गांव में खूबसूरत महिला दुल्हन बन कर आई/महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/
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राजस्थान के एक गांव में सत्ता, शोषण और हत्या की दर्दनाक कहानी
विशेष संवाददाता
उत्तर-पश्चिम भारत के राज्य Rajasthan के एक छोटे से गांव में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच ऐसी घटनाओं की श्रृंखला सामने आई, जिसने सत्ता, पितृसत्ता, भ्रष्टाचार और मजबूरी के खतरनाक मेल को उजागर कर दिया। एक साधारण विवाह से शुरू हुई यह कहानी अंततः हत्या, आपराधिक मुकदमे और पूरे गांव को झकझोर देने वाले खुलासों तक पहुंच गई।
यह कहानी है अंजलि (परिवर्तित नाम) की—एक गरीब परिवार की युवती, जिसने शादी के बाद सुरक्षित जीवन का सपना देखा था, लेकिन खुद को कथित रूप से शोषण के जाल में फंसा पाया।
गांव का प्रभावशाली सरपंच
घटनाएं Bharatpur जिले के एक गांव में हुईं। यहां लाल सिंह (परिवर्तित नाम) नामक व्यक्ति रहता था, जिसके पास लगभग 32 एकड़ कृषि भूमि थी। वह गांव का सरपंच भी था और आर्थिक रूप से बेहद संपन्न माना जाता था।
लाल सिंह जरूरतमंद लोगों को ब्याज पर पैसा देता था और स्थानीय प्रभावशाली लोगों—जैसे एक रिटायर्ड जज और पुलिस अधिकारियों—से उसके करीबी संबंध बताए जाते थे। गांव में उसकी छवि एक प्रभावशाली और “मददगार” व्यक्ति की थी, लेकिन कुछ लोग उससे डरते भी थे।
आरोपों के अनुसार, वह कर्ज वसूली के नाम पर गरीब परिवारों की महिलाओं का शोषण करता था। हालांकि, उसके प्रभाव के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आता था।
लाल सिंह की पत्नी मंजू देवी (परिवर्तित नाम) थीं, जिनसे उसकी शादी को 20 साल से अधिक समय हो चुका था। दंपति की कोई संतान नहीं थी। लगभग पांच साल पहले लाल सिंह ने महेश (परिवर्तित नाम) नाम के एक युवक को गोद लिया था। हालांकि सार्वजनिक रूप से उसे बेटा कहा जाता था, लेकिन घर में वह घरेलू काम और खेती संभालता था।
एक उम्मीद भरी शादी
कॉलेज में पढ़ाई के दौरान महेश की मुलाकात अंजलि से हुई। दोनों में दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम में बदल गई। जब लाल सिंह को इस संबंध का पता चला, तो उसने शादी के लिए हामी भर दी।
अंजलि के गरीब माता-पिता के लिए यह रिश्ता किसी वरदान से कम नहीं था। 20 दिसंबर 2025 को शादी संपन्न हुई और अंजलि नई दुल्हन बनकर उस घर में आई।
लेकिन शादी की पहली ही रात घटनाओं ने भयावह मोड़ ले लिया।
गंभीर आरोप
अंजलि के बाद में दिए गए बयान के अनुसार, शादी की रात लाल सिंह ने महेश को कमरे में जाने से रोका और खुद दुल्हन के कमरे में गया। अंजलि ने आरोप लगाया कि उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया गया और महेश को धमकाकर चुप रहने पर मजबूर किया गया।
इसके बाद, अंजलि ने दावा किया कि उसे कई बार लाल सिंह के परिचित लोगों के पास भेजा गया। इन लोगों में एक रिटायर्ड जज और एक पुलिस अधिकारी शामिल बताए गए। आरोप है कि पैसों के बदले अंजलि का यौन शोषण किया जाता था।
अंजलि के अनुसार, उसे धमकी दी जाती थी कि यदि उसने विरोध किया तो उसे और उसके पति को जान से मार दिया जाएगा।
सत्ता और डर का जाल
अंजलि ने पुलिस को बताया कि उसे कई बार एक फार्महाउस और निजी बंगलों में ले जाया गया, जहां कथित रूप से उसके साथ जबरन संबंध बनाए गए। हर बार उसे सुबह से पहले घर लौटा दिया जाता था।
लाल सिंह की राजनीतिक और सामाजिक पकड़ के कारण अंजलि को लगा कि शिकायत करने का कोई फायदा नहीं होगा। गांव में उसकी आवाज दब सकती थी।
10 जनवरी 2026: निर्णायक रात
लगातार शोषण के बाद 10 जनवरी 2026 की रात घटनाओं ने निर्णायक रूप ले लिया।
अंजलि के बयान के अनुसार, उस रात लाल सिंह ने शराब पी रखी थी। कमरे में जाते समय अंजलि ने अपने पास एक चाकू छिपा रखा था। जब लाल सिंह सोने की अवस्था में था, तब अंजलि ने उसकी गर्दन पर वार कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर गहरे घाव के कारण मौत की पुष्टि हुई।
घटना के तुरंत बाद अंजलि और महेश पुलिस थाने पहुंचे। अंजलि ने हत्या की बात स्वीकार की और साथ ही पूरे शोषण की कहानी सुनाई।
पुलिस कार्रवाई
ड्यूटी पर मौजूद अधिकारी ने मामला दर्ज किया। लाल सिंह के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। अंजलि के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया।
साथ ही, उसके आरोपों के आधार पर कथित रूप से शामिल अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी जांच शुरू की गई। मामला अब केवल हत्या का नहीं, बल्कि कथित यौन शोषण, मानव तस्करी और आपराधिक साजिश का भी बन गया।
कानूनी सवाल
भारतीय कानून में आत्मरक्षा का अधिकार मान्य है, लेकिन यह साबित करना जरूरी होता है कि खतरा तत्काल और गंभीर था। अदालत को तय करना होगा कि अंजलि की कार्रवाई आत्मरक्षा थी, लगातार अत्याचार के खिलाफ प्रतिक्रिया थी या पूर्वनियोजित हत्या।
यदि उसके आरोप साबित होते हैं, तो मामले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
गांव की प्रतिक्रिया
गांव में इस घटना ने दो तरह की प्रतिक्रियाएं पैदा कीं। कुछ लोगों ने हत्या को गलत बताया, जबकि कई महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अंजलि के प्रति सहानुभूति जताई।
महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावशाली लोगों के खिलाफ आवाज उठाना बेहद कठिन होता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि संस्थागत विफलता का मामला भी होगा।
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