी जुबान बहुत चलती है। अभी लाठी और थप्पड़ मार के बेहोश कर दूंगा।” रूपा ने हिम्मत से जवाब दिया, “अगर आप एक महिला को धमकी देंगे तो मैं आप पर केस कर दूंगी।”

रूपा के पास एक स्पाई माइक छिपा था, जिसमें उन सबकी बातें रिकॉर्ड हो रही थीं। यह डेटा उसके घर पर रखे डिवाइस में सेव हो रहा था। अब उसके पास सबूत था कि कैसे कर्मचारी और इंस्पेक्टर मिलकर कंपनी को लूट रहे हैं।

अनुराग ने फोन पर विक्रम से कहा, “मुझे अमित के लैपटॉप, घर के कैमरों और गाड़ी की रिकॉर्डिंग का एक्सेस चाहिए। हम उसे पूरी तरह अपनी मुट्ठी में कर लेंगे।”

लैपटॉप ब्लास्ट

ऑफिस में अमित जी अपने लैपटॉप पर काम कर रहे थे कि अचानक लैपटॉप असामान्य रूप से गर्म होने लगा। वे सोच में पड़ गए कि यह तकनीकी खराबी है या कोई हैकिंग। तभी लैपटॉप में जोरदार धमाका हुआ, धुआं और आग निकलने लगी। अमित जी घबराकर पीछे हटे। दरअसल, अनुराग ने लैपटॉप को हैक कर ओवरलोड कर दिया था, जिससे बैटरी फट गई और आग लग गई।

अनुराग अपनी सीट पर बैठा सब देख रहा था, लेकिन जब सिग्नल कट गए तो वह घबराया। वह भागकर केबिन में गया, आग देखकर नाटक करने लगा, “सर, यह क्या हो गया?” दोनों किसी तरह ऑफिस से बाहर निकले।

सच्चाई उजागर

अमित जी घर पहुंचे तो वहां एक फोन रखा था। उसमें रूपा और इंस्पेक्टर विक्रम की बातचीत की रिकॉर्डिंग थी। उन्हें पता चला कि उनकी बेटी जेल में बंद है और इंस्पेक्टर से भिड़ रही है। अमित जी घबराए, गाड़ी तेज दौड़ाते हुए थाने पहुंचे। सलाखों के पीछे बेटी को देख रो पड़े।

रूपा ने कहा, “पापा, कंपनी में आग लगना और मेरा यहां होना सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। मुझे यह सब बेनकाब करना है।”

अमित जी ने इंस्पेक्टर विक्रम से पूछा, “यह सब क्या तमाशा है? मेरी बेटी तो एक IAS ऑफिसर है। आपने उसे किस हक से जेल में डाला?”

विक्रम के चेहरे का रंग उड़ गया। उसे समझ आ गया कि अब उसकी नौकरी और जिंदगी दोनों खतरे में हैं।

आग पर काबू और न्याय

रूपा और अमित जी फैक्ट्री पहुंचे। रूपा ने फायर ब्रिगेड को फोन किया, “जल्दी पहुंचो, वरना पूरा शहर तबाह हो सकता है।” आग बुझाई गई। रूपा ने अनुराग, गार्ड और विक्रम के सामने सबूत पेश किए—एक पेन ड्राइव जिसमें सारी बातें रिकॉर्ड थीं।

रूपा ने उच्च अधिकारियों को कॉल किया, “इंस्पेक्टर विक्रम ने शक्तियों का दुरुपयोग किया है, अपराधियों का साथ दिया है। इन्हें तुरंत सस्पेंड किया जाए और विभागीय जांच शुरू हो।”

तीनों को पुलिस वैन में डाल दिया गया। अमित जी ने बेटी की बहादुरी देखकर गर्व से आंखें नम कर लीं।

अंतिम संदेश