पांच साल बाद मंदिर में मिली तलाकशुदा पत्नी – अधूरी मोहब्बत की पूरी कहानी

प्रस्तावना

मंदिर की घंटियों की आवाज, हवा में घुली अगरबत्ती की खुशबू, और भीड़ के बीच अचानक एक चेहरा सामने आ जाए, जिसे देखने की हिम्मत आपने सालों से नहीं की हो – ऐसी ही एक मुलाकात ने अभिषेक और कोमल की जिंदगी को बदल दिया। यह कहानी है दर्द, पछतावे और माफी की; समाज के दबाव में टूटे रिश्ते की, और फिर उसी रिश्ते के पुनर्जन्म की।

अभिषेक और कोमल – पहली मुलाकात

बिहार के मुंगेर जिले के एक छोटे से गांव में अभिषेक अपने माता-पिता, बड़े भाई और भतीजों के साथ रहता था। अभिषेक पढ़ाई-लिखाई में अच्छा था और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था। परिवार में इज्जत थी, पुश्तैनी जमीन थी, इसलिए उसके लिए कई रिश्ते आने लगे।

एक दिन कोमल नाम की लड़की का रिश्ता आया। कोमल सुंदर, पढ़ी-लिखी और संस्कारी थी। दोनों ने एक-दूसरे से बातचीत की और पहली नजर में ही पसंद आ गए। लेकिन अभिषेक के पिता दहेज में ज्यादा पैसे मांगने लगे। कोमल के घरवालों को यह मंजूर नहीं था, लेकिन वे अभिषेक को अपनी बेटी के लिए बहुत पसंद करते थे।

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पकड़वा शादी – मजबूरी में बंधा रिश्ता

बिहार के कुछ इलाकों में आज भी ‘पकड़वा शादी’ का चलन है। मीडिएटर और कोमल के घरवालों ने अभिषेक को मार्केट से जबरन उठा लिया और उसकी शादी कोमल से करवा दी। दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया गया। हालांकि दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे, लेकिन इस जबरदस्ती ने सब कुछ बदल दिया।

अभिषेक को लगा कि कोमल की वजह से यह सब हुआ है, जबकि कोमल खुद मजबूरी में थी। अभिषेक के पिता पुलिस लेकर पहुंचे और अभिषेक से पूछा गया कि क्या वह कोमल को पसंद करता है। अभिषेक ने साफ मना कर दिया। कोमल की आंखों में आंसू थे, लेकिन अभिषेक ने सबके सामने सवाल उठाया – “अगर जबरदस्ती किसी की मांग में सिंदूर भर दूं तो क्या वह शादी कहलाएगी?” सब चुप हो गए। अभिषेक अपने पिता के साथ घर लौट गया।

अलगाव – दो जीवन, एक दर्द

अभिषेक अपने चाचा के पास पंजाब चला गया। उसने पुराने दोस्तों, रिश्तेदारों से संपर्क तक बंद कर दिया। उधर कोमल ने अभिषेक को पति मान लिया, लेकिन अभिषेक ने उसे कभी पत्नी नहीं माना। समाज और परिवार ने कोमल पर दूसरी शादी का दबाव डाला, लेकिन उसने साफ मना कर दिया। वह हर साल करवा चौथ का व्रत रखती, सुहागन के सारे नियम निभाती – सिर्फ अभिषेक के लिए।

समय बीतता गया। दो साल, तीन साल, चार साल… पांच साल बाद भी कोमल ने अभिषेक का इंतजार नहीं छोड़ा।

दुर्गा पूजा का मेला – पुनर्मिलन की घड़ी

पांच साल बाद अभिषेक के पिता ने उसे गांव लौटने को कहा। दुर्गा पूजा का मेला था। अभिषेक गांव आया, लेकिन पुराने दोस्त अब दूर हो चुके थे। वह अकेला ही मेले में गया। मेले के पास मंदिर था। अभिषेक मंदिर की सीढ़ियां चढ़ रहा था, तभी उसकी नजर एक लड़की पर पड़ी – एक हाथ में बैसाखी, दूसरे में पूजा की थाली। वह संभलकर उतर रही थी। अभिषेक ने ध्यान से देखा – वह कोमल थी!

कोमल के पैर में चोट थी, एक्सीडेंट के कारण वह बैसाखी से चल रही थी। अभिषेक ने उसे सहारा देकर सीढ़ियां उतरवाई। नीचे बैठकर दोनों फूट-फूटकर रो पड़े। पांच साल का दर्द, अधूरी बातें, सब एक पल में बह निकलीं।

सच्चाई का सामना

अभिषेक ने पूछा – “क्या हुआ तुम्हारे पैर को?”
कोमल ने बताया – “एक्सीडेंट हुआ था, डॉक्टर ने प्लेट डाली, लेकिन पैसे नहीं थे कि बड़ा इलाज करा सकूं।”
अभिषेक ने पूछा – “क्या तुमने दूसरी शादी नहीं की?”
कोमल ने जवाब दिया – “मैंने तुम्हें अपना पति मान लिया था। जब तक तुम जिंदा हो, मैं दूसरी शादी नहीं करूंगी।”

कोमल की बातें सुनकर अभिषेक की आंखों में आंसू आ गए। उसे लगा कि उसने कोमल के साथ बहुत गलत किया है। कोमल जाने लगी तो अभिषेक ने उसका हाथ पकड़ लिया – “अब बहुत हुआ, चलो मेरे साथ। तुम्हें तुम्हारा हक मिलेगा।”

घर वापसी – समाज से लड़ाई

कोमल ने पहले मना किया – “तुम्हारे घरवाले क्या कहेंगे?”
अभिषेक ने कहा – “अब फर्क नहीं पड़ता। जब तुमने मेरी वजह से इतना सहा है, तो मैं तुम्हारे लिए सब कुछ करूंगा।”
दोनों घर पहुंचे। अभिषेक के माता-पिता पहले नाराज हुए, लेकिन अभिषेक ने साफ कह दिया – “यह मेरी पत्नी है, मैं इसे अपने साथ रखूंगा।”

घरवालों ने आखिरकार मान लिया। कोमल ने अपने सास-ससुर का आशीर्वाद लिया। परिवार में खुशी लौट आई।

नया जीवन – माफी और इलाज

अभिषेक ने कोमल को बड़े मेडिकल कॉलेज में ले जाकर इलाज करवाया। ऑपरेशन के बाद कोमल का पैर ठीक हो गया। गांव में लोग अभिषेक की इंसानियत की तारीफ करने लगे। कोमल अपने सास-ससुर और पति की देखभाल करने लगी। जेठानी कभी-कभी ताना मारती, लेकिन कोमल सब सह जाती।

एक दिन अभिषेक कोमल को उसके मायके ले गया। वहां वह लड़का मिला जिसने अभिषेक को थप्पड़ मारा था। उसने माफी मांगी, अभिषेक ने उसे माफ कर दिया।

समापन – अधूरी कहानी पूरी हुई

आज अभिषेक और कोमल अपने घर में खुश हैं। पांच साल का दर्द, समाज की बातें, मजबूरी – सब पीछे छूट गया। मंदिर की सीढ़ियों पर जो आंसू गिरे थे, उन्होंने दोनों के दिलों को जोड़ दिया। कोमल को उसका हक मिला, अभिषेक को उसकी सच्ची पत्नी।