42 की उम्र में मातृत्व: समय, विज्ञान और एक नई सोच की कहानी
जब 42 वर्ष की उम्र में कैटरीना केफ और उनकी पार्टनर विक्की कोशेल ने अपनी प्रेग्नेंसी की खबर साझा की, तो सोशल मीडिया पर सिर्फ बधाइयों की बाढ़ ही नहीं आई, बल्कि एक पुरानी बहस भी फिर से ज़िंदा हो गई — क्या 40 के बाद माँ बनना सही है?
यह सवाल नया नहीं है। दशकों से महिलाओं को यह बताया जाता रहा है कि मातृत्व का एक “सही समय” होता है। एक अदृश्य जैविक घड़ी, जो टिक-टिक करती रहती है और जिसके खिलाफ़ महिलाएँ दौड़ती रही हैं। लेकिन आज की दुनिया में यह सोच धीरे-धीरे बदल रही है।
बदलता समय, बदलती सोच
आज महिलाएँ पहले से ज़्यादा पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर और अपने जीवन के फैसले खुद लेने वाली हैं। करियर, आर्थिक स्थिरता, मानसिक परिपक्वता और सही पार्टनर — ये सभी चीज़ें अब उतनी ही अहम मानी जाती हैं जितनी उम्र। ऐसे में कई महिलाएँ जानबूझकर मातृत्व को अपने 30s के अंत या 40s में चुन रही हैं।
कैटरीना केफ की प्रेग्नेंसी इसी बदलाव की एक मिसाल बन गई है। यह सिर्फ एक सेलिब्रिटी न्यूज़ नहीं, बल्कि उन हज़ारों महिलाओं की कहानी है जो अपने समय पर माँ बनना चाहती हैं — न समाज के दबाव में, न डर के कारण।

40 के बाद गर्भावस्था: सच्चाई क्या है?
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा के अनुसार, 40 के बाद गर्भधारण में कुछ चिकित्सीय जोखिम ज़रूर बढ़ जाते हैं। इस उम्र में गर्भपात की संभावना अधिक हो सकती है, जेस्टेशनल डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और क्रोमोसोमल असामान्यताओं का खतरा भी बढ़ता है। इसका कारण अंडाणुओं की गुणवत्ता में प्राकृतिक गिरावट और शरीर की बदलती सहनशक्ति है।
लेकिन डॉक्टर यह भी साफ़ करते हैं कि यह कोई “एक ही कहानी” नहीं है। हर महिला का शरीर अलग होता है। जो महिलाएँ शारीरिक रूप से सक्रिय हैं, संतुलित आहार लेती हैं और नियमित मेडिकल चेकअप कराती हैं, उनके लिए ये जोखिम काफी हद तक नियंत्रित किए जा सकते हैं।
चिकित्सा विज्ञान ने बदली तस्वीर
आज का मेडिकल साइंस 20 साल पहले जैसा नहीं है। IVF, एग फ्रीज़िंग, डोनर एग्स और एडवांस्ड प्रीनेटल टेस्टिंग जैसी तकनीकों ने मातृत्व की परिभाषा ही बदल दी है। अब उम्र सिर्फ एक संख्या रह गई है, कोई दीवार नहीं।
एग फ्रीज़िंग जैसी तकनीक महिलाओं को यह विकल्प देती है कि वे अपने अंडाणु उस समय सुरक्षित रख सकें जब उनकी गुणवत्ता बेहतर हो, और बाद में सही समय पर उनका उपयोग कर सकें। IVF और डोनर एग्स ने उन महिलाओं के लिए भी उम्मीद के दरवाज़े खोले हैं जिनके लिए प्राकृतिक रूप से गर्भधारण मुश्किल होता है।
भावनात्मक और मानसिक पहलू
40 के बाद माँ बनने का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इस उम्र में महिलाएँ भावनात्मक रूप से अधिक परिपक्व होती हैं। वे अपने फैसलों को लेकर ज़्यादा आश्वस्त होती हैं, धैर्य और समझ बढ़ जाती है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परिपक्वता बच्चे की परवरिश में भी सकारात्मक भूमिका निभाती है।
हालाँकि, चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। शारीरिक थकान, सामाजिक टिप्पणियाँ और “देर हो गई” जैसी बातें मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में परिवार और पार्टनर का सहयोग बेहद ज़रूरी हो जाता है।
समाज की भूमिका
आज भी हमारे समाज में 40 के बाद माँ बनने वाली महिलाओं को सवालों और जजमेंट का सामना करना पड़ता है। “बच्चा बड़ा होने तक आप बूढ़ी हो जाएँगी”, “बच्चे के साथ एनर्जी कैसे मैनेज करेंगी” — ऐसे ताने आम हैं। लेकिन शायद अब समय आ गया है कि हम इन सवालों को महिलाओं पर थोपना बंद करें।
पुरुषों की उम्र को लेकर शायद ही कभी ऐसा सवाल उठता है। फिर मातृत्व के मामले में ही उम्र को इतना बड़ा मुद्दा क्यों बनाया जाता है?
एक निजी फैसला, सार्वजनिक बहस
कैटरीना केफ की प्रेग्नेंसी ने यह साफ़ कर दिया है कि मातृत्व अब सिर्फ जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सचेत चुनाव है। यह फैसला डर से नहीं, जानकारी और आत्मविश्वास से लिया जा रहा है।
यह कहानी उन महिलाओं के लिए उम्मीद है जो सोचती हैं कि उन्होंने “बहुत देर कर दी”। यह संदेश है कि सही समय वही होता है जो आपके जीवन, स्वास्थ्य और परिस्थितियों के हिसाब से सही लगे।
निष्कर्ष
40 या 42 की उम्र में माँ बनना न तो किसी की हार है, न ही किसी नियम का उल्लंघन। यह साहस, आत्मनिर्णय और आधुनिक चिकित्सा का संगम है। इस कहानी में उम्र विलेन नहीं है। असली विलेन डर है — और असली नायिका है महिला की पसंद।
आज मातृत्व की परिभाषा बदल रही है। और शायद यही बदलाव सबसे खूबसूरत है।
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