कब्रिस्तान में महिला के साथ हुआ गलत काम/S.P साहब के भी रोंगटे खड़े हो गए/

अंधविश्वास की कालिख: कब्रिस्तान का वहशी दरिंदा

मध्य प्रदेश का जबलपुर जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी जिले के बरघट गाँव में एक ऐसी घटना घटी जिसने मानवता और रिश्तों की पवित्रता को तार-तार कर दिया। यह कहानी है अनवर की, जो पेशे से एक मिस्त्री था, लेकिन उसकी मानसिकता किसी /है/वा/न/ से कम नहीं थी।

अनवर: एक व्यसनी और लापरवाह व्यक्तित्व

अनवर गाँव के लोगों के मकान बनाने का काम करता था और इस काम से वह अच्छी कमाई भी कर लेता था। लेकिन उसके व्यक्तित्व में एक गहरा दोष था—वह अपनी सारी कमाई /श/रा/ब/ और /श/बाब/ पर उड़ा देता था। उसकी इन बुरी आदतों के कारण उसका घर हमेशा आर्थिक तंगी से जूझता रहता था। अनवर की पत्नी सलमा एक बेहद खूबसूरत महिला थी, जो अक्सर उसे भविष्य के लिए पैसे बचाने की सलाह देती थी, पर अनवर उसकी बातों को अनसुना कर देता था।

इन दोनों के बीच झगड़े की एक और बड़ी वजह थी—उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान न होने का दुख और एक-दूसरे पर दोषारोपण ने उनके वैवाहिक जीवन को कड़वाहट से भर दिया था। इसी मानसिक कमजोरी का फायदा उठाकर वे अंधविश्वास की राह पर चल पड़े और तांत्रिकों के चक्कर लगाने लगे।

तांत्रिक की /खौ/फ/नाक/ सलाह

12 दिसंबर 2025 की सुबह अनवर और सलमा अपने घर में बातचीत कर रहे थे, तभी अब्दुल नाम का एक तांत्रिक उनके घर पहुँचा। संतान की चाह में अंधे हो चुके इस जोड़े ने तांत्रिक के सामने अपनी समस्या रखी। तांत्रिक अब्दुल ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए एक ऐसा उपाय बताया जो किसी भी सभ्य इंसान की रूह कंपा दे।

तांत्रिक ने कहा, “तुम्हें संतान सुख तभी मिलेगा जब तुम कब्रिस्तान में जाकर मृत महिलाओं के पार्थिव शरीर के साथ /अ/नै/ति/क/ संबंध बनाओगे।” यह सुनकर जहाँ किसी भी सामान्य व्यक्ति को घृणा होती, वहीं संतान की चाहत में अंधी हो चुकी सलमा ने अपने पति को इस /घि/नो/ने/ काम के लिए उकसाया। उसने धमकी तक दे दी कि अगर अनवर ने यह काम नहीं किया, तो वह उसे तलाक दे देगी।

पहली घटना और आयशा के साथ /दु/र्व्य/व/हा/र/

इसी बीच गाँव के मुखिया राशिद ने अनवर को कब्रिस्तान की चारदीवारी बनाने का काम सौंपा। अनवर को लगा कि यह उसकी /पा/श/वि/क/ इच्छा पूरी करने का सबसे सही मौका है। काम के लिए उसे एक मजदूर की जरूरत थी, इसलिए वह रहमान के घर पहुँचा।

रहमान की पत्नी आयशा बहुत सुंदर थी। जब अनवर वहां पहुँचा, तो रहमान नशे में धुत सो रहा था। आयशा ने अपनी गरीबी और तंगी के कारण अनवर से 1000 रुपये उधार मांगे। अनवर ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए /अ/मर्या/दित/ शर्त रखी। गरीबी से लाचार आयशा के पास कोई विकल्प नहीं था और उस दिन अनवर ने अपने ही दोस्त की पत्नी के साथ /अ/नैतिक/ संबंध बनाए। यह अनवर के पतन की शुरुआत थी।

कब्रिस्तान की वह काली रात

13 दिसंबर 2025 को गाँव की 40 वर्षीय महिला फातिमा का देहांत हो गया। उसे कब्रिस्तान में दफनाया गया। अनवर ने इसे अपने ‘अनुष्ठान’ का हिस्सा माना। उसने अपने मजदूर रहमान को 2000 रुपये का लालच देकर रात में रुकने के लिए मना लिया।

रात के अंधेरे में, जब सारा गाँव सो रहा था, अनवर ने रहमान को खूब /श/रा/ब/ पिलाई। जब रहमान नशे में हो गया, तो अनवर ने फातिमा की कब्र खोदी और उसके पार्थिव शरीर को बाहर निकालकर उसके साथ /अ/मान/वी/य/ कृत्य किया। इस /श/व/गा/मी/ (Necrophilia) कृत्य को अंजाम देने के बाद उसने शव को वापस दफना दिया।

इतना ही नहीं, वह नशे में धुत रहमान को उसके घर छोड़ने गया और फिर से आयशा की लाचारी का फायदा उठाकर उसके साथ /अ/नै/ति/क/ रिश्ता कायम किया। आयशा की पड़ोसन रुबीना ने उसे घर से निकलते देख लिया और उसे शक हो गया।

दूसरी घटना और रुबीना की सतर्कता

कुछ दिनों बाद गाँव में एक और महिला की मृत्यु हुई। अनवर ने फिर वही घिनौना खेल खेला। उसने दूसरी बार भी एक मृत महिला के शव के साथ /अ/मान/वी/य/ व्यवहार किया। उसे लग रहा था कि वह अपनी ‘तीसरी मनोकामना’ के करीब है।

दूसरी तरफ, रुबीना ने रहमान को बता दिया था कि अनवर उसकी पीठ पीछे आयशा से मिलता है। हालाँकि आयशा ने अपनी बातों से रहमान को समझा लिया था, लेकिन रहमान के मन में संदेह का बीज बोया जा चुका था।

पाप का घड़ा भरा: 22 दिसंबर की रात

22 दिसंबर 2025 को रहमान ने तय किया कि वह अनवर की असलियत सामने लाएगा। उस रात जब अनवर ने तीसरी बार कब्र खोदने की तैयारी की और रहमान को वहां से जाने को कहा, तो रहमान चुपचाप गाँव के मुखिया राशिद के पास पहुँचा। उसने राशिद को अनवर की सारी काली करतूतें बता दीं।

राशिद ने बिना देर किए पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस, राशिद और रहमान कब्रिस्तान पहुँचे, तो अनवर वहां कब्र खोद रहा था। पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

न्याय और समाज की सीख

पुलिस स्टेशन ले जाए जाने पर अनवर की जमकर धुनाई हुई। उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि वह अंधविश्वास के चलते एक ‘स्वस्थ बेटा’ पाने के लिए ये /अ/मान/वी/य/ काम कर रहा था। पुलिस ने उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।

निष्कर्ष: यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अंधविश्वास किस कदर इंसान को /है/वा/न/ बना सकता है, अनवर उसका जीता-जागता उदाहरण है। शिक्षा की कमी और /वि/कृ/त/ मानसिकता के कारण उसने न केवल जीवित महिलाओं का /शो/ष/ण/ किया, बल्कि मृतकों की शांति को भी भंग किया। ऐसे /न/र/पिशा/च/ को कड़ी से कड़ी सजा मिलना अनिवार्य है ताकि समाज में एक उदाहरण पेश किया जा सके।