एक नेक लड़की की शादी एक गधे से हो गई l गधे ने लड़की के साथ देखो क्या किया

“गद्दे की शादी – एक हाफिज़ा लड़की, शहजादे की तौबा और इंसाफ की कहानी”
प्रस्तावना
यह कोई आम कहानी नहीं, बल्कि इंसान की फितरत, तौबा, बद्दुआ और नेकी की मिसाल है। एक मासूम हाफिज़ा लड़की की शादी एक गद्दे (गधे) से कर दी गई। मगर किसी ने नहीं जाना कि उस गद्दे के अंदर कौन सा राज छुपा है। जब रात गुजरी, तो ऐसा वाकया पेश आया कि पूरा गांव कांप उठा। यह कहानी एक अंजाम ही नहीं, बल्कि सबक है – कि जुल्म का अंजाम क्या होता है और तौबा की ताकत कितनी बड़ी होती है।
भाग 1: बादशाह का बेटा और फकीर की भविष्यवाणी
किसी मुल्क में एक बादशाह था, जो अरसे से बेऔलाद था। बहुत दुआओं के बाद उसकी बीवी की गोद भरी और महल में बच्चे की किलकारी गूंजने लगी। मिठाइयां बटीं, खुशियां मनाई गईं। उसी वक्त एक फकीर महल के बाहर आया, “कोई अल्लाह के नाम पर मुझे रोटी खिला दे।”
बादशाह ने उसे महल बुलाया, पेट भर खाना खिलाया। फकीर बच्चे को गौर से देखने लगा। मलिका हैरान थी, “यह फकीर हमारे बच्चे को इतनी गौर से क्यों देख रहा है?” बादशाह मुस्कुरा कर बोला, “हमारा बच्चा लाखों में एक है।”
फकीर बोला, “बादशाह सलामत, बुरा ना मानो, यह बच्चा बड़ा होकर तुम्हारा जीना हराम कर देगा। हर जगह बदनामी और रुसवाई करवाएगा। इसके साथ काला साया है। बेहतर यही है कि इसे अभी जंगल में फेंक दो या किसी बेऔलाद जोड़े को दे दो।”
बादशाह और मलिका गुस्से में आ गए। फकीर को धक्के देकर महल से निकाल दिया। मगर फकीर बार-बार कहता रहा, “मैं सच बोल रहा हूं।”
भाग 2: शहजादे का बचपन और जुल्मी स्वभाव
शहजादे को बचपन में अजीब शौक था – नौकरों से कहता, “गधा बनो, मैं तुम्हारी पीठ पर सवारी करूंगा।”
जैसे-जैसे बड़ा हुआ, तीर चलाना, शिकार करना सीखा, मगर पढ़ा लिखा जाहिल था। गरीबों पर जुल्म करता, मां-बाप के कलेजे से खून के आंसू रुलाता। बादशाह ने समझाया, “यही गरीब हैं जिनकी वजह से हमारी जमीनें चलती हैं।”
शहजादा बोला, “मैं इनको इनकी औकात दिखाऊंगा।”
बादशाह ने पहली बार उसके मुंह पर थप्पड़ मारा। शहजादे ने ठान लिया, “इस थप्पड़ का बदला मैं जरूर लूंगा।”
बादशाह मुल्क से बाहर गया। शहजादे ने मनमानी शुरू कर दी। नौकरानी को गर्म दूध लाने पर उसका चेहरा जला दिया। नौकरानी बद्दुआ देती हुई महल से बाहर चली गई।
भाग 3: गरीबों पर जुल्म और फातिमा-हलीमा की कहानी
शहजादा घोड़े पर सवार होकर गांव में घूमता, सलाम ना करने वालों को हंटर से पीटता। उसका कहना था, “गरीब सब गधे हैं।”
एक दिन उसने देखा, एक बूढ़ा किसान दरख्त के नीचे आराम कर रहा था। शहजादे ने उसे जमीन पर गिरा दिया, “यह गधा है, काम करना चाहिए था, आराम नहीं।”
बूढ़ा रोते हुए बद्दुआएं देने लगा, “ऐसी औलाद से तो बेऔलाद ही अच्छा था।”
शहजादा और वजीर शिकार के लिए तालाब पहुंचे। वहां फातिमा और उसकी बेटी हलीमा मछलियां बेच रही थीं। शहजादा बोला, “तुम हमारी सल्तनत को गंदगी बना रही हो।”
फातिमा बोली, “हम मजबूर हैं, यही हमारा रोजगार है।”
शहजादा ने बूढ़ी फातिमा को तालाब में धकेल दिया। हलीमा चीखती रही, “मेरी मां को बचाओ!”
