धर्मेन्द्र की ₹450 करोड़ की विरासत: सन्नी देओल का हस्तक्षेप और ईशा-अहाना का हिस्सा
मुंबई: भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेन्द्र का नाम न केवल उनकी अदाकारी के लिए जाना जाता है, बल्कि एक ऐसे जटिल पारिवारिक ताने-बाने के लिए भी जाना जाता है जिसने दशकों तक बॉलीवुड को आकर्षित किया है। हाल ही में उनके निधन और ₹450 करोड़ की विशाल संपत्ति के बँटवारे की अटकलों ने एक बार फिर उनके परिवार को सुर्खियों में ला दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर के बेटे सन्नी देओल, उनकी दूसरी पत्नी हेमा मालिनी की बेटियों, ईशा देओल और अहाना देओल को इस विरासत में उनका उचित हिस्सा दिलवाने के लिए हस्तक्षेप करेंगे?
I. विरासत का भार और पारिवारिक पृष्ठभूमि
धर्मेन्द्र ने अपने लंबे करियर में जो संपत्ति अर्जित की है, वह केवल नकद या मुंबई के पॉश बंगलों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ₹450 करोड़ की यह संपत्ति कई कृषि भूमि, फ़ार्महाउस (जैसे लोनावाला फ़ार्महाउस), व्यावसायिक संपत्ति और विभिन्न कंपनियों में निवेश का मिश्रण है।
धर्मेन्द्र की पारिवारिक संरचना भारतीय समाज में असामान्य नहीं है, लेकिन बॉलीवुड में यह हमेशा चर्चा का विषय रही है। दो अलग-अलग परिवारों के बीच सौहार्द बनाए रखना हमेशा एक नाजुक संतुलन रहा है। सन्नी देओल और बॉबी देओल का अपनी सौतेली बहनों, ईशा और अहाना, के साथ सार्वजनिक रूप से कम ही दिखना, हमेशा से मीडिया की अटकलों का केंद्र रहा है।

II. सन्नी देओल का ‘दखल’ और भाई का धर्म
मीडिया में आई शुरुआती अफ़वाहों ने यह संकेत दिया था कि धर्मेन्द्र के गुज़रने के बाद, प्रकाश कौर के बेटों द्वारा ईशा और अहाना को विरासत से अलग रखने का प्रयास किया जा सकता है। इन अटकलों को तुरंत भावनात्मक और संवेदनशील टिप्पणियों द्वारा शांत किया गया।
सन्नी देओल, जो हमेशा से परिवार के मुखिया और एक ज़िम्मेदार बेटे की भूमिका निभाते रहे हैं, ने इन अफ़वाहों को सिरे से खारिज किया। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, सन्नी देओल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनके पिता की विरासत को पूरी गरिमा और ईमानदारी के साथ विभाजित किया जाए। यह हस्तक्षेप केवल संपत्ति के लिए नहीं है, बल्कि पारिवारिक एकजुटता को बनाए रखने के लिए है।
माना जाता है कि सन्नी ने साफ़ कर दिया है कि वह अपने पिता की इच्छाओं के ख़िलाफ़ नहीं जाएँगे और ईशा तथा अहाना को उनका वैधानिक और नैतिक हिस्सा दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह उनका ‘दखल’ नहीं, बल्कि एक बड़े भाई और परिवार के मुखिया के रूप में अपनी ज़िम्मेदारी निभाना है, ताकि किसी भी तरह के कानूनी या भावनात्मक विवाद को शुरू होने से पहले ही रोका जा सके।
III. क़ानूनी पहलू: हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम
भारत में, धर्मेन्द्र एक हिन्दू होने के नाते, उनकी संपत्ति का बँटवारा हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत नियंत्रित होगा, बशर्ते उन्होंने कोई वसीयत (Will) न छोड़ी हो।
1. वसीयत की उपस्थिति में: अगर धर्मेन्द्र ने एक मान्य वसीयत छोड़ी है, तो संपत्ति का बँटवारा पूरी तरह से वसीयत में लिखी गई शर्तों के अनुसार होगा। इस स्थिति में, वसीयत ही अंतिम निर्णय होगी और इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा कि उनके कितने बच्चे या पत्नियाँ हैं।
2. वसीयत की अनुपस्थिति में (Intestate Succession): अगर उन्होंने कोई वसीयत नहीं छोड़ी है, तो उनकी संपत्ति उनके श्रेणी I (Class I) वारिसों के बीच समान रूप से बाँटी जाएगी। श्रेणी I वारिसों में उनकी पत्नियाँ (हेमा मालिनी और प्रकाश कौर), और सभी बच्चे (सन्नी, बॉबी, ईशा, अहाना, विजयता और अजीता) शामिल होंगे।
क़ानूनी रूप से, ईशा और अहाना, सन्नी और बॉबी की तरह ही, धर्मेन्द्र की संपत्ति में समान हक़दार हैं। सौतेलेपन का क़ानूनी उत्तराधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता। सन्नी देओल का कथित हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि सभी कानूनी औपचारिकताएँ सुचारू रूप से पूरी हों और कोई भी वारिस अपने हक़ से वंचित न रहे।
IV. ₹450 करोड़ का बँटवारा: कैसे हो सकता है?
संपत्ति का बँटवारा कई तरह से हो सकता है:
समान नकद बँटवारा: अगर संपत्ति तरल (Liquid) है, तो इसे बराबर हिस्सों में बाँटा जा सकता है।
भौतिक संपत्ति का बँटवारा: कृषि भूमि, फ़ार्महाउस और घर को मूल्यांकन के आधार पर विभाजित किया जाएगा। यह सबसे जटिल हिस्सा हो सकता है, क्योंकि किसी भी संपत्ति को शारीरिक रूप से बराबर हिस्सों में बाँटना मुश्किल होता है।
समझौते द्वारा बँटवारा (Family Settlement): यह सबसे अच्छा तरीका है। परिवार के सदस्य आपसी सहमति से यह तय करते हैं कि कौन-सा सदस्य कौन-सी संपत्ति लेगा, ताकि कुल मिलाकर सबका हिस्सा बराबर हो। सन्नी देओल का प्रभाव इस पारिवारिक समझौते को शांतिपूर्ण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष: रिश्तों की जीत
धर्मेन्द्र की विरासत बॉलीवुड के लिए एक केस स्टडी है। ₹450 करोड़ का सवाल पैसे से ज़्यादा रिश्तों की परीक्षा है। सन्नी देओल का कथित रूप से यह सुनिश्चित करना कि ईशा और अहाना को उनका उचित हिस्सा मिले, एक संकेत है कि परिवार के भीतर, भले ही सार्वजनिक रूप से दूरी रही हो, पारिवारिक मूल्य अभी भी ज़िंदा हैं।
अगर परिवार शांतिपूर्ण और न्यायसंगत बँटवारा करने में सफल रहता है, तो यह धर्मेन्द्र के जीवन की सबसे बड़ी जीत होगी—एक ऐसी जीत जहाँ पैसे पर इज़्ज़त और भाईचारा हावी रहेगा। सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह विशाल विरासत किस तरह से विभाजित होती है और क्या यह देओल परिवार की अगली पीढ़ी के बीच एक अटूट बंधन स्थापित कर पाएगी।
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