कहानी: सुकून की तलाश
शहर की सड़कों पर रात के 9 बजे थे। हल्की बारिश की बूंदें सड़कों को चमका रही थीं, मानो तारों का प्रतिबिंब उन पर उतर आया हो। पुलिस की नीली बत्ती से आसपास का इलाका जगमगा रहा था। आईपीएस अदिति वर्मा अपनी सरकारी जीप में बैठी थीं, सायरन बंद था, लेकिन उनकी मौजूदगी ही लोगों को सतर्क करने के लिए काफी थी। वह रात के गश्त पर थीं, शहर की कानून व्यवस्था का जायजा लेने निकली थीं।
जैसे ही उनकी जीप एक भीड़भाड़ वाले इलाके में पहुंची, उनकी नजर एक पानीपुरी के ठेले पर पड़ी। ठेले के पास लोगों की भीड़ थी—कुछ बच्चे, महिलाएं, कॉलेज के लड़के-लड़कियां। हर कोई खुश और उत्साहित लग रहा था। ठेले वाला बड़े सधे हुए अंदाज में पानीपुरी बना रहा था। उसकी फुर्ती देखकर लगता था कि वह वर्षों से यही करता आ रहा है।
अदिति ने ठेले की ओर गौर से देखा। अचानक उनके मन में एक अजीब सी बेचैनी उठी। वह चेहरा, वह आदमी… अदिति की उंगलियां ठंडी पड़ गईं। कुछ पल के लिए उन्हें लगा कि शायद यह कोई भ्रम है, लेकिन नहीं, यह हकीकत थी। पानीपुरी बेचने वाला कोई और नहीं, बल्कि राहुल था—उनका तलाकशुदा पति। वही राहुल, जो कभी एक नामी आईटी कंपनी में सीनियर इंजीनियर था, लाखों का पैकेज था, बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स संभालता था… और आज वह सड़क किनारे पानीपुरी का ठेला चला रहा था।
अदिति के दिमाग में सवालों का तूफान उठने लगा—वह यहां कैसे पहुंच गया? क्या उसने दूसरी शादी कर ली? या फिर यह कोई सजा भुगत रहा है? अदिति ने हिम्मत जुटाकर ठेले के पास पहुंच गई। “एक प्लेट पानीपुरी बनाओ,” उन्होंने ठंडी लेकिन दृढ़ आवाज में कहा। राहुल ने नजरें उठाईं और एक पल के लिए स्तब्ध रह गया। उसके हाथ में चम्मच ठिटक गया। उसकी आंखों में शर्मिंदगी और हैरानी का मिश्रण था। वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। अदिति का दिल धक-धक कर रहा था। वह जानना चाहती थी कि आखिर राहुल के साथ ऐसा क्या हुआ कि वह इस हाल में पहुंच गया।

राहुल ने सिर झुकाकर पानीपुरी बनानी शुरू कर दी, मानो अदिति कोई साधारण ग्राहक हो। अदिति वहीं खड़ी उसे देखती रही। उसके मन में उथल-पुथल मची थी। कुछ साल पहले तक यह वही इंसान था जिसके साथ वह एक ही छत के नीचे रहती थी, जिसके साथ उसने जिंदगी के सपने बुने थे। और आज वह सड़क किनारे पानीपुरी बेच रहा था।
राहुल ने पानीपुरी की प्लेट अदिति की ओर बढ़ा दी। “मसालेदार या मीठा?” उसकी आवाज सपाट थी। अदिति को एक पल के लिए गुस्सा आया—क्या मेरी मौजूदगी से इसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता? उन्होंने कहा, “जैसा तुम्हें ठीक लगे।” राहुल ने सिर हिलाया और पानीपुरी बढ़ा दी। अदिति ने प्लेट थाम ली लेकिन उसका ध्यान खाने पर नहीं था, उसकी आंखें राहुल पर टिकी थीं।
“कब से कर रहे हो यह काम?” अदिति ने सवाल किया। राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया, बस पानीपुरी बनाता रहा। “राहुल, मैं तुमसे बात कर रही हूं।” अदिति की आवाज में अब एक आईपीएस अफसर की कड़कपन था। राहुल ने इस बार उसकी ओर देखा। उसकी आंखों में थकान थी, लेकिन ना शर्म थी ना गुस्सा। “जब से नौकरी गई तब से,” उसने शांत लहजे में कहा।
“पर क्यों? तुम्हारे पास तो अच्छी खासी नौकरी थी।” अदिति ने पूछा। राहुल ने हल्की कटु हंसी हंसी, “सब कुछ था अदिति, बस एक चीज नहीं थी—सुकून।”
अदिति चौंक गई। “मतलब?” राहुल ने एक ग्राहक की प्लेट में पानीपुरी डालते हुए कहा, “मतलब यह कि जिंदगी वही जीनी चाहिए जो मन को शांति दे। बड़े-बड़े दफ्तर देखे, हाईफाई लाइफस्टाइल जिया, ढेर सारा पैसा कमाया, लेकिन खुशी नहीं मिली।”
अदिति को लगा कि वह बहाने बना रहा है। “तो तलाक के बाद अचानक तुम्हें यह शांति मिल गई?” राहुल ने सीधे उसकी आंखों में देखा, “नहीं, तलाक के बाद मुझे सिर्फ एक सबक मिला—खुद को पहचानने का।”
