राहुल और राजवीर सिंघानिया की कहानी: आसमान में बदल गई तकदीर
लखनऊ की एक पुरानी बस्ती में राहुल अपने माता-पिता के साथ रहता था। राहुल पढ़ाई में बहुत होशियार था, उसने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में गोल्ड मेडल के साथ ग्रेजुएशन किया था। लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया। पिता की बीमारी, घर का कर्ज और माँ के आँसू ने राहुल को मजबूर कर दिया कि वह दुबई मजदूरी करने जाए।
राहुल ने अपने सपनों और डिग्रियों को संदूक में बंद किया और माँ-बाप से झूठ बोला कि उसे दुबई में बड़ी कंपनी में नौकरी मिली है। उसने वीजा और टिकट के लिए घर का सामान तक बेच दिया। दिल्ली एयरपोर्ट पर उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन मजबूरी उसे आगे ले जा रही थी।
उसी फ्लाइट में राजवीर सिंघानिया भी थे—देश के बड़े बिजनेसमैन, जिनके लिए पैसा ही सबकुछ था। वह दुबई एक बड़ी डील के लिए जा रहे थे। फ्लाइट के दौरान अचानक राजवीर को दिल का दौरा पड़ा। प्लेन में कोई डॉक्टर नहीं था। एयर होस्टेस ने मदद के लिए आवाज लगाई।
राहुल ने कॉलेज के दिनों में सीपीआर सीखा था। उसने अपनी झिझक छोड़कर राजवीर सिंघानिया को सीपीआर देना शुरू किया। दस मिनट की मेहनत के बाद राजवीर को होश आ गया। पूरे प्लेन में तालियाँ बज उठीं। राजवीर को अस्पताल ले जाया गया और उनकी जान बच गई।

राहुल चुपचाप दुबई के मजदूर कैंप में काम करने लगा। उसकी जिंदगी मुश्किल थी, लेकिन उसने कभी श्रेय नहीं लिया। दूसरी ओर, राजवीर सिंघानिया ने जब अपनी जान बचाने वाले राहुल के बारे में सुना, तो उसे ढूँढने के लिए अपनी टीम लगा दी। आखिरकार, एक दिन राजवीर सिंघानिया खुद मजदूर कैंप पहुँचे और राहुल को ढूँढ निकाला।
राजवीर ने राहुल को गले लगा लिया और कहा, “तुमने मुझे दूसरी जिंदगी दी है। अब तुम मेरे साथ चलो।” उन्होंने राहुल का कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल करवाया, उसके परिवार का इलाज करवाया, सारा कर्ज चुकाया और राहुल को अपनी कंपनी में जनरल मैनेजर बना दिया।
शुरुआत में लोग राहुल का मजाक उड़ाते थे, लेकिन उसने अपनी मेहनत और ईमानदारी से सबका दिल जीत लिया। कंपनी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। राजवीर सिंघानिया भी बदल गए, अब वह समाज सेवा करने लगे और राहुल को अपना बेटा मान लिया।
आज राहुल एक सफल इंसान है, उसके माता-पिता खुश हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि इंसानियत, मेहनत और नेक दिल का फल जरूर मिलता है। एक छोटे से नेक काम ने राहुल की पूरी जिंदगी बदल दी।
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