12 साल का लड़का और सेना का गुप्त मिशन

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12 साल का लड़का और सेना का गुप्त मिशन: अरुणाचल प्रदेश की कहानी

अरुणाचल प्रदेश के घने जंगलों में लगातार बारिश हो रही थी। जंगल के बीच एक पुरानी सी झोपड़ी खड़ी थी, जिसके अंदर 12 साल का लड़का आरव अपने दादाजी द्वारा सिखाए गए तकनीकी उपकरणों और सर्किट बोर्डों को देख रहा था। उसकी आँखों में एक खास तरह की चमक थी, एक ऐसे लड़के की चमक जो मशीनों और तकनीकी उपकरणों के बारे में सोचता था।

दादाजी का अदृश्य योगदान

आरव का पालन-पोषण दादाजी के साथ हुआ था, जो भारतीय सेना के पूर्व तकनीशियन थे। वे युद्ध के बाद से गायब हो गए थे, लेकिन उन्होंने आरव को जो कुछ भी सिखाया था, वह अब आरव की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था। दादाजी ने उसे न केवल कोडिंग और मशीनों के बारे में सिखाया, बल्कि उसे यह भी समझाया था कि जंगल में कैसे काम करना है और आपातकालीन परिस्थितियों में कैसे सोचकर काम करना है।

रेडियो संदेश और आरव का साहसिक कदम

एक रात, जब बिजली कड़कने और आकाश में गर्जना हो रही थी, आरव का पुराना रेडियो अचानक बज उठा। रेडियो पर एक करकट आवाज सुनाई दी, “चौकी डेल्टा, हम फंस गए हैं, संचार टूट गया है। कोई भी सुन रहा है, मदद की जरूरत है।” आरव ने ध्यान से सुना और उसे समझने में देर नहीं लगी कि यह भारतीय सेना का संदेश था।

आरव ने वह संदेश पहचाना और वह समझ गया कि यह उसके दादाजी की कूटनीति से जुड़ा था। आरव ने उसी रात अपनी तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए एक आपातकालीन ट्रांसमीटर तैयार किया और सेना के जवानों से संपर्क करने का प्रयास किया। वह जानता था कि उसकी मदद से इन जवानों की जान बचाई जा सकती है।

पहला कदम

आरव ने अपना ट्रैकर और सिग्नल उपकरण तैयार किया और उत्तर की दिशा में यात्रा शुरू की। जंगल में अपने ज्ञान का इस्तेमाल करते हुए, उसने धीरे-धीरे सैन्य टीम का सिग्नल ट्रैक किया। दो घंटे बाद, वह एक नदी के किनारे पहुंचा, जहां उसने अपने सिग्नल उपकरण से एक नीली रोशनी भेजी। यह एक संकेत था, जिसे आसानी से पहचाना जा सकता था, अगर कोई उसे ढूंढने की कोशिश करता।

गुमनाम सैनिकों की खोज

अचानक, एक टहनी टूटने की आवाज सुनाई दी, और दो पूरी तरह से थके हुए सैनिक सामने आए। उनके कपड़े कीचड़ से सने हुए थे, और उनकी बंदूकें नीचे झुकी हुई थीं। आरव ने उन सैनिकों से पूछा, “क्या आप चौकी डेल्टा से हैं?”

एक सैनिक ने सिर झुकाया और कहा, “हां, हमने तुम्हारा संदेश सुना। हम रास्ता भटक गए हैं।”

आरव ने उन्हें यकीन दिलाया कि वह उनकी मदद कर सकता है, और वह उन्हें उनके खोए हुए साथियों तक पहुंचने का रास्ता दिखा सकता था।

गुप्त शिविर का खुलासा

जंगल में आगे बढ़ते हुए, आरव और सैनिकों ने एक गुप्त शिविर देखा। वहां अत्याधुनिक उपकरण और सशस्त्र सैनिक खड़े थे। आरव ने उन सैनिकों से पूछा, “क्या आप भी इन्हीं लोगों से मिले थे, जो जंगल में आए थे?”

सैनिकों ने कन्फर्म किया कि वे एक विदेशी समूह के सदस्य थे, जो एक रहस्यमयी तकनीकी उपकरण की खोज में थे। यह तकनीक इतनी खतरनाक थी कि उसे नियंत्रित करने की कोशिश करने वाला कोई भी व्यक्ति उसे नष्ट कर सकता था।

आरव ने सैनिकों को बताया कि उन्होंने इस रहस्यमयी पत्थर को देखा था, जो उन उपकरणों के साथ था। यह कोई साधारण पत्थर नहीं था, बल्कि यह एक उल्कापिंड जैसी धातु का था, जिस पर कुछ अजीब चमक रहे उपकरण लगे थे।

आरव और सेना की साझेदारी

अब, आरव और सेना का मिशन पूरी तरह से बदल चुका था। यह सिर्फ एक सैनिकों को बचाने का काम नहीं था, बल्कि एक ऐसे रहस्य की खोज थी, जिसे छिपाया जा रहा था। एक ऐसी शक्ति, जिसे गलत हाथों में जाने से रोका जाना था।

अंतिम खुलासा

आरव और सैनिकों के बीच बढ़ती हुई घबराहट और संघर्ष के बीच, एक काले चोगे वाला आदमी सामने आया, जिसने आरव को यह बताया कि उसका दादाजी भी इस रहस्यमयी शक्ति से जुड़ा था और उसे किसी के हाथों में जाने से बचाने के लिए वह खुद को छिपाने के लिए जंगल में भाग गए थे।

आरव को यह एहसास हुआ कि यह शक्ति कोई साधारण वस्तु नहीं है। यह एक ऐसी चेतावनी है, जो उसके दादाजी ने पहले ही महसूस की थी। वह अब अकेला नहीं था, बल्कि वह इस शक्ति को बचाने वाला अगला व्यक्ति बन चुका था।

नई शुरुआत

जंगल में बिताए गए घंटों के बाद, आरव ने अपनी जीवन की सबसे बड़ी खोज पूरी की। वह अब सिर्फ जंगल का लड़का नहीं था, बल्कि वह एक गहरी रहस्यमयी ताकत का हिस्सा बन चुका था।

आरव की यात्रा एक नई दिशा में बढ़ रही थी, और वह जानता था कि आगे उसे बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभानी है। उसकी दादाजी की खोज और उनकी छुपी हुई शक्तियों को अब वह ही बचा सकता था।