कुवारे भतीजे को मामी ने वो सब करने दिया जो पत्नी अपने पति को करने देती
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💔 कुंवारे भतीजे को मामी ने वो सब करने दिया जो पत्नी अपने पति को करने देती
I. मामा की चेतावनी और मामी की खूबसूरती
यह कहानी समीर (भतीजा) की है, जो पहली बार अपने मामा के घर छुट्टियाँ बिताने आया था। समीर की मामी बेहद खूबसूरत थीं, जबकि मामा बिल्कुल सादे और सीधे-साधे इंसान थे।
मामा ने समीर को घर छोड़ने से पहले ही एक अजीब चेतावनी दी थी:
“देखो मेरे प्यारे भांजे, तुम्हारी मामी ठीक औरत नहीं है। मैं हमेशा काम पर होता हूँ और तुम्हारी मामी अकेली रहती है। वो तुम्हें अपनी खूबसूरती के जाल में फँसाना चाहेगी, लेकिन तुम उसके धोखे में मत आना।“
समीर ने मामा को भरोसा दिलाया था कि वह उनकी बातें याद रखेगा।
पहली मुलाकात और अजीब एहसास
करीब दो घंटे बाद जब मामा और मामी शॉपिंग से लौटे, तो मामी ने चेहरे पर स्कार्फ़ बाँध रखा था। जैसे ही वे घर के अंदर आए, मामी ने स्कार्फ़ हटाया और समीर की नज़र अनायास ही उन पर चली गई। मामी किसी फिल्म की हीरोइन जैसी खूबसूरत लग रही थीं।
मामा ने हँसते हुए समीर को टोका, “अरे भांजे साहब, कहाँ खो गए हो? मैं कब से बुला रहा हूँ।”
थोड़ी देर बाद मामी भी समीर के पास आईं और बड़े प्यार से उसे गले लगाया। यह अजीब था कि यह उनकी पहली मुलाकात थी, लेकिन कोई अनजानापन महसूस नहीं हो रहा था।
समीर को मामा के घर आए दो दिन हो चुके थे। मामी ने उसकी इतनी अच्छी देखभाल की कि उसे लगा जैसे वह पूरे छुट्टियों के लिए यहीं आया है। मगर उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि यहीं से उसकी ज़िंदगी एक अजीब मोड़ लेने वाली थी।

II. मामा का विदेश जाना और मामी की ‘ज़िम्मेदारी’
तीसरे दिन सुबह जब समीर की आँख खुली, तो उसने देखा मामा अपना बैग पैक कर रहे थे।
“मामा, आप इतनी सुबह बैग क्यों पैक कर रहे हैं? कहीं जा रहे हैं क्या?” समीर ने हैरानी से पूछा।
“समीर, मुझे एक बहुत ही ज़रूरी काम से 2 महीने के लिए विदेश जाना पड़ रहा है। यह मेरे लिए बहुत बड़ा मौका है। यही काम मुझे आगे एक ऊँची पोस्ट दिला सकता है,” मामा ने गंभीर आवाज़ में उत्तर दिया।
समीर ने कहा, “ठीक है मामा। शाम तक मैं पापा को बुला लेता हूँ और मैं भी अपने घर लौट जाऊँगा।”
मामा ने सिर हिलाया और बोले: “नहीं समीर, तुम यहाँ से नहीं जाओगे। मैं नहीं चाहता कि तुम अकेले घर जाओ। जब तक मैं वापस न आ जाऊँ, तुम्हारी मामी की सारी ज़िम्मेदारी तुम्हारे ऊपर है।“
मामा आगे बोले, “मामी को अंधेरे से बहुत डर लगता है। अगर उन्हें किसी भी तरह की मदद चाहिए, तो तुम बिना झिझक उनकी सहायता करना।“
समीर को थोड़ा अजीब लगा कि शादी के बाद भी किसी को अंधेरे से इतना डर कैसे लग सकता है। उसने सिर झुकाकर कहा, “ठीक है मामा। मैं ध्यान रखूँगा।”
मामा ने विदा करते वक़्त आख़िरी बार कहा, “समीर, अपनी मामी का ख्याल रखना।“
III. अंधेरे का बहाना और हदों का टूटना
मामा के विदेश जाने के बाद घर में सिर्फ़ समीर और मामी ही थे।
उस रात जब समीर हॉल में टीवी देख रहा था, तो मामी आकर ठहर गईं और बोलीं, “चलिए थोड़ी देर बाहर घूम आते हैं। माहौल भी बदल जाएगा।”
वे स्कूटी पर बाहर गए। सड़क पर अचानक एक झटका लगा, तो समीर का हाथ अनजाने में मामी की पीठ से छू गया। समीर झेंप गया, मगर मामी ने पीछे मुड़कर नरमी से कहा, “समीर, गिर जाओगे, पकड़ लो।” और उन्होंने खुद उसका हाथ पकड़कर अपनी कमर के पास टिकाया। उनके इस व्यवहार में कोई झिझक नहीं थी, बल्कि एक बड़े की तरह चिंता थी।
घर लौटने पर अचानक लाइट चली गई और घर गहरे अंधेरे में डूब गया।
अचानक मामी ने घबराकर पलटकर समीर को कसकर पकड़ लिया। “समीर, अंधेरा! मुझे बहुत डर लग रहा है।“
उनके काँपते हाथ समीर के कंधों पर रखे थे। समीर फौरन कहा, “मामी, घबराइए मत। मैं हूँ ना।” मामी तकरीबन 5 मिनट तक समीर को वैसे ही थामे रहीं, और फिर अचानक लाइट आ गई। जैसे ही लाइट आई, मामी भी जैसे होश में आ गईं और फौरन उससे दूर हो गईं।
