उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों एक अजीब और नाटकीय मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां इस्तीफा अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रदर्शन, भावनात्मक अभिनय और आगामी चुनावों की आहट का संकेत बनता जा रहा है। बीते दो दिनों में दो वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफों ने न केवल सरकार और विपक्ष को, बल्कि आम जनता और मीडिया को भी चौंका दिया है। एक ओर योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ आरोप लगाते हुए एक सिटी मजिस्ट्रेट ने पद छोड़ा, तो दूसरी ओर योगी सरकार के समर्थन में एक जीएसटी डिप्टी कमिश्नर ने आंसुओं के साथ कैमरे के सामने इस्तीफे का ऐलान कर दिया।
इस्तीफा या नाटक?
सबसे ज्यादा चर्चा में रहा जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा। यह कोई साधारण त्यागपत्र नहीं था, बल्कि एक ऐसा दृश्य था जिसने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया। फोन पर पत्नी से बात करते हुए, रोते हुए, भावुक होकर यह कहते हुए कि “मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ… जिसका नमक खाया है, उसका हक अदा करना चाहिए”, यह पूरा घटनाक्रम किसी राजनीतिक थिएटर जैसा प्रतीत हुआ।
प्रश्न यह उठता है कि क्या यह वास्तव में नैतिक आक्रोश का परिणाम था या फिर सुनियोजित राजनीतिक प्रवेश की पटकथा? सरकारी सेवा के नियमों में इस्तीफा एक औपचारिक प्रक्रिया है, लेकिन यहां कैमरे, भावनाएं और मंच सब कुछ पहले से तैयार नजर आया।

शंकराचार्य बनाम योगी सरकार
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में चल रहा है शंकराचार्य और योगी आदित्यनाथ सरकार के बीच टकराव। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य द्वारा स्नान से इनकार, उनके शिष्यों के साथ कथित बदसलूकी, और उसके बाद शंकराचार्य द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई तीखी टिप्पणियों ने माहौल गरमा दिया।
एक दिन पहले ही बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने ब्राह्मणों के साथ कथित अन्याय, शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी नियमों को लेकर योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया था। उनका चार-पांच पन्नों का इस्तीफानामा सीधे सरकार के खिलाफ था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।
‘न्यूट्रलाइजेशन’ की राजनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों इस्तीफों को अलग-अलग घटनाओं की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। एक ब्राह्मण अधिकारी द्वारा सरकार के खिलाफ इस्तीफे के ठीक अगले दिन एक ठाकुर अधिकारी द्वारा सरकार के समर्थन में इस्तीफा देना, इसे ‘न्यूट्रलाइजेशन’ की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में जातिगत संतुलन हमेशा से राजनीति का अहम हिस्सा रहा है, और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे संकेत बेहद अहम माने जा रहे हैं।
‘नमक’ का सवाल
प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे में सबसे ज्यादा दोहराया गया शब्द था – ‘नमक’। लेकिन सवाल यह है कि एक सरकारी अधिकारी आखिर किसका नमक खाता है? मुख्यमंत्री का, प्रधानमंत्री का या फिर उस जनता का, जिसके टैक्स से उसकी सैलरी आती है? आलोचकों का कहना है कि अगर वास्तव में ‘नमक का हक’ अदा करना है, तो वह जनता के प्रति जवाबदेही से आता है – भ्रष्टाचार, सिस्टम की खामियों और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ आवाज उठाकर, न कि किसी राजनीतिक व्यक्ति के समर्थन में भावनात्मक नाटक करके।
राजनीतिक महत्वाकांक्षा की आहट
पत्रकारों और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, प्रशांत कुमार सिंह का नाम पहले भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा में रहा है। अमर सिंह के करीबी रह चुके सिंह की आजमगढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा की बातें सामने आ रही हैं। जीएसटी अधिकारी संघ के चुनाव में उनकी भागीदारी और कुछ राजनीतिक दलों से नजदीकियां इस ओर इशारा करती हैं कि यह इस्तीफा एक नई राजनीतिक पारी की भूमिका भी हो सकता है।
मीडिया और मंच
इस पूरे प्रकरण में मीडिया की भूमिका भी कम दिलचस्प नहीं रही। इस्तीफे के कुछ ही घंटों के भीतर दोनों अधिकारी टीवी चैनलों पर लाइव दिखाई दिए। कैमरों के सामने रोना, मुस्कुराना, सफाई देना और अपने कदम को ‘ऐतिहासिक’ बताना – यह सब बताता है कि अब प्रशासनिक फैसले भी मीडिया रणनीति का हिस्सा बन चुके हैं।
वरिष्ठ पत्रकारों ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि अगर यही चलन रहा, तो भविष्य में हर इस्तीफे के साथ एक रोते हुए वीडियो भी आएगा।
आगे क्या?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या होगा? क्या जिस अधिकारी ने सरकार के खिलाफ इस्तीफा दिया, उसी तरह सरकार के समर्थन में इस्तीफा देने वाले अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी? क्या दोनों मामलों में सेवा नियम समान रूप से लागू होंगे? या फिर यह सब आने वाले चुनावी समीकरणों का हिस्सा बनकर रह जाएगा?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह ‘इस्तीफा ड्रामा’ फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। इसमें आक्रोश है, अभिनय है, जातिगत समीकरण हैं और सबसे बढ़कर, सत्ता और राजनीति की वह जटिल परत है जहां नैतिकता और महत्वाकांक्षा अक्सर एक-दूसरे से टकरा जाती हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सब क्षणिक शोर था या फिर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत।
News
Yogi Adityanath के लिए रो-रोकर इस्तीफा, GST अधिकारी की ऐसी नौटंकी || Ajit Anjum
उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों एक अजीब और नाटकीय मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां इस्तीफा अब…
Katrina Kaif’s First look with her Baby Boy celebrating his 3Month Birthday with Vicky Kaushal
42 की उम्र में मातृत्व: समय, विज्ञान और एक नई सोच की कहानी जब 42 वर्ष की उम्र में कैटरीना…
बर्फ में 4 दिन भूखे-प्यासे रहकर कुत्ते ने निभाई ऐसी वफादारी || Ajit Anjum
नमस्कार दोस्तों, ज़रा कल्पना कीजिए… हिमाचल की ऊँची पहाड़ियों में भयंकर बर्फ़बारी हो रही है। चारों तरफ़ सफ़ेद चादर बिछी…
अमेरिका के ट्रेन स्टेशन पर विलियम एच कार्टर की कहानी (हिंदी में)
अमेरिका के ट्रेन स्टेशन पर विलियम एच कार्टर की कहानी (हिंदी में) कहते हैं, इंसान की असली पहचान उसके कपड़ों…
Khesari Lal Yadav and Wife Chanda Devi Campaign in Chhapra: “We’re Contesting to Serve, Not to Earn”
Khesari Lal Yadav and Wife Chanda Devi Campaign in Chhapra: “We’re Contesting to Serve, Not to Earn” Chhapra, Bihar —…
Parineeti Chopra Welcomes Baby Boy, Priyanka Chopra Celebrates Becoming an Aunt
Parineeti Chopra Welcomes Baby Boy, Priyanka Chopra Celebrates Becoming an Aunt Bollywood actress Parineeti Chopra and politician Raghav Chadha have…
End of content
No more pages to load





