बेटी ने अपने माता पिता के साथ किया कारनामा/पुलिस प्रशासन सभी हैरान रह गए/
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बेटी ने अपने माता-पिता के साथ किया कारनामा
यह कहानी राजस्थान के जैसलमेर जिले के एक छोटे से गांव मोहनगढ़ की है। जहां एक आम आदमी, आकाश कुमार, अपनी मेहनत और संघर्ष से अपना जीवन चला रहा था। वह नजदीकी कारखाने में मजदूरी करता था, और जो कुछ भी पैसे कमाता, उन पैसों का कुछ हिस्सा शराब पर उड़ा देता। आकाश का जीवन, अपने परिवार के लिए जीने की कोशिश में, बहुत कठिनाइयों से भरा था। उसकी पत्नी शारदा देवी घर के कामों में व्यस्त रहती थीं और उनकी दो बेटियाँ थीं: मुस्कान और रीना।

मुस्कान, जो पहले ही अपनी पढ़ाई छोड़ चुकी थी, अपनी छोटी बहन रीना को हमेशा प्रेरित करती थी कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखे, क्योंकि उसका मानना था कि शिक्षा ही एकमात्र तरीका है जिससे कोई अपना जीवन सुधार सकता है। हालांकि, रीना की पढ़ाई को लेकर उसकी मां शारदा देवी का विचार थोड़ा अलग था। वह हमेशा रीना को कहती थीं कि घर में गरीबी है और शिक्षा के लिए पैसे जुटाना मुश्किल है। यही कारण था कि शारदा ने तय किया कि रीना को पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी।
मुस्कान और रीना, दोनों बहनें अपनी मां से उलट एक-दूसरे को उत्साहित करती रहीं कि रीना को अपनी पढ़ाई जारी रखनी चाहिए। इस पर शारदा देवी को झुकना पड़ा और उसने अपनी बेटियों को आश्वासन दिया कि वह कुछ प्रयास करेंगी, ताकि रीना की पढ़ाई जारी रह सके। शारदा देवी ने अपनी मेहनत का काम बढ़ा लिया, ताकि बेटी की पढ़ाई के लिए पैसे इकट्ठा किए जा सकें।
कुछ महीनों के बाद, शारदा देवी ने गाँव के ठेकेदार के पास काम करना शुरू किया। हालांकि, महीनों की कड़ी मेहनत के बाद उसे केवल आठ से नौ हजार रुपये ही मिलते थे, जो कि परिवार का खर्च चलाने के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं थे। शारदा देवी सोचने लगी कि इतनी कम कमाई में वह अपनी बेटियों का भविष्य कैसे बना सकती है, खासकर रीना की पढ़ाई और मुस्कान की शादी के बारे में।
एक दिन, शारदा देवी को एक और रास्ता नजर आया। 16 अगस्त 2025 को, उसने गाँव के जमींदार रमेश से मदद की गुहार लगाई। रमेश की स्थिति ठीक थी, और वह अपनी आठ एकड़ ज़मीन का मालिक था। शारदा देवी ने उसे बताया कि उसकी स्थिति बहुत खराब है, और वह चाहती थी कि रमेश उसे घर के कामकाज के लिए नौकरी दे। जमींदार ने उसकी बातों को सुना और उसे घर पर काम करने का प्रस्ताव दिया।
रमेश, जो अकेला था और पत्नी की मौत के बाद घर में बेमन से रहता था, ने शारदा देवी को काम पर रखने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। शारदा देवी ने कड़ी मेहनत की, लेकिन रमेश की नीयत में खोट थी। एक दिन, जब शारदा देवी रमेश के घर पर काम कर रही थी, तो वह उसे अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए उकसाने लगा। उसने शारदा देवी से कहा कि अगर वह उसके साथ संबंध बनाए तो उसकी बेटियों की शादी हो सकती है और उसकी गरीबी दूर हो जाएगी।
शारदा देवी, जो अपनी बेटियों के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थी, लालच में आ गई और उसने रमेश की बातों को स्वीकार किया। अगले कुछ दिनों में शारदा देवी और रमेश के बीच अवैध संबंध बन गए। शारदा देवी ने रमेश से पैसे और गहने लिए, और उसकी बेटी मुस्कान ने भी अपनी मां को गहने और पैसे लेते देखा। मुस्कान को यह देखकर बहुत गुस्सा आया, लेकिन वह अपनी मां से कुछ नहीं कह सकी।
एक दिन मुस्कान ने अपनी मां से पूछा कि इन गहनों और पैसों का स्रोत क्या है, तो शारदा देवी ने झूठ बोला और कहा कि ये गहने और पैसे उसके द्वारा किए गए अच्छे कामों का फल हैं। हालांकि, मुस्कान को यकीन नहीं हुआ, और उसे समझ में आ गया कि उसकी मां गलत रास्ते पर जा चुकी है। मुस्कान ने अपनी छोटी बहन रीना को यह सब बताया और दोनों बहनें एक योजना बनाने लगीं।
फिर 10 सितंबर 2025 को, रीना और मुस्कान ने अपने माता-पिता के साथ एक बड़ा कदम उठाया। मुस्कान और रीना ने तय किया कि उन्हें अपनी मां को इस बुरे रास्ते से बचाना होगा, लेकिन यह सब एक भयावह घटना में बदलने वाला था। उन्होंने अपनी मां शारदा देवी और जमींदार रमेश को मारने का फैसला किया। उन्होंने अपनी योजना को पूरी तरह से अंजाम दिया और इस दौरान पुलिस दरोगा चरण सिंह भी उनके साथ था, जो उनका करीबी दोस्त था।
एक दिन, जब रमेश और चरण सिंह दोनों शराब के नशे में थे, तो रीना और मुस्कान ने उनके खिलाफ कदम उठाया। रीना ने एक पिस्तौल उठाई और सबसे पहले अपनी मां को गोली मारी, फिर चरण सिंह और रमेश दोनों को भी मार दिया। घर में तीन लाशें पड़ी थीं और दोनों बहनें पुलिस को फोन कर दीं।
यह घटना पूरे गांव में आग की तरह फैल गई। पुलिस ने दोनों बहनों को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ की। मुस्कान और रीना ने अपनी पूरी कहानी पुलिस को सुनाई, और पुलिस भी इस बात पर हैरान रह गई कि कैसे माता-पिता अपने बच्चों को इतनी घातक स्थिति में ला सकते थे।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी-कभी लोग अपने बच्चों के भले के लिए गलत रास्ता अपनाते हैं, और उसका परिणाम बहुत खतरनाक हो सकता है। रिश्तों में विश्वास और ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है, और हमें किसी भी स्थिति में अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।
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