“मुझे माफ़ करना,” इतना कहकर वह शर्माते हुए अपने कमरे में चली गईं। समीर पूरी तरह हैरान था।
छेड़खानी और बेचैनी
अगले दिन सुबह जब समीर उठा, तो मामी किचन में चाय बना रही थीं। मामी ने फिर से अचानक समीर को ज़ोर से गले लगा लिया।
“अरे भांजे साहब, इतना शर्माने की क्या बात है? मुझे पता है कि यह सब तुम्हारे लिए नया है। लेकिन कल रात मैं सच में बहुत डर गई थी। अगर तुम्हें बुरा लगा हो, तो मुझे माफ़ कर देना,” मामी ने कहा और फिर से मज़ाक में उसे हल्के से गले लगाया।
लेकिन उनकी इन हरकतों से समीर के मन में कुछ अलग ही भावनाएँ उठने लगी थीं। उसे भी यह महसूस होने लगा था कि वह अब बड़ा हो रहा है।
कुछ दिनों बाद, एक शाम समीर समोसे खाने की इच्छा हुई और वह मामी के कमरे की तरफ़ गया। मामी का कमरा थोड़ा सा खुला हुआ था। समीर बिना अनुमति के ही धीरे से अंदर चला गया। उस वक़्त मामी बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई मोबाइल में कुछ देख रही थीं। समीर ने जब उनके मोबाइल में झाँका, तो उसकी आँखें सचमुच फैल गईं। जो वह देख रहा था, वह उसके लिए बिल्कुल नया और शर्म पैदा करने वाला था। वह तुरंत दरवाज़े के पास वापस चला गया।
उस रात तेज बरसात हो रही थी। मामी ने फिर से समीर को ज़ोर से आवाज़ दी और उसे गले लगा लिया। मामी ने कहा, “समीर, तुम अब जब तक लाइट नहीं आती, तब तक मेरे कमरे में रह सकते हो। मुझे अंधेरे में बहुत डर लगता है।” समीर ने सोचा और वहीं रहने का फैसला किया।
पेट दर्द और सच्चाई
अगले दिनों में, मामा के बाहर जाने के बाद मामी ने समीर को अपने कमरे में साथ सोने के लिए कहा। समीर को कोई एतराज़ नहीं था, क्योंकि मामी का साथ उसे अच्छा लगने लगा था।
लेकिन अचानक समीर का पेट दर्द करने लगा। मामी की बातों में उसे थोड़ी घबराहट महसूस हो रही थी। मामी कुछ और चाह रही थीं, पर समीर समझ नहीं पा रहा था कि वास्तव में क्या हो रहा है।
समीर को लगातार पेट दर्द और कमज़ोरी बढ़ती जा रही थी। मामी रोज़ किसी न किसी बहाने से खुश रहने का दिखावा कर रही थीं।
समीर ने अपने पापा को कॉल किया और कहा, “मैं घर आने वाला हूँ।“
यह सुनकर मामी थोड़ी घबरा गईं और बोलीं, “क्या तुम्हारे मामा ने तुम्हें नहीं बताया कि मामी का ध्यान रखना है? तुम अभी नहीं जा सकते।” मामी ने उसे घर न जाने देने की ज़िद पकड़ ली।
IV. धोखे का खुलासा और सबक
मामा गए हुए लगभग एक हफ़्ता हो गया था। शाम को 7:00 बजे घर की बेल बजी। समीर ने अपने पास देखा, तो मामी उसके ऊपर हाथ रखकर सो रही थीं। बेल लगातार बज रही थी, इसलिए मामी दरवाज़ा खोलने गईं।
समीर के पापा दरवाज़े पर खड़े थे। पापा ने बताया, “जब मैं तुम्हें यहाँ छोड़ने आया था, तब मैं पुलिस स्टेशन गया था। वहाँ मुझे एक लड़की के बारे में जानकारी मिली, जिसके बारे में मेरे सहकर्मी खोज कर रहे थे।“
पापा ने खुलासा किया: “तुम्हारे मामा ने नाम और पहचान बदलकर मामी से शादी कर ली है। मामा जी का फ़ोन कटने के बाद पापा को यह चौंकाने वाली जानकारी मिली कि मामा और मामी कुछ लोगों को भ्रमित कर गलत काम कर रहे थे।“
समीर को अब सब कुछ समझ आया कि उसके पेट में दर्द क्यों हो रहा था। मामा ने समीर को नशीला दूध पिलाया था और मामी भी कुछ ऐसा कर रही थीं। जल्दी पैसे कमाने के चक्कर में मामा-मामी अंधे हो गए थे और उन्होंने अपने भतीजे के साथ भी धोखा किया।
मामामी ने रिश्ते की भी परवाह नहीं की। समीर तो मामा के प्यार में उनके घर छुट्टियाँ बिताने गया था, लेकिन उन्होंने मामी के साथ मिलकर उसे धोखा दिया।
समीर के पापा ने इस मामले की जाँच की और समीर को इस धोखे के जाल से बाहर निकाला।
समीर ने महसूस किया कि आजकल के युग में रिश्तों, प्रेम और आपसी भावनाओं की कोई कीमत नहीं रह गई। सब अपने फ़ायदे के लिए जीते हैं।
जैसा कर्म होता है, वैसा ही फल भी मिलता है। समीर को मामा की चेतावनी याद आई, और उसने अपने परिवार के साथ मिलकर सच्चाई का सामना किया।
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