अदिति खामोश हो गई। उसकी यादें अतीत में खो गईं। उनकी शादी सिर्फ तीन साल चली थी। उन तीन सालों में प्यार था, हंसी थी, लेकिन झगड़े भी थे। धीरे-धीरे बातें इतनी बिगड़ गईं कि तलाक ही आखिरी रास्ता बचा।
“तो तुम कहना चाहते हो कि आईटी कंपनी में तुम्हें खुशी नहीं मिली, लेकिन सड़क किनारे पानीपुरी बेचते हुए तुम्हें सुकून मिल गया?” अदिति ने पूछा।
राहुल ने हल्का सा मुस्कुराया, “हाँ, कम से कम अब मैं किसी और के बनाए नियमों पर नहीं जी रहा।”
तभी अचानक एक नन्ही सी लड़की दौड़ती हुई आई और राहुल से लिपट गई। “पापा!” उसने खुशी से चिल्लाकर कहा। अदिति सन्न रह गई। उसकी आंखें उस छोटी बच्ची पर टिक गईं। “पापा, आपने मेरे लिए आइसक्रीम लाने का वादा किया था।” बच्ची ने शिकायत की। राहुल ने प्यार से उसके गाल पर हाथ फेरा, “हाँ मेरी गुड़िया, याद है मुझे, बस काम खत्म कर लूं फिर चलते हैं।”
अदिति की सांसें थम सी गईं। “यह कौन है राहुल?” अदिति ने आक्रोश भरे स्वर में पूछा। राहुल ने बच्ची की ओर झुककर कहा, “बेटा, तुम जरा मौसी के पास जाओ, मैं अभी आता हूं।” बच्ची मुस्कुराई और पास में खड़ी एक औरत के पास चली गई।
“बोलो राहुल, यह लड़की कौन है?” अदिति की आवाज में बेचैनी और गुस्सा दोनों थे। राहुल ने गहरी सांस ली, फिर बहुत शांत लहजे में बोला, “यह मेरी बेटी है, अदिति।”
अदिति को जैसे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। “तुमने दूसरी शादी कर ली?” राहुल ने सिर हिलाया, “नहीं।” “तो फिर यह बच्ची?” राहुल कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, “यह मेरी बहन की बेटी है। मेरी बहन और उसके पति की एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। तब से यह मेरे साथ है।”
अदिति को एक पल के लिए राहत मिली, लेकिन उसका मन अभी भी अशांत था। “राहुल, तुम एक बड़ी आईटी कंपनी में थे। तुम्हारे पास अच्छी जिंदगी थी। तुम चाहते तो इस बच्ची को बेहतर तरीके से पाल सकते थे। फिर यह सब छोड़कर पानीपुरी बेचना क्या यह सही था?”
राहुल ने गहरी नजरों से अदिति को देखा और हल्का सा मुस्कुराया, “अदिति, मैं जानता हूं कि तुम्हें यह समझना मुश्किल है। लेकिन जब मेरी बहन का एक्सीडेंट हुआ, तब पहली बार महसूस किया कि असली जिंदगी क्या है। मैं बस पैसों और शोहरत के पीछे भाग रहा था, लेकिन अपनों के लिए मेरे पास वक्त ही नहीं था। इस बच्ची ने मुझे सिखाया कि जिंदगी दौड़ में आगे निकलने का नाम नहीं, बल्कि अपनों के साथ जीने का नाम है। इसलिए मैंने नौकरी छोड़ दी और कुछ ऐसा शुरू किया जहाँ मैं अपने तरीके से, बिना किसी दबाव के जी सकूं।”
अदिति ने धीरे से कहा, “लेकिन तुमने मुझे यह सब कभी नहीं बताया राहुल।” राहुल ने हल्का सा हंसा, “हमारी राहें अलग हो चुकी थीं अदिति। मैं तुम्हें यह सब क्यों बताता।”
अदिति को समझ नहीं आ रहा था कि उसे कैसा महसूस करना चाहिए। एक तरफ उसे राहुल पर गुस्सा आ रहा था कि उसने इतनी बड़ी बात छुपाई, दूसरी तरफ कहीं न कहीं उसे राहुल की बातों में सच्चाई भी नजर आ रही थी।
तभी बच्ची दौड़कर वापस आई और राहुल का हाथ पकड़कर बोली, “पापा, अब चलो।” राहुल ने मुस्कुरा कर उसकी ओर देखा, फिर अदिति की ओर मुखातिब हुआ, “अदिति, कुछ फैसले हमारे लिए सही नहीं लगते, लेकिन दूसरों के लिए जरूरी होते हैं। मैंने जो चुना, वह मेरे लिए सही था और मुझे कोई पछतावा नहीं है।”
अदिति ने उसकी आंखों में देखा, उनमें कोई पछतावा नहीं था, बस एक गहरी संतुष्टि थी। एक सुकून। अचानक उसे एहसास हुआ कि राहुल हारा नहीं था, उसने वह पा लिया था जिसे शायद अदिति आज तक खोज रही थी—सुकून।
वह चुपचाप पलटी और अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गई। आज पहली बार उसे लगा कि शायद उसने सब कुछ हासिल करके भी कुछ खो दिया था।
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