Dhar mp case | इस औरत ने जो कारनामे की है उसे सुन पुलिस भी हैरान है ||

धार का विश्वासघात: खूनी प्रेम और धोखे की दास्तान
मध्य प्रदेश के धार जिले का सरदारपुर क्षेत्र अपनी शांति के लिए जाना जाता था, लेकिन ६ अप्रैल २०२६ की उस काली रात ने यहाँ के गोंदीखेड़ा चारण गाँव को हमेशा के लिए बदल दिया। यह कहानी है देव कृष्ण पुरोहित की, जिसकी हत्या किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि उसके ही घर के भीतर रची गई एक भयावह/साजिश ने की थी।
१. एक खुशहाल परिवार और छिपा हुआ तूफान
२८ वर्षीय देव कृष्ण पुरोहित मिर्च-मसालों का एक सफल कारोबारी था। वह अपने गाँव का एक सम्मानित व्यक्ति था, जो अपनी माँ, छोटी बहन और अपनी पत्नी प्रियंका (२७ वर्ष) के साथ रहता था। प्रियंका दिखने में बेहद खूबसूरत थी, लेकिन उसकी खूबसूरती के पीछे एक ऐसा काला/राज छिपा था, जिससे उसका पति और ससुराल वाले पूरी तरह अनजान थे।
देव कृष्ण अपने परिवार का इकलौता सहारा था। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस पत्नी के साथ वह अपना जीवन व्यतीत कर रहा है, वह उसके ही खु/न/की/प्या/सी बन जाएगी।
२. आधी रात की चीख और खौफनाक मंजर
६ अप्रैल की रात, पूरा परिवार खाना खाकर सो गया था। रात के करीब २:०० बजे अचानक प्रियंका के कमरे से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। देव कृष्ण की माँ और बहन घबराकर बाहर निकलीं। जब वे प्रियंका के कमरे में पहुँचीं, तो देखा कि प्रियंका के हाथ-पैर बंधे हुए हैं और वह बदहवास होकर रो रही है।
प्रियंका ने कांपते हुए इशारा किया, “उन्हें देखो… वे उसे मार डालेंगे!”
जब माँ और बहन दूसरे कमरे में पहुँचीं, तो वहाँ का नजारा रूह को कँपा देने वाला था। देव कृष्ण अपने बिस्तर पर खून से लथपथ पड़ा था। उसके सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था। पूरा कमरा अस्त-व्यस्त था, अलमारियां खुली थीं और सामान बिखरा पड़ा था।
३. लूट का नाटक और पुलिस की छानबीन
सूचना मिलते ही सरदारपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुँची। प्रियंका ने पुलिस को बताया कि चार-पांच नकाबपोश बदमाश घर में घुसे थे। उन्होंने उसे बांध दिया और लूटपाट की। जब देव कृष्ण ने विरोध किया, तो उन्होंने उसकी नि/र्द/य/ता/से/ह/त्या कर दी। प्रियंका के अनुसार, बदमाश लाखों के जेवरात और नकदी लेकर फरार हो गए थे।
पुलिस ने शुरुआत में इसे ‘लूट के बाद हत्या’ का मामला माना। लेकिन जैसे ही पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की, उन्हें प्रियंका की कहानी में कई झोल नजर आने लगे।
घर का दरवाजा अंदर से नहीं टूटा था।
गाँव के किसी भी सीसीटीवी फुटेज में उस रात कोई अनजान व्यक्ति या गाड़ी नहीं दिखाई दी।
प्रियंका के बयानों में बार-बार बदलाव आ रहा था।
४. कॉल डिटेल्स और ‘कमलेश’ का राज
पुलिस ने प्रियंका के मोबाइल की कॉल डिटेल्स (CDR) निकलवाई। यहीं से इस केस का असली मोड़ सामने आया। प्रियंका एक नंबर पर पिछले कई सालों से लगातार घंटों बात कर रही थी। वह नंबर कमलेश पुरोहित (३३ वर्ष) का था, जो राजगढ़ का रहने वाला था।
चौकाने वाली बात यह थी कि जिस रात हत्या हुई, कमलेश के मोबाइल का लोकेशन देव कृष्ण के घर के ठीक पास पाया गया। पुलिस की कड़ियाँ जुड़ने लगी थीं। ८ अप्रैल २०२६ को पुलिस ने प्रियंका को हिरासत में लिया और जब कमलेश का नाम लिया, तो प्रियंका के चेहरे की हवाइयाँ उड़ गईं।
५. बाल विवाह, अधूरा प्रेम और खूनी साजिश
पुलिस की सख्ती के आगे प्रियंका टूट गई और उसने जो सच बताया, उसने समाज के माथे पर कलंक लगा दिया।
प्रियंका की शादी मात्र १५ साल की उम्र में देव कृष्ण से कर दी गई थी। यह एक बा/ल/वि/वा/ह था। जब वह २१ साल की हुई, तो उसके गौने (विदाई) की बात चली। लेकिन तब तक प्रियंका का कमलेश के साथ अ/वै/ध/प्रेम/प्र/संग शुरू हो चुका था। वह अपने ससुराल नहीं जाना चाहती थी, लेकिन परिवार के दबाव में उसे जाना पड़ा।
ससुराल पहुँचने के बाद भी वह कमलेश के साथ छि/पे/हु/ए/रि/श्ते में रही। जब देव कृष्ण को शक हुआ और दोनों के बीच झगड़े बढ़ने लगे, तो प्रियंका ने कमलेश के साथ मिलकर अपने ही पति को रास्ते से हटाने का फैसला किया। कमलेश ने अपने दोस्त सुरेंद्र को १ लाख रुपये की सु/पा/री दी और ६ अप्रैल की रात, प्रियंका ने खुद घर का दरवाजा खोलकर हत्यारों को अंदर बुलाया।
६. नाटक का अंत और न्याय की गुहार
प्रियंका ने पुलिस को गुमराह करने के लिए खुद के हाथ-पैर बंधवाए थे और लूट का नाटक रचा था। यहाँ तक कि उसने जेवरात भी घर में ही छिपा दिए थे, ताकि बाद में वह उन्हें कमलेश के साथ मिलकर इस्तेमाल कर सके।
पुलिस ने जब इस मामले का खुलासा किया, तो देव कृष्ण की माँ और बहन का रो-रोकर बुरा हाल था। गाँव वालों में भारी आक्रोश था। वे चिल्ला रहे थे, “ऐसी कु/टा/चा/री/और/बे/व/फा औरत को फाँसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए!”
निष्कर्ष
देव कृष्ण अपने माता-पिता की इकलौती संतान था, जो अपनी छोटी बहन की शादी के सपने देख रहा था। लेकिन एक महिला की ह/व/स/और/धो/खे ने सब कुछ राख कर दिया। फिलहाल प्रियंका और कमलेश सलाखों के पीछे हैं, और पुलिस फरार सुरेंद्र की तलाश कर रही है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह अपनी ही रची गई साजिश के जाल में एक न एक दिन जरूर फंसता है।
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