शहजादा ने उल्टा इल्जाम लगाया, “यह लड़की अपनी मां को तालाब में फेंक रही थी।”
सिपाहियों ने हलीमा के मुंह पर काला रंग मल दिया, गधे पर बिठाकर शहर से निकाल दिया।
हलीमा रोते हुए कहती गई, “एक दिन ऐसा आएगा कि तू मेरे कदमों में गिरेगा।”
भाग 4: शहजादे की गुरूर और बुजुर्ग की बेटी
शहजादा और वजीर आगे बढ़े, एक खूबसूरत लड़की बकरियां चरा रही थी।
शहजादे ने वजीर से कहा, “काश यह लड़की एक रात के लिए मुझे मिल जाए।”
वजीर ने लड़की से कहा, “शहजादे को पसंद आ गई हो, एक रात उसके पास रहो।”
लड़की गुस्से में बोली, “क्या मैं कोई खिलौना हूं? मेरे करीब मत आना।”
वह भागकर अपने बाबा के पास पहुंची।
उसका बाबा वही बुजुर्ग था जिसने शहजादे के बारे में भविष्यवाणी की थी।
लड़की ने सब बताया। बुजुर्ग ने तस्बीह पर कुछ पढ़ा और शहजादे पर फूंक मारी।
शहजादा उसी वक्त गधे में तब्दील हो गया।
वजीर रोता रहा, “माफ कर दो।”
बुजुर्ग बोले, “ठीक है, महल में ले जाओ, अब हिनहिनाए और पता चले जुल्म कैसे होता है।”
भाग 5: महल की तबाही और गधे का पछतावा
महल के पास पहुंचे तो पता चला, एक जालिम बादशाह ने महल पर कब्जा कर लिया है। शहजादे की मां-बाप को महल से निकाल दिया गया। गधा रोने लगा, “मेरे किए की सजा मेरे मां-बाप को मिल रही है।”
वजीर और गधा बादशाह-मलिका को ढूंढने लगे।
शहर के कोने में मिट्टी की कुटिया में बादशाह और मलिका रह रहे थे।
मलिका ने गधे की आंखें देखीं, “ये आंखें तो मेरे बेटे जैसी हैं।”
वजीर ने सारी हकीकत बता दी।
मलिका रोकर बोली, “हमने सच पर कान नहीं धरे, अब अल्लाह हमें फल दिखा रहा है।”
भाग 6: तौबा का रास्ता और बुजुर्ग की शर्त
बादशाह ने फैसला किया, “चलो, बुजुर्ग के पास चलते हैं, माफी मांगते हैं।”
बुजुर्ग बोले, “अल्लाह की रहमत वसीय है, मगर एक रास्ता है। अगर कोई पाक दिल वाली लड़की अपनी खुशी से इस गधे से शादी कर ले, तो वह इंसान बन सकता है।”
बुजुर्ग ने एक आईना दिया, जिसमें सिर्फ सच्चे दिल वाले का चेहरा चमकता था।
बादशाह और वजीर जगह-जगह लड़की की तलाश करने लगे। मगर हर लड़की का चेहरा आईने में धुंधला नजर आता।
अंत में एक छोटी कोठरी से कुरान की तिलावत की आवाज आई।
वजीर ने देखा, आईने में लड़की का चेहरा चमक रहा था।
भाग 7: हाफिज़ा लड़की की परीक्षा और शादी
वजीर ने लड़की से कहा, “तुम्हारे हाथों से एक गुनहगार की जिंदगी बदल सकती है।”
लड़की बोली, “अगर किसी की भलाई हो, तो मैं जरूर चलूंगी।”
महल में गधा बंधा था।
बादशाह ने कहा, “अगर तुम अपनी खुशी से इससे शादी कर लो, तो शायद अल्लाह रहम कर दे।”
लड़की ने कहा, “अगर मेरी शादी से किसी की जिंदगी बच सकती है, तो मैं तैयार हूं।”
बुजुर्ग ने पूछा, “क्या तू फिर भी राजी है?”
लड़की ने कहा, “हां, मैं नियत नेकी की कर रही हूं।”
दरख्त के नीचे निकाह पढ़ाया गया।
जैसे ही लड़की ने “कबूल है” कहा, तेज रोशनी फैली।
गधा इंसान बन गया।
शहजादा लड़की के कदमों में गिर गया, “मुझे माफ कर दो।”
लड़की बोली, “जब तूने दिल से तौबा कर ली, तो मैं तुझे माफ करती हूं।”
भाग 8: इंसाफ की जंग और सल्तनत की वापसी
शहजादा ने कहा, “जब तक अपनी सल्तनत वापस नहीं लेता, मेरा दिल मुतमिन नहीं होगा।”
बुजुर्ग ने दुआ दी, “जा बेटा, अब तू अल्लाह का सिपाही है।”
शहजादे ने वफादार सिपाही इकट्ठे किए।
जंग शुरू हुई।
शहजादे ने नारा लगाया, “यह जंग तख्त की नहीं, सच की है।”
आखिरकार जालिम बादशाह हार गया।
शहजादे ने कहा, “अगर तू तौबा करे, तो मैं तुझे माफ करता हूं।”
अपनी नेक दिल बीवी को पास बिठाया, “यह औरत मेरी निजात है, जिसने मेरी जान बचाई, इज्जत बचाई।”
गांव में खुशी की गूंज फैल गई।
मलिका ने कहा, “अल्लाह ने हमारी दुआएं सुन लीं।”
बुजुर्ग ने शहजादे के सर पर हाथ रखा, “अब यह महल दौलत का नहीं, इंसाफ का महल कहलाएगा।”
समाप्ति और सबक
गुरूर का अंजाम तौबा में, जुल्म का अंजाम इंसाफ में और इंसान का असल रूप नेकी में नजर आने लगा।
यह किस्सा बताता है –
इज्जत सबसे बड़ी दौलत है, और सच्ची नियत सबसे बड़ी ताकत।
जब दिल सच्चा हो जाए, पत्थर भी फूल बन जाते हैं।
प्यारे दोस्तों, यह कहानी कैसी लगी?
अगर आपके दिल को छू गई हो, तो अपनी राय जरूर बताएं